क्या आज संसद में स्पष्टीकरण देंगे एंटनी?

जम्मू-कश्मीर में पाँच भारतीय सैनिकों की हत्या के मामले में रक्षामंत्री एके एंटनी का मंगलवार को राज्यसभा में दिया गया वक्तव्य विवाद का विषय बना, तो इसमें विस्मय की बात नहीं है.

सीमा पर घट रही घटनाओं पर भाजपा का रोष या उत्तेजना एक सहज प्रतिक्रिया है. वह इसका भरपूर राजनीतिक लाभ भी लेना चाहेगी.

पर क्या एंटनी के पास कोई ऐसी जानकारी है, जिसे उन्होंने बताया नहीं या बताना नहीं चाहते? हमलावरों को पाकिस्तानी फ़ौजी मानने में उन्हें किस बात का संशय है? क्या उन्हें पाकिस्तान सरकार के इस बयान पर पक्का भरोसा है कि यह हमला उसकी सेना ने नहीं किया?

इस विश्वास की भी कोई वजह होगी. पर यह मान लेने पर कि हमला आतंकवादियों ने किया है, हमें उसके तार्किक निहितार्थ समझने होंगे. इसका मतलब क्या है?

यानी आतंकवादी गिरोह पहले से ज्यादा ताकतवर और गोलबंद हैं और वे हमारी सेना पर आसानी से हमला बोल सकते हैं.

साथ ही पाकिस्तानी सेना या तो उन्हें रोक नहीं सकती या उसकी इनके साथ मिलीभगत है. या यहसीमा पर पिछले कुछ समय से चल रही छिटपुट वारदात की परिणति है, जिन पर हमने ध्यान नहीं दिया?

नया पाकिस्तानी निज़ाम

भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सीमा के दोनों ओर हमेशा संदेहोंके घेरे में रहे हैं. पाकिस्तान में नई लोकतांत्रिक सरकार आई है. नए प्रधानमंत्री और नए राष्ट्रपति.

अगले कुछ महीनों में वहाँ नए सेनाध्यक्ष नियुक्त होंगे और सुप्रीम कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की भी नियुक्ति होगी. पाकिस्तानी सत्ता के यही केन्द्र हैं. पर उनमें नया क्या होगा?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने पद संभालने के पहले ही कहा कि भारत के साथ बातचीत फिर से शुरू करना उनकी प्राथमिकता की सूची में है.भारत के विदेशमंत्री सलमान खुर्शीद ने पुंछ की इस घटना के बाद कहा कि पाकिस्तान के साथ हम संवाद जारी रखना चाहते हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा की सालाना बैठक के दौरान एक-दूसरे से मुलाकात करने वाले हैं.

भारतीय जनता पार्टी के नेता मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री इस मुलाकात को रद्द करें, पर सरकार ने ऐसी कोई मंशा जाहिर नहीं की है. यानी सरकार को रोशनी की किरण दिखाई पड़ती है.

हत्याकांड के राजनीतिक निहितार्थ

सीमा पर हत्याएं तब हुई हैं, जब संसद का सत्र चल रहा है. इसलिए इसके राजनीतिक निहितार्थ संसदीय घटनाक्रम में देखे जा सकते हैं. मॉनसून सत्र का पहला दिन तेलंगाना के हवाले रहा. सीमा पर सैनिकों की हत्या के बाद दूसरा दिन भी विरोध और आपत्तियों का दिन रहा.

तीसरे दिन भी शोरगुल के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी. अलबत्ता सरकार ने खाद्य सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया, जिसे उपलब्धि कहा जा सकता है.

उधर राज्यसभा में कम्पनी कानून पर चर्चा चल ही रही थी कि कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित हो गई.

सरकार ने विपक्ष की बात मानकर खाद्य सुरक्षा अध्यादेश वापस ले लिया है और इस मसले पर अब विधेयक लाकर बहस कराने का फैसला कर लिया है.

इस समय भाजपा भी बहस के लिए तैयार है. इसलिए संसद में अगले कुछ दिन सार्थक गतिविधियों की संभावना नज़र आ रही है पर सीमा पर हत्याकांड गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

राजनीति बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा

अगले साल अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सेना हट रही है. ऐसा कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के जेहादी समुदाय को उस घड़ी का इंतजार है जब वह कश्मीर में हिंसा का माहौल फिर से बनाने में कामयाब हो पर क्या हमारी संसद में इस सवाल पर ठंडे मिजाज़ से बहस संभव है?

स्वतंत्रता की 66वीं वर्षगाँठ के मौके पर ग़रीबों की खाद्य सुरक्षा, कांग्रेस की राजनीतिक सुरक्षा और भाजपा की राष्ट्रीय सुरक्षा की तिरंगी थीम मुखरित हो रही है.

बुधवार को दोनों सदनों की कार्यवाही हंगामे के साथ ही शुरू हुई. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने तीखे वार किए, पर प्रधानमंत्री ख़ामोश रहे. क्या कांग्रेस ने इस सिलसिले में अभी तक रणनीति नहीं बनाई है? क्या सरकार आज कोई ठोस बात कहेगी? और क्या खाद्य सुरक्षा विधेयकपर यह हत्याकांड भारी पड़ेगा?

प्रधानमंत्री खामोश क्यों?

सुषमा स्वराज ने कहा कि सदन में अभी रक्षामंत्री नहीं है, लेकिन संयोग से प्रधानमंत्री मौजूद हैं. प्रधानमंत्री कहें कि इस घटना के लिए पाकिस्तानी सेना दोषी है.

उन्होंने अध्यक्ष से कहा कि आप प्रधानमंत्री को निर्देश दें कि वे प्रतिक्रिया व्यक्त करें. प्रधानमंत्रीजी आप उठें और जवाब दें. प्रधानमंत्री के खामोश रहने पर शोर-शराबा होने लगा और सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित हो गई.

खाद्य सुरक्षा विधेयक रखे जाते वक्त सुषमा स्वराज ने कहा, "मैं खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ सीमा सुरक्षा की बात कर रही हूँ. खाद्य सुरक्षा जितनी ज़रूरी है, उससे ज़्यादा ज़रूरी है सीमा सुरक्षा. खाद्य सुरक्षा बिल संसद में पेश हो गया है और वह पारित भी होगा. पर भारत के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी सेना को भारतीय जवानों की हत्या से दोषमक्त करने का बयान दिया है, जबकि सेना की विज्ञप्ति में पाक रेंजरों को जिम्मेदार ठहराया गया है."

सदन में उस समय यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं. उनके इशारे पर संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने रक्षामंत्री का बचाव करने की कोशिश की, पर विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ. लगता नहीं कि गुरुवार को भी स्थिति में विशेष सुधार होगा.

इस सत्र में सरकार खाद्य सुरक्षा विधेयक के अलावा भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास विधेयक, पेंशन फंड, इंश्योरेंस, कंपनी क़ानून और लोकपाल विधेयक को पास कराना चाहेगी. इसके अलावा आरटीआई और आपराधिक मामलों के कारण संसद सदस्यों की सदस्यता खत्म होने से जुड़े विधेयक को पास कराने की ज़रूरत भी होगी.

इनमें लोकपाल विधेयक के राजनीतिक निहितार्थ हैं. शेष विधेयकों पर कोशिश करके सहमति बनाई जा सकती है. पर उसके पहले पाकिस्तानी पहेली को सुलझाना होगा. उसे पाकिस्तान और भाजपा दोनों को ‘माकूल जवाब’ देना होगा. क्या यह संभव है?

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार