ज़्यादातर हिस्सों में अच्छी बारिश, पूर्वोत्तर में कमी

  • 16 अगस्त 2013
भारत में कृषि
Image caption भारतीय कृषि का 55 फीसदी हिस्सा मॉनसून के ऊपर निर्भर है.

भारत में मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूर्वोत्तर को छोड़कर देश के सभी हिस्सों में अच्छी बारिश हो रही है.

मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. टीएन झा का कहना है, "पूरे भारत का मौसम अच्छा रहेगा. पूर्वोत्तर को छोड़कर बाकी जगहों पर अच्छी बारिश के अनुमान है. अभी तक सामान्य से 13 प्रतिशत ज़्यादा बारिश हुई है."

हालांकि असम, बिहार और झारखंड राज्यों में औसत से कम बारिश हुई है. यह वहां के किसानों के लिए चिंता का विषय है.

औसत से अधिक बारिश

Image caption कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है

मौसम विभाग के अनुसार, जून के पहले सप्ताह से अगस्त के पहले सप्ताह तक देश के 44 फीसदी क्षेत्रों में औसत से अधिक बारिश हुई है. और 42 फीसदी क्षेत्रों में समान्य बारिश हुई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, उत्तर भारत में बारिश के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है. उत्तर प्रदेश में अधिकांश नदियां उफान पर हैं. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के अधिकांश भागों में बारिश हुई है.

सेंट्रल वाटर कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा नदी फतेहपुर, फाफामऊ, गाजीपुर और वाराणसी ज़िलों में ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही है. पंजाब के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हुई.

हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में हल्की और मध्यम स्तर की बारिश दर्ज़ की गई. चंडीगढ़ में बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई है.

भारी बारिश से नुकसान

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस सप्ताह औसत से चार प्रतिशत कम बारिश हुई जिससे सोयाबीन और कपास की फसलों को नुकसान होने की आशंका कम हो गई है.

वैसे पिछले सप्ताह की तुलना में एक प्रतिशत कम बारिश हुई है. इस साल शुरुआती मॉनसून की भारी बारिश से फसलों को फायदा होने की उम्मीद थी, लेकिन बाद में इससे फसलों के नुकसान का ख़तरा बढ़ गया है.

भारत कृषि उत्पादों के सबसे बड़े उत्पादकों और उपभोग करने वाले देशों में से है. भारत धान, गन्ना और कपास जैसी नकदी फसलों के लिए मॉनसूनी बारिश के ऊपर निर्भर है.

ऐसे इलाकों में मॉनसूनी बारिश बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है जहां सिंचाई के अन्य साधन मौजूद नहीं है.

विश्व के दूसरी सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश में अच्छी बारिश का मतलब ग्रामीण क्षेत्रों की आय में बढ़ोत्तरी है. इसके कारण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और कार, सोने जैसी वस्तुओं की मांग में बढ़ोत्तरी होती है.

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