भगोड़े पुलिस अधिकारी पीपी पांडेय का सरेंडर

Image caption पिछले दिनों सीबीआई की अदालत में स्ट्रेचर पर लाए गए पीपी पांडे

इशरत जहां मुठभेड़ मामले में आरोपी और गुजरात के आईपीएस अधिकारी पीपी पांडेय ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एचएस खुटवाड़ की सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया.

खुद को मंगल पांडेय का रिश्तेदार बताने वाले पीपी पांडेय को अदालत से न्यायिक हिरासत में ले लिया गया और बाद में उन्हें साबरमती सेंट्रल जेल भेजा गया.

पांडेय को सीबीआई की विशेष अदालत ने भगोड़ाघोषित किया था और गुजरात के पुलिस महानिदेशक अमिताभ पाठक ने उनके बारे में सीआईडी (अपराध शाखा) से एक रिपोर्ट मांगी थी.

इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पांडेय की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दी थी.

पांडेय ने मंगलवार को अदालत में आवेदन फाइल किया कि सीबीआई के पास उनके ख़िलाफ़ मामला चलाने की राज्य सरकार की अनुमति, जो सीआरपीसी धारा 197 में अनिवार्य है, नहीं है. अदालत बुधवार को इस आवेदन पर फ़ैसला लेगी.

रिमांड की मांग

सीबीआई ने अदालत से पांडेय के खिलाफ 14 दिन की रिमांड की मांग की है. सीबीआई की रिमांड की मांग पर सुनवाई बुधवार को होगी.

पांडेय पिछले तीन महीनों से गिरफ्तारी से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे. कई दिनों तक गायब रहने के बाद, उन्होंने ख़ुद को एक अस्पताल में भर्ती कराया और सीबीआई अदालत में स्ट्रेचर पर लाए गए.

Image caption न्याय हासिल करने के लिए इशरत जहां के परिवारों वालों का संघर्ष जारी

हालांकि अदालत में वे एक व्हीलचेयर पर आए और अदालत से गिरफ़्तारी से बचने के लिए उन्होंने सुरक्षा की मांग की. लेकिन जब पिछले हफ्ते उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया तब वह जल्दी से उठ खड़े हुए और अदालत से भाग निकले.

उन पर 15 जून, 2004 को अहमदाबाद शहर के बाहरी हिस्से में इशरत, जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लै, अमजद अली, अकबर अली राणा और जीशान जौहर को एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराने की में शामिल होने का आरोप है.

अदालत में पांडेय ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उन्हें इस मामले में आईपीएस अधिकारी सतीश वर्मा फँसा रहे हैं. याचिका में पांडेय ने कहा है कि वर्मा उनके करियर से जलते हैं और इस मामले में उन्हें फँसाकर बदला लेना चाहते हैं.

सीबीआई ने इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ की चार्जशीट में पांडेय और 6 अन्य पुलिस अधिकारियों को अभियुक्त बनाया है.

सीबीआई ने अपनी पहली चार्जशीट में मुठभेड़ को फर्जी मानते हुए पीपी पांडेय को प्रमुख षड्यंत्रकारी नाम दिया है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इशरत और अन्य लोगों के लश्कर ए तैयबा के साथ संबंध थे और वे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के मिशन पर थे .

रैंबो पुलिस अधिकारी

1982 बैच के अधिकारी पांडेय लखनऊ के निवासी हैं. पांडेय इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए हैं.

साल 2003 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच का मुखिया बनने से पहले पांडेय का करियर विवादों से लगभग दूर ही रहा था. उनकी अगुवाई में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 11 कथित चरमपंथियों को मुठभेड़ों में मार दिया. ऐसे आरोप भी लगे कि इन मुठभेड़ों में कई फर्ज़ी मुठभेड़ थे.

इससे पहले पांडेय के दफ्तर से 2002 के दंगों की जाँच से जुड़ी एक सीडी कथित तौर पर गायब हो गई थी. पुलिस उप महानिरीक्षक राहुल शर्मा ने एक विशेष अदालत को बताया कि उन्होंने कुछ वरिष्ठ नेताओं, नौकरशाहों और पुलिस अफ़सरों के कॉल रिकॉर्ड जमा कर एक सीडी पांडेय को सुपुर्द की थी.

इस कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई की तरफ से पैरवी कर रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह पांडेय को 'रैम्बो' कहती हैं.

सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि पांडेय इस मामले की मुख्य कड़ी है. सीबीआई के सवालों की एक सूची है जिस पर वे पांडेय का जवाब चाहती है. सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि पांडेय के पास वरिष्ठ आईबी अधिकारी राजिंदर कुमार और राज्य के नेताओं सहित ख़ुफिया अधिकारियों की भूमिका ऑनलॉक करने कि चाबी है.

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