उत्तराखंड: कितनी बिजली परियोजनाएं बह गईं?

  • 1 अगस्त 2013

उत्तराखंड में बाढ़ के साथ आई भयानक त्रासदी ने पनबिजली परियोजनाओं को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है, जिसके चलते करीब एक दर्जन से अधिक परियोजनाएँ ठप पड़ी हैं.

उत्तराखंड में बिजली कारोबार के लिए रिलायंस पावर, जीवीके पावर, जीएमआर इंफ्रा, एनएचपीसी, टीएचडीसी और एनटीपीसी जैसी बड़ी कंपनियां होड़ में हैं.

दरअसल बाढ़ के साथ बड़े स्तर पर भूस्खलन के कारण नदियों में पानी के साथ बहुत अधिक गाद बहकर आई, जो पनबिजली संयंत्रों में जमा हो गई है. इसके अलावा पानी के तेज़ बहाव से भी इन परियोजनाओं को नुक़सान पहुंचा है.

भारी तबाही

उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक जी पी पटेल ने बीबीसी को बताया कि बाढ़ से पौड़ी में स्थित चीला परियोजना में नुकसान हुआ है.

उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी की मनेरीभाली-1 और मनेरीभाली-2 की परियोजनाओं को भी काफ़ी नुकसान पहुंचा है. शुरुआती अनुमानों के मुताबिक यह नुकसान करीब 11.67 करोड़ रुपए का है.

जी पी पटेल ने बताया कि सात निर्माणाधीन परियोजनाओं को गंभीर नुकसान हुआ है और कुछ तो पूरी तरह से ही नष्ट हो गई हैं. इनमें 51 मेगावॉट क्षमता वाली काली गंगा-1 परियोजना चालू हो चुकी थी जबकि काली गंगा-2 पूरी होने वाली थी.

उन्होंने कहा कि असी गंगा-1 और 2 तथा शोबला-1 परियोजनाएं बह गई हैं. इन परियोजनाओं में जल्द ही उत्पादन शुरू होना था. इससे करीब 120 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है, जबकि इन्हें दोबारा खड़ा करने के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का नया निवेश करना होगा.

कई परियोजनाएँ बहीं

उत्तराखंड की 11 परियोजनाएं जो वर्षो से लगातार चल रहीं थीं, वे परियोजनाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं. इनमें 131 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है और उन्हें दोबारा चालू करने के लिए 219 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

इसके अलावा 185 मेगावाट की छिबरो परियोजना, 82 मेगावाट की खोदरी परियोजना, 30 मेगावाट की ढकरानी परियोजना, 46 मेगावाट की ढालीपुर परियोजना, 99 मेगावाट की मनेरी भाली फेज -1, 246 मेगावाट की मेनरी भाली फेज-2, 20 मेगावाट की पथरी परियोजना और 198 मेगावाट की कालागढ़ परियोजना को नुकसान पहुंचा है.

प्राकृतिक आपदा के चलते एनएचपीसी की तवाघाट परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा है. इस परियोजना की स्थापित क्षमता 280 मेगावॉट है.

गाद की भरमार

धारचुला के उप ज़िलाधिकारी प्रमोद कुमार ने बीबीसी को बताया कि 16 और 17 जून की रात में काफी ज़्यादा गाद आने के चलते एनएचपीसी की तवाघाट परियोजना को काफी नुकसान हुआ है.

एनएचपीसी की 280 मेगावॉट की धौलीगंगा परियोजना पूरी तरह डूब गई है लेकिन टानापुर परियोजना ठीक चल रही है.

उन्होंने बताया कि इस कारण प्रतिदिन तीन से चार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. प्रमोद कुमार ने बताया कि यदि इस पर दिन रात काम किया जाए तो भी उत्पादन शुरू होने में कम से कम छह महीने लग जाएंगे.

मुनसियारी के रहने वाले रुद्र सिंह पांडा ने बताया कि शेराघाट क्षेत्र में स्थित दो माइक्रो पनबिजली परियोजनाओं टांगा जल विद्युत परियोजना और मोतीघाट परियोजना की सुंरग में गाद भर गया है. इसके चलते बिजली उत्पादन बंद हैं.

उत्तरकाशी ज़िले में पिलन गढ़ परियोजना, असी गंगा-1 परियोजना, असी गंगा-2 परियोजना, कालंदी गढ़ परियोजना, रुद्रप्रयाग ज़िले में काली गंगा-1, काली गंगा-2 परियोजना सहित कुल तीन बड़ी और 17 छोटी परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई है.

निजी क्षेत्र भी प्रभावित

Image caption बिजली ना होने का चलते गाँव अंधेरे में डूबे हैं

निजी क्षेत्र की जिन परियोजनाओं को नुक़सान पहुंचा है उनमें जेपी पावर की 400 मेगावाट की विष्णुप्रयाग परियोजना, जीवीके पावर की 330 मेगावाट की श्रीनगर जल विद्युत परियोजना, लैंको इंफ्राटेक की फाटा ब्यौग परियोजना, और एलएनटी की सिगौली बटवाड़ी परियोजना शामिल हैं.

इसका सीधा असर एनएचपीसी, जेपी पावर, लैंको इंफ्राटेक और जीवीके पावर जैसी कंपनियों पर पड़ा है. पिछले एक महीने के दौरान इन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने के मिली है. लैंको इंफ्राटेक का शेयर बुधवार को आज तक के अपने सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रहा था.

इस क्षेत्र में मझोली परियोजनाओं के अलावा करीब एक दर्जन छोटी परियोजनाओं को भी नुक़सान हुआ है. छोटी परियोजनाओं को छोड़कर उत्तराखंड विद्युत निगम की सारी परियोजनाएं फिर से बिजली उत्पादन करने लगीं है.

विद्युत आपूर्ति बाधित

इन परियोजनाओं में उत्पादन ठप होने और ट्रांसमिशन लाइनों के टूट जाने के चलते कई पहाड़ी इलाकों में बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है.

धारचुला में स्थित कंजोती पावर स्टेशन बंद पड़ा है और इससे पूरे इलाके में पावर ट्रांसमिशन पूरी तरह से खत्म हो गया है. इसीलिए जिन इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप है, वहाँ राज्य सरकार ने लोगों को सोलर लालटेन देने का फैसला किया है. सरकार का दावा है कि करीब 75 प्रतिशत परिवारों को लालटेन दे दी गई है.

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