चार वर्षों में शेयर बाज़ार की सबसे बड़ी गिरावट

  • 16 अगस्त 2013
सेंसेक्स
Image caption सेंसेक्स में ज़बरदस्त गिरावट दर्ज की गई है

भारत में रुपए की क़ीमत में रिकॉर्ड गिरावट का असर शुक्रवार को शेयर बाज़ार पर भी देखा गया जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक में 769.41 अंकों की ज़बरदस्त गिरावट देखी गई. ये 18598 पर बंद हुआ.

पिछले चार सालों में ये सबसे बड़ी गिरावट है. लुढ़कते रुपए के अलावा अमरीका में सरकारी आर्थिक मदद वापस लेने की अटकलों का भी बाज़ार पर असर पड़ा.

बैंकों, धातु सेक्टर और रियलिटी क्षेत्र के शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट आई.

30 शेयरों वाले सेंसेक्स में हीरो मोटोकोर्प को छोड़कर बाकी सभी को नुकसान हुआ, खा़सकर रिलायंस इंडसट्रीज़, ओएनजीसी, जिंदल स्टील और मारुति को.

कारोबार शुरु होने पर सूचकांक 19,297.11 अंकों पर था और एक समय ये 18,559.65 तक गिर गया. निफ़्टी भी 234.45 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ.

इससे पहले दिन में शुक्रवार को बाजार खुलने के साथ हीरुपये में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई . सुबह 10.30 बजे कारोबार में एक डॉलर की कीमत 62.03 रुपये पहुँच गई थी. हालांकि इसके बाद कारोबार में कुछ नरमी दिखाई दी.

पिछले सप्ताह एक डॉलर 61.80 रुपए तक बिका था.पिछले कई महीनों से डॉलर की कीमत रुपए के मुकाबले काफी कमजोर हुई है.

रेटिंग में गिरावट

अभी कुछ दिन पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग संस्था फिच ने भारत की क्रेडिट रेटिंग आउटलुक में कटौती करते हुए इसे ‘स्थिर’ से ‘नकारात्मक’ कर दिया था.

इससे पहले स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने भी नीतिगत फैसलों में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारत के लिए अपनी क्रेडिट रेटिंग में कटौती की थी.

टूट रहा है मनमोहन का मोहक सपना?

फिच का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष में 6.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी जो पिछले अनुमान 7.5 फीसदी से कम है.

भारतीय औद्योगिक जगत की कई हस्तियाँ देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जता चुकी हैं. एनआर नारायण मूर्ति और अजीम प्रेमजी ने आर्थिक बदहाली के लिए कुछ दिन पहले यूपीए सरकार की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि इससे देश की छवि को धक्का पहुंचा है.

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