सिंधुरक्षक: अभी भी नौसैनिकों का पता नहीं

  • 15 अगस्त 2013
भारतीय नौसेना की पनडुब्बी सिंधुरक्षक

आग और धमाकों का शिकार हुई पनडुब्बी सिंधुरक्षक को निकालने और नौसैनिकों खोजने का काम जारी है.

भारतीय रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी वक्तव्य के मुताबिक फंसे नौसैनिकों को अभी तक देखा या ढूँढा नहीं जा सका है. मंत्रालय ने कहा, "पनडुब्बी के भीतर पानी भरा हुआ है जिसके कारण गोताखोर भीतर देख नहीं पा रहे हैं. साथ ही अंदर बेहद सीमित जगह है और घटना के कारण उपकरण अपनी जगह से हिल गए हैं."

मंत्रालय ने कहा कि धमाके से उपजी गर्मी के कारण पनडुब्बी का कुछ हिस्सा टूट-फूट गया है. प्रवक्ता के मुताबिक बचाव अभियान जारी है.

सिंधुरक्षक बुधवार तड़के मुंबई गोदी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी.

सिंधुरक्षक में 18 नौसेनाकर्मी सवार थे लेकिन अभी तक किसी से भी संपर्क नहीं हो पाया है. भारतीय नौसेना प्रमुख ने "सबसे बुरे " के लिए तैयार रहने को कहा है.

गोताखोर अभी तक डूबी हुई पनडुब्बी का एक हिस्सा ही खोल पाए हैं.

इस घटना की जाँच जारी है.

प्रधानमंत्री का दुख

Image caption स्वतंत्रता दिवस पर देश के नाम संबोधन में मनमोहन सिंह ने जताया घटना पर दुख.

भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस घटना पर दुख प्रकट करते हुए कहा, " हमें इस बात से बहुत तकलीफ है कि बुधवार को एक दुर्घटना में हमने अपनी पनडुब्बी सिंधुरक्षक को खो दिया."

नौसेना के अधिकारी पनडुब्बी के चालक दल के बचने को लेकर आशावादी नहीं हैं.

नौसेना प्रमुख डीके जोशी ने कहा, " ऐसा हो सकता है कि सिंधुरक्षक में सवार लोगों ने "एयर पॉकेट" ढूंढ ली हों लेकिन इसकी संभावनाएं कम लग रही हैं.

मंगलवार को आधी रात के बाद आईएनएस पर दो बड़े धमाके हुए. अग्निशमन दस्ते को आग बुझाने में चार घंटे लग गए.

भारतीय टीवी चैनलों पर आसमान में उठती आग की बड़ी लपटें दिखाई गईं. शहर के कई हिस्सों से इस आग से उठता धुआँ देखा गया. कई नौसैनिक धमाके के बाद जान बचाने के लिए समुद्र में कूद गए. इनमें से कुछ को अस्पताल ले जाया गया.

सिंधुरक्षक को हाल ही में रूस के जहाज़ बनाने वाले कारखाने ज़्वेजदोच्का में मध्यम स्तर की मरम्मत की गई थी और उसे अधिक उन्नत बनाया गया था.

'चौंका देने वाली दुर्घटना'

ज़्वेजदोच्का के प्रवक्ता ने बुधवार को आरआईए को बताया कि जब जनवरी में पनडुब्बी भारत को लौटाई गई थी तब वह पूरी तरह से काम कर रही थी.

बुधवार को भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने घटना स्थल का दौर कर इस घटना को, " चौंका देने वाली दुर्घटना" बताया.

Image caption अग्निशमन दस्ते को आग बुझाने में चार घंटे लग गए.

भारत ने 1986 से 2000 के बीच किलो क्लास की ऐसी दस पनडुब्बियां रूस से हासिल की थी.

आईएनएस सिंधुरक्षक के बैट्री कम्पार्टमेंट में फरवरी 2010 में आग लगी थी जिसमें एक नौसैनिक मारा गया था. तब यह पनडुब्बी विशाखापट्टनम में नौसेना गोदी में तैनात थी.

भारत और रूस लंबे समय से साझेदार रहे हैं.रूस भारत की सेना को 70 प्रतिशत हथियारों की आपूर्ती करता है.

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