लोग मदद के लिए पुकार रहे थे, लेकिन....

बिहार ट्रेन हादसा

बिहार के खगड़िया जिले के धमारा घाट रेलवे स्टेशन पर अब भी लोगों के कपड़े और अन्य सामान बिखरे पड़े हैं.

उनका बिखरा सामान देखकर अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि जब लोग राज्य रानी एक्सप्रेस के चपेट में आए होंगे, तो उनकी क्या हालत हुई होगी.

बीबीसी से बातचीत में अधिकारियों ने घटना में अभी तक 28 लोगों के मारे जाने की बात कही है.

हादसा उस समय हुआ जब तीर्थयात्री रेलवे लाइन को पार कर रहे थे. इसमे नौ लोग घायल भी हुए हैं.

एक प्रत्यक्षदर्शी टुनटुन राम ने बीबीसी को बताया, "जब मैं स्टेशन पर पहुंचा तो चारों तरफ लोगों के शव बिखरे हुए थे. लोग मदद के लिए पुकार रहे थे. लेकिन घटना स्थल पर स्वास्थ्य सुविधा नाम की कोई चीज़ नहीं थी. केवल पांच घंटे बाद ही लोगों को मदद मुहैया करवाई जा सकी."

आसपास खड़े लोगों के मुताबिक दुर्घटना उस वक्त हुई जब धमारा घाट रेलवे स्टेशन के पास स्थित मंदिर जाने के लिए तीर्थयात्री लोकल पैसेंजर से नज़दीक ही उतरे.

उनके ट्रेन से उतरने के बाद स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा हो गई. दरअसल ये भीड़ रेल की पटरी पार करके दूसरी ओर स्थित शिव मंदिर जा रही थी.

तभी पीछे से तेज़ रफ़्तार में आती राज्य रानी एक्सप्रेस ने तीर्थयात्रियों को अपने चपेट में ले लिया.

गुस्सा

Image caption जब प्रत्यक्षदर्शी टुनटुन राम स्टेशन पहुंचें तो चारों तरफ लोगों के शरीर बिखरे हुए थे.

स्टेशन पर अभी भी बड़ी संख्या में बर्तन, कपड़ें, पूजा की सामग्री और लोगों के जूते-चप्पल देखे जा सकते हैं.

आसपास के गांव वालों में हादसे को लेकर काफी गुस्सा है. उनका कहना है कि सावन के हर सोमवार को यहां हज़ारों की तादात में तीर्थयात्री आते हैं लेकिन रेलवे प्रशासन ने इतने महत्वपूर्ण स्टेशन पर किसी संभावित दुर्घटना को टालने के लिए आने वाली ट्रेनों की रफ़्तार कम करने के कोई उपाय क्यों नहीं किए?

मंगलवार को धमारा स्टेशन पर खड़ी जली हुई राज्य रानी एक्सप्रेस को हमारे सामने ही पटना ले जाया गया.

ट्रेन की बोगियां इतनी बुरी तरीके से जल गई थीं कि उनको ले जाने के लिए दूसरी लाइन से ट्रेन के दो नए इंजन भेजे गए.

प्रशासन का कहना है कि एक तरफ से रेल मार्ग खोल दिया गया है. राज्य सरकार ने पीड़ितों को मुआवाज़ा दिए जाने की घोषणा की है.

बीबीसी टीम ने धमारा स्टेशन पर खड़ी जली ट्रेन के साक्ष्य देखे. हादसे के बाद उग्र भीड़ ने ट्रेन को आग के हवाले कर दिया था.

रेलवे अधिकारियों ने पिछले साल स्वीकार किया था कि पिछले पांच सालों में ट्रेन हादसों में एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.

भारत में विश्व का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. ऐसे में लोगों की सुरक्षा का सवाल काफी अहम हो जाता है.

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