गिरती अर्थव्यवस्था में सरकार झोंकेगी 1.82 खरब रुपए

भारतीय रुपया

भारत की सरकार ने गिरते हुए रूपए को थामने और अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिए आधारभूत संरचना के क्षेत्र में 1.83 लाख करोड़ की अनेक परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है.

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि तेल, गैस, सड़क और रेलवे के क्षेत्र में अटकी 36 परियोजनाओं को हरी झंडी मिल गई है.

उन्होंने कहा, "हम संदेश देना चाहते हैं कि निवेश का चक्र फिर से शुरू हो रहा है और हम इसको आगे बढ़ा रहे हैं."

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब मंगलवार को रूपए की क़ीमत एक डॉलर के मुकाबले 65.60 रुपए तक पहुंच गई.

बाज़ार में गिरावट के रुख़ को कम करने में अब तक सरकार के प्रयास बेहतर परिणाम देने में विफल रहे हैं.

धैर्य और मजबूती की जरूरत

वित्त मंत्री ने कहा कि रुपया अपने वास्तविक स्तर से काफी कमज़ोर हुआ है, लेकिन भारत इकलौता देश नहीं है, जो इस तरह की समस्या का सामना कर रहा है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, वित्त मंत्री ने कहा, "विश्व की सभी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं चुनौतियों का सामना कर रही हैं. उसी तरीके से भारतीय अर्थव्यवस्था भी चुनौती के दौर से गुज़र रही है, जिसका प्रभाव शेयर बाज़ार के साथ-साथ मुद्रा बाज़ार पर भी पड़ रहा है."

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि हमें धैर्य और मजबूती बनाए रखने की जरूरत है, हम जरूरी कदम उठा रहे हैं और मुद्रा की क़ीमतें अपने वास्तविक स्तर पर पहुंच जाएंगी."

खाद्य सुरक्षा

Image caption पी चिदंबरम ने अर्थव्यस्था के मजबूत होने और रुपए में सुधार के प्रयासों से उम्मीद जताई

पी चिदंबरम ने खाद्य सुरक्षा विधेयक से देश की वित्तीय स्थिति पर प्रभाव से जुड़ी आशंकाओं को भी दूर करने का प्रयास किया.

सोमवार की रात यह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है. अब इसे राज्यसभा में लाया जाएगा.

इससे भारत की दो तिहाई आबादी को सस्ते दामों पर अनाज उपलब्ध कराया जाएगा ताकि भूखमरी और कुपोषण की स्थिति से निपटा जा सके.

लेकिन इस महत्वाकांक्षी क़ानून को लागू करने में हर साल 1.3 खरब रुपए की लागत आएगी.

घाटा बढ़ने का डर

आलोचकों का कहना है कि इस योजना से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा.

हालांकि वित्त मंत्री का कहना है कि इससे सरकार के वित्तीय घाटे में बहुत ज़्यादा बढ़ोत्तरी नहीं होगी.

उन्होंने कहा, "खाद्य सुरक्षा विधेयकके लिए आवंटन करते समय बजट की सीमाओं का ध्यान रखा जाएगा."

भारत पहले ही वृद्धि में गिरावट और वित्तीय घाटे की समस्या से जूझ रहा है.

भारत की अर्थव्यवस्था, एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी विकास दर 2012-13 के वित्तीय वर्ष में 5 फीसदी के आसपास रही है, जो पिछले दस सालों में सबसे कम विकास दर है.

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