बाल्को दुर्घटनाः जल्द ही स्वदेश लौट जाएँगे चीनी अधिकारी?

  • 20 अगस्त 2013
वेदांता
चिमनी गिरने से चालीस से ज्यादा मजदूर मारे गए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता-स्टरलाइट के बाल्को चिमनी हादसे में 40 मजदूरों की मौत के मामले में आरोप का सामना कर रहे चीनी अधिकारियों को अपने देश जाने की इजाज़त दे दी है.

कोरबा की निचली अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तीनों चीनी अधिकारियों को एक-एक करोड़ रुपए की ज़मानत राशि जमा करने को कहा है. अभियुक्त अधिकारी चीन की शैनदोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन में काम करते हैं.

शैनदोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन के वकील अनुग्रह मिश्रा ने बताया कि स्थानीय अदालत की कार्रवाई इस सप्ताह पूरी हो जाएगी. इसके बाद तीनों चीनी अधिकारी अपने देश लौट सकेंगे.

बाल्को चिमनी हादसा 23 सितंबर 2009 को हुआ था. तब बाल्को पावर प्लांट की एक 248 मीटर ऊंची निर्माणाधीन चिमनी गिर गई थी. चिमनी गिरने से वहां काम करने वाले 40 मज़दूर मारे गए थे.

इसी साल एडीजे कोर्ट ने शैनदोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन में कार्यरत प्रोजेक्ट मैनेजर वू छूनान, इंजीनियर ल्यू जॉक्शन व वांग क्यूंग समेत 13 लोगों के खिलाफ आरोप तय किया था. और इन्हें ग़ैर इरादतन हत्या का अभियुक्त बनाया था.

चीन वापसी संभव

23 सितंबर 2009 को बाल्को पावर प्लांट की चिमनी ध्वस्त हो गई थी.

पिछले साल दो भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इटली के दो नौसैनिकों को गिरफ़्तार किया गया था. ज़मानत की शर्तों को तोड़कर वे इटली वापस चले गए थे. उनके इटली से भारत नहीं लौटने की ख़बर के बाद काफ़ी विवाद हुआ था.

ऐसे में 40 मजदूरों की मौत के अभियुक्त तीनों चीनी नागरिकों की चीन वापसी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

इससे पहले राज्य सरकार द्वारा बनाए गए संदीप बख्शी आयोग ने वेदांता-स्टरलाइट कंपनी बाल्को के अधिकारी, चिमनी का निर्माण करने वाली ठेका कंपनी शैनदोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन के परियोजना प्रबंधक, उप ठेका कंपनी जीडीसीएल के परियोजना प्रबंधक व इंजीनियर और वल्लभगढ़ के वैज्ञानिक व इंजीनियर को 40 मजदूरों की मौत के लिए ज़िम्मेदार बताया था.

इस मामले के अभियुक्त तीनों चीनी नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि वे अपनी कंपनी के ज़िम्मेवार पदों पर हैं. उन्हें काम के सिलसिले में दूसरे देशों में भी जाना होता है. ऐसे में उन्हें देश छोड़ने की इजाज़त दी जाए.

ज़मानत पर विवाद

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बाल्को प्रबंधन के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था.

जस्टिस एसएस निज्जर व एफएम इब्राहिम कलिफ़ुल्ला की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुये तीनों चीनी नागरिकों को एक-एक करोड़ रुपए की ज़मानत पर देश छोड़ने की इजाज़त दे दी. इस पीठ ने निचली अदालत को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए.

अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट को जब भी इन तीनों चीनी नागरिकों की ज़रुरत होगी, एक माह पहले उसे इन तीनों को सूचना देनी होगी.

इससे पहले स्थानीय अदालत में चीनी नागरिकों की ज़मानत को लेकर भी विवाद हुआ था. इन पर आरोप लगा था कि स्थानीय अदालत में जिस व्यक्ति ने इनकी ज़मानत ली है, वह रोज़गार गारंटी योजना में काम करने वाला मज़दूर है.

इसी तरह हादसे के सबूतों से छेड़छाड़ करने वाले एक इंजीनियर की ज़मानत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले किसान ने ली थी. यह मामला फ़िलहाल अदालत में लंबित है.

ग़ौरतलब है कि बाल्को पहले सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी थी लेकिन साल 2002 में इसका विनिवेश कर दिया गया था. वेदांता ग्रुप की स्टरलाइट कंपनी ने इसे ख़रीद लिया था.

बाल्को ने इसके निर्माण की ज़िम्मेदारी चीनी कंपनी सेप्को को दी थी और सेप्को ने जीडीसीएल नाम की कंपनी को निर्माणकार्य का ठेका दिया हुआ है.

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