भारत भर में बग़ैर इजाज़त रेत खनन पर रोक

रेत का खनन

राष्ट्रीय ग्रीन ट्राइब्यूनल ने भारत में नदियों के तल से बगैर लाइसेंस या पर्यावरणीय इजाज़त के रेत के खनन पर रोक लगा दी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक राष्ट्रीय ग्रीन ट्राइब्यूनल में अर्ज़ी दी गई थी कि उत्तर प्रदेश में अवैध रेत खनन सरकारी मशीनरी की 'मिलीभगत' से हो रहा है.

पीटीआई के मुताबिक ट्राइब्यूनल ने याचिका का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि उसका आदेश पूरे देश में लागू होगा क्योंकि इस याचिका में अहम पर्यावरणीय मुद्दे शामिल हैं.

हालांकि शुरुआत में ग्रीन ट्राइब्यूनल बेंच ने सिर्फ यमुना, गंगा, हिंडन, चंबल और गोमती नदियों के तले से रेत के खनन पर रोक लगाई थी

लेकिन बाद में आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि रेत के अवैध खनन का पूरे देश पर प्रभाव पड़ रहा है.

ग्रीन ट्राइब्यूनल ने सभी राज्यों के खनन अधिकारियों और संबंधित पुलिस अफसरों से कहा है कि वो आदेश का पालन करवाएं.

पीटीआई के अनुसार राष्ट्रीय ग्रीन ट्राइब्यूनल बार एसोसिएशन की अर्ज़ी पर ट्राइब्यूनल ने सभी संबंधित अधिकारियों से 14 अगस्त तक जवाब मांगा है.

बार एसोसिएशन की अर्ज़ी में कहा गया है कि समाचारों से साफ है कि रेत के खनन का विरोध करने वाली दुर्गा शक्ति नागपाल जैसे अफसरों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया है.

'अवैध खनन से लाखों करोड़ का नुकसान'

Image caption गौतम बुद्ध नगर की एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल सस्पेंड की गई हैं.

पीटीआई ने लिखा है कि बार एसोसिएशन के वरिष्ठ वकील राज पंजवानी ने ट्राइब्यूनल के सामने कहा कि अवैध खनन और लाखों टन रेत के परिवहन से हर साल सरकारी खज़ाने को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

ट्राइब्यूनल ने भी अपने आदेश में कहा है कि अवैध खनन से सरकार को होने वाला नुकसान लाखों करोड़ का हो सकता है.

याचिका में ये भी कहा गया था कि “अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है”. और सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2012 के अपने आदेश में रेत के खनन के बुरे प्रभावों का ज़िक्र किया था.

उत्तर प्रदेश सरकार पर ये आरोप लग रहे हैं कि गौतम बुद्ध नगर की एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल को इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने अवैध रेत खनन करने वालों पर कार्रवाई की थी.

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