दुर्गा शक्ति पर अखिलेश सख्त, थमाई चार्जशीट

  • 4 अगस्त 2013
दुर्गा शक्ति नागपाल
Image caption दुर्गा के समर्थन में सोनिया गाँधी ने पीएम को पत्र लिखा था.

उत्तर प्रदेश सरकार ने आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल पर सख्त रुख़ अपनाते हुए उन्हें चार्जशीट सौंप दी है. उन्हें नौ दिन पहले नोएडा में एक मस्जिद की दीवार गिराने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि इस चार्जशीट की एक कॉपी केन्द्र सरकार सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को भी भेजी गई है.

अखिलेश सरकार ने दुर्गा शक्ति को चार्जशीट का जबाव देने के लिए 15 दिन का समय दिया है.

सूत्रों ने बताया है कि दु्र्गा शक्ति को दी गई चार्जशीट में कहा गया है कि उन्होंने दीवार को गिराने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उन्हें पहले नोटिस देना चाहिए था.

केन्द्र का हस्तक्षेप

इससे पहले केंद्र सरकार ने पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की थी. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के संबंध में पत्र लिखकर कहा था कि दुर्गा के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए.

आईएएस अधिकारियों के प्रशासनिक मामलों की देखरेख करने वाले, कार्मिक मामलों के मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास ही है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने मामले में तत्परता दिखाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर 2010 बैच की अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के संबंध में रिपोर्ट माँगी है.

सामान्य तौर पर किसी भी आईएएस अधिकारी के निलंबन की स्थिति में राज्य सरकार को केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजनी होती है. दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में यह रिपोर्ट अभी तक नहीं भेजी गई है.

'नाइंसाफी न हो'

Image caption दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के कारण अखिलेश सरकार सवालों के घेरे में है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को शनिवार को लिखे पत्र में सोनिया गाँधी ने कहा था, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिकारी के साथ अन्याय न हो."

उन्होंने पत्र में लिखा, "इस घटना से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्य का पालन करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपाय उपलब्ध हैं या नहीं इसे आंकने की जरूरत भी रेखांकित हुई है. कानून व्यवस्था लागू कराने वाली मशीनरी को यह अहसास होना चाहिए कि निडर और निष्पक्ष होकर अपनी ड्यूटी और जनसेवा करने के लिए माहौल अनुकूल है"

दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के मामले में हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी लेकिन हाई कोर्ट ने निलंबन के मामले में दखल देने से इंकार कर दिया.

निलंबन

दुर्गा शक्ति नागपाल को उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 जुलाई को निलंबित कर दिया था. उन्हें एक निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार ध्वस्त कराने के आरोप में निलंबित किया गया था. गौतमबुद्ध नगर के एसडीएम (सदर) पद पर तैनात रही दुर्गा शक्ति नागपाल ने अवैध खनन के ख़िलाफ़ सख़्ती से कार्रवाई करते हुए कई डंपर सीज़ किए थे. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने निलंबन को सही बताया है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक खनन माफ़िया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना ही दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन की असली वजह है.

दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. बहुजन समाज पार्टी का आरोप है कि दुर्गा शक्ति नागपाल को खनन माफ़िया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के आरोप में हटाया गया है.

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