'लोकल ट्रेन में जब भी सफ़र करती हूँ सहमी सी रहती हूँ'

दिल्ली गैंग रेप के दौरान प्रदर्शन करते लोग.

दिल्ली भले ही देश की राजधानी हो लेकिन महिलाओं की सुरक्षा के मामले में मुंबई हमेशा आगे रही है. अन्य राज्यों के मुक़ाबले मुंबई में महिलाएँ रात के दो बजे भी घर से बाहर निकल सकती हैं. लेकिन कुछ सालों से मुंबई भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रह गई है.

आए दिन कोई न कोई घटना सामने आती रहती है. पिछले 15 दिन में ये तीसरी वारदात है. पिछली दो घटनाएँ मुंबई की लाइफ़ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में हुई थी. पहली घटना में मुंबई की एक लोकल ट्रेन में एक महिला के बलात्कार की कोशिश की गई और दूसरी घटना में एक विदेशी महिला को हमले का निशाना बनाया गया.

और अब इस तीसरी घटना ने मुंबई में रहने वाली महिलाओं को पूरी तरह से डरा दिया है.

आरती के अनुभव

Image caption भवन्स कॉलेज की छात्रा को मुंबई अब पहले जैसी नहीं लगती.

मुंबई के थाने इलाक़े में रहने वाली 24 साल की आरती, भवन्स कॉलेज की छात्रा हैं. वह कहती हैं, "मुंबई अब पहले जैसी नहीं रही. मुंबई में भी अब अपराध बढ़ गए हैं. मैं भवन्स कॉलेज में पढ़ती हूँ और मुझे अपनी पढ़ाई के काम से अक्सर देर रात सफ़र करना पड़ता है. जब तक घर न पहुँच जाउँ मम्मी-पापा बहुत परेशान रहते हैं."

आरती ने बताया, "मेरे पिता दिल के मरीज़ हैं. वे मुझे लेकर इस कदर चिंतित रहते हैं कि जब भी मैं घर से बाहर होती हूँ वे मेरा हाल जानने के लिए पाँच से छह बार फ़ोन कर लेते हैं. मैं जब उनको कहती हूँ कि आप चिंता मत करिए मुंबई दूसरे शहरों के मुक़ाबले कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं तो वो कहते हैं कि बेटा वो मुंबई कोई और थी, अब नहीं..."

उन्होंने बताया, "इस तरह की बढ़ती घटनाओं को देख अब तो मुझे लगने लगा है कि मुंबई में महिलाएँ सुरक्षित नहीं है. मेरे साथ ठाने स्टेशन पर एक घटना हुई थी जिसके बाद मैं चौकन्नी हो गई. उस रोज़ मैं कॉलेज का काम पूरा करके घर वापस जा रही थी कि रात 12 बजे जैसे ही मैं ठाने पहुँची, उस वक़्त स्टेशन सुनसान लग रहा था."

"हमेशा की तरह मैं निश्चिंत होकर घर जा रही थी तभी मैंने नोटिस किया कि एक आदमी बहुत देरे से मेरा पीछा कर रहा है. वह धीरे धीरे मेरे बगल में चलने लगा लगा और कुछ गंदी बातें बड़बड़ाने लगा था. मैंने अपनी चाल तेज़ कर दी. मैंने देखा कि दो नंबर प्लेटफॉर्म पर एक पुलिस वाला खड़ा है, मैंने उसके पास जाकर इस घटना की शिकायत की. जैसे मैंने सोचा वैसा कुछ नहीं हुआ. उस पुलिस वाले ने मुझे कहा कि उसकी ड्यूटी ट्रेन में है और उसे ट्रेन पकड़नी है."

"पुलिस वाले ने मुझसे कहा कि कृपया आप रेलवे स्टेशन से बाहर जाकर पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करें. उस दिन मुझे बहुत बुरा लगा, देश के क़ानून के ऊपर मेरा भरोसा टूट गया. एक वो दिन था और एक आज का दिन है. ट्रेन में जब भी सफ़र करती हूँ हमेशा डरी सहमी सी रहती हूँ."

जागरूकता बढ़ी है

Image caption फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ी आकांक्षा ज्यादातर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही इस्तेमाल करती हैं.

वहीं 25 साल की आकांक्षा शर्मा फ़िल्म प्रोडक्शन के क्षेत्र में काम करती हैं. वे कहती हैं कि उनके पेशे में रात दो बजे तक घर पहुँचना आम बात है.

वे मुबंई में ही पली बढ़ी हैं और उनका पूरा परिवार यहीं रहता है.

काम की वजह से अक्सर घर देर से लौटने वाली आकांक्षा पब्लिक ट्रांसपोर्ट के ज़रिए ही सफ़र करती हैं.

वह कहती हैं कि रात के वक़्त उन्हें सावधानी बरतनी पड़ती है.

आकांक्षा का मानना है कि ऐसा नहीं है कि कुछ सालों से ही मुंबई में ज़्यादा अपराध हो रहा है.

वह कहती हैं, "मुंबई में पहले भी बहुत अपराध होते थे लेकिन सामने नहीं आते थे. पहले जिन लड़कियों के साथ बलात्कार या बदसुलूकी की घटनाएँ हुईं वो बदनामी के चलते चुप रहती थी. लेकिन अब मीडिया की वजह से लोगों में जागरूकता बढ़ी है."

रेप कैपिटल

Image caption समीना रज़्ज़ाक़ जनसंपर्क के पेशे से जुड़ी हुई हैं.

मुंबई के मारुल इलाक़े में रहने वाली समीना रज़्ज़ाक़ जनसंपर्क के पेशे में हैं.

वह कहती हैं, "मुझे कई बार क्लाइंट से मीटिंग करनी पड़ती है. इसके कारण अक्सर देर हो जाती है. लेकिन कल रात उस महिला फ़ोटो पत्रकार के साथ जो कुछ भी हुआ, उस से मैं बहुत सदमे में हूँ."

"उस लड़की के साथ जो कुछ भी हुआ वो किसी के साथ भी हो सकता है. मेरे साथ भी... ऐसे में कौन ज़िम्मेदार होता..."

"मैं मानती हूँ कि पुलिस हर जगह पर नहीं पहुँच सकती लेकिन फिर भी महिलाओं की सुरक्षा पर पुलिस कुछ तो ध्यान दे. तभी तो बढ़ते अपराध को रोका जा सकेगा."

"पहले तो रेप हम दिल्ली में होने वाले रेप की घटनाओं के बारे में सुना करते थे लेकिन अब मुंबई में भी ये सब कुछ होने लगा है. मैं घबरा गई हूँ. दिल्ली को इंडिया का रेप कैपिटल कहा जाता है लेकिन अब यह ट्रेंड दिल्ली से मुंबई की तरफ़ बढ़ रहा है."

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