अमिताभ 'शर्मिंदा' हैं मुंबई बलात्कार को लेकर

Image caption अमिताभ बच्चन ने इस घटना को दर्दनाक बताया है

मुंबई में गुरुवार को एक फोटो पत्रकार के साथ हुई सामूहिक बलात्कारकी घटना को अभिनेता अमिताभ बच्चन ने घिनौना और दर्दनाक बताया.

उनका कहना था, ''मुंबई शहर हमेशा से ही एक सुरक्षित शहर माना जाता रहा है. यहां महिलाएं निडर रहकर रात के एक या दो बजे तक काम करती हैं. यंहा महिलाएं अपने आप को सुरक्षित महसूस करती रही है जो हम सब के लिए गर्व की बात है. लेकिन जो हुआ वो दर्दनाक है और हम सब इसके लिए शर्मिंदा हैं.''

गुरुवार रात मुंबई के परेल इलाके में एक फोटो पत्रकार के साथ कथित सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया था. इस मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है. पुलिस ने बाकी के चार संदिग्धों को पहचानने का दावा किया है.

इस बीच जसलोक अस्पताल की डॉक्टर तरंग ज्ञानचंदानी ने कहा है कि पीड़ित की हालत स्थिर है. पीड़ित लड़की मुंबई के जसलोक अस्पताल में भर्ती है.

अमिताभ बच्चन का कहना था, ''यहां महिलाएं सुरक्षित मानी जाती है लेकिन जिस तरह से 22 साल की फोटो पत्रकार के साथ ऐसे स्थान पर बलात्कार हुआ जो शहर के बीचों -बीच हैं ये सब सुनकर बहुत दर्द होता है कि हमारे देश को हो क्या रहा है.''

कड़ी सज़ा

बलात्कार की ये घटना केंद्रीय मुंबई के परेल इलाके में शक्ति मिल के नज़दीक शाम छह बजे के आसपास घटी और इसमें पाँच लोग शामिल थे जिन्होंने लड़की के मित्र को बांध दिया और फिर लड़की काबलात्कार किया.

Image caption दिल्ली में पिछले साल एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था

अमिताभ बच्चन ने दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ कर कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की.

उनका कहना था,'' क़ानून बन चुका है लेकिन फिर भी मैं अपनी छोटी सी हैसियत से कहना चाहूंगा कि उस क़ानून को जल्द से जल्द पालन हो ताकि लोगों को पता चल सके कि अगर ऐसा घिनौना कांड करेंगे तो उनके साथ न्याय बहुत तेज़ी और जोरों से पेश आएगा.''

अमिताभ का कहना था हम नहीं कह सकते कि क़ानून कैसे चलना चाहिए हम केवल विरोध कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमें मीडिया के माध्यम से पता चलता रहता है कि आस-पास क्या हो रहा है और ऐसे ही मीडिया को जनता को जागरुक करते रहना चाहिए.

जब उनसे पूछा गया की इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए सरकार किस तरह के कदम उठा सकती है तो उनका कहना था,'' दोषियों को जल्द पकड़ा जाना चाहिए और उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा देना और कहीं न कहीं हमें अपने समाज और सोच को भी बदलना होगा.''

उनका कहना है कि शिक्षा के स्तर पर लोगों को जागरुक करना होगा और जिनकी बात लोग सुनते हैं उनके जरिए ये कहलवाना होगा कि जो हो रहा है वो गलत है और उसको रोकें.

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