दुर्गाशक्ति के निलंबन में दखल नहीं: हाई कोर्ट

अखिलेश यादव
Image caption अखिलेश यादव ने निलंबन की कार्रवाई को सही बताया है.

उत्तर प्रदेश की आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दखल देने से इंकार कर दिया है.

हाई कोर्ट में 30 जुलाई को लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने याचिका दायर कर अधिकारियों के निलंबन मामले में दिशा-निर्देश जारी करने की माँग की थी.

आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल को पिछले दिनों निलंबित कर दिया गया था. सरकार की ओर से इसकी वजह नोएडा के एक गांव में मस्जिद की दीवार गिराने की कथित कार्रवाई बताई गई थी.

विपक्ष ने भी अधिकारी के निलंबन को ग़लत बताया था.

बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने बताया कि अदालत ने दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को सेवा संबंधी विषय बताते हुए इसमें दखल देने से इंकार कर दिया.

अदालत ने कहा कि दुर्गा शक्ति नागपाल का निलंबन सरकार और अधिकारी के बीच का मामला है इसलिए इसमें अदालत दखल नहीं दे सकती.

अदालत ने मांगी खनन पर जानकारी

हालाँकि अदालत ने याचिका में अवैध खनन और अवैध धार्मिक स्थलों के निर्माण के विषय में अधिक जानकारी माँगी है.

नूतन ठाकुर की याचिका में अवैध बालू खनन और अवैध निर्माण को बड़ी समस्या बताया गया है. याचिका में कहा गया है कि सरकार को इसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करना चाहिए.

इससे पहले गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि दुर्गा शक्ति नागपाल का निलंबन वापस नहीं लिया जाएगा.

अखिलेश यादव ने इस बात को नकारा कि खनन माफ़िया के ख़िलाफ़ कार्रवाई के कारण दुर्गाशक्ति नागपाल को निलंबित किया गया है.

'कार्रवाई सही है'

खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "सरकार भी इस पक्ष में है कि अवैध खनन न हो. जिसके पास अनुमति है वही खनन कर पाए. इससे पहले भी अधिकारियों ने खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है उनका निलंबन नहीं किया गया."

मस्जिद की दीवार गिराए जाने के आरोप में अखिलेश ने कहा, "गरीब मुसलमान चंदा इकट्ठा करके मस्जिद बना रहे थे. दीवार बनी हुई थी. बिना किसी से मशविरा लिए दुर्गा शक्ति ने दीवार गिरा दी. इससे माहौल ख़राब हो सकता था."

मुख्यमंत्री के मुताबिक़ 'सांप्रदायिक ताक़तें इसका फ़ायदा उठा सकती थीं'.

डीएम की रिपोर्ट

नोएडा के डीएम रविकांत सिंह की रिपोर्ट में दुर्गाशक्ति नागपाल को क्लीन चिट दिए जाने के संबंध में अखिलेश ने कहा कि सिर्फ डीएम की ही रिपोर्ट नहीं आई है बल्कि 'हमारे पास स्थानीय खुफ़िया यूनिट की भी रिपोर्ट है.'

अखिलेश ने इस मामले में विपक्ष पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया.

इससे पहले बीबीसी से बातचीत में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा था कि अधिकारी भी सांप्रदायिक मानसिकता से कार्य कर रहे हैं. यदि डीएम ने दुर्गाशक्ति को क्लीनचिट दी है तो उनके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जानी चाहिए. नरेश अग्रवाल ने भी खनन के मामले को पूरी तरह गलत बताया.

वहीं नोएडा के डीएम रविकांत सिंह ने पूरे प्रकरण पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

विपक्ष का निशाना

Image caption विपक्ष का आरोप है कि दुर्गा शक्ति नागपाल को उनकी ईमानदारी की सज़ा मिल रही है

इससे पहले उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, "उत्तर प्रदेश में आपराधिक तत्वों का राज चल रहा है जिसका शिकार उत्तर प्रदेश की जनता के साथ-साथ अपने कार्यों के प्रति निष्ठावान और ईमानदार अफ़सर भी बन रहे हैं."

भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि 'एक ईमानदार अफ़सर पर ग़लत कार्रवाई की गई है और पूरा देश दुर्गाशक्ति नागपाल के साथ है'.

स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों और विपक्ष के आरोपों के मुताबिक दुर्गाशक्ति नागपाल खनन माफ़िया के खिलाफ़ सख़्ती से कार्रवाई कर रहीं थी जिस कारण दीवार का बहाना बनाकर उनका निलंबन किया गया.

गुरुवार को ऑल इंडिया आईएएस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कार्मिक मामलों के राज्यमंत्री वी नारायणसामी से मुलाकात की और दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन रद्द करने की माँग की.

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