करियर कॉर्नर: जब लक्ष्य हो यूपीएससी तो...

बारहवीं में विज्ञान की पढ़ाई करने के बाद इंजीनियरिंग के लिए आईआईटी में दाखिला मिल जाए तो कई लोग इसे सपनों का सच होना मानेंगे, लेकिन बिहार के एक छोटे से शहर में रहने वाले अजित के लिए ये एक लंबे और सुनहरे सफ़र की सिर्फ़ शुरुआत थी.

बीबीसी की खास पेशकश करियर कॉर्नर की पहली कड़ी में मिलिए अजित से.

अपने सपनों का पीछा करते हुए अजित कानपुर के आईटीआईटी से दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय तक पहुंचे और आईपीएस में चुने जाने के बाद इस साल उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के लिए चुना गया.

अजित के करियर की कहानी उनकी अपनी ज़बानी.

अजित की कहानी

''मुझे याद है जब मैं तीसरी या चौथी कक्षा में था एक दिन मेरी मां ने मुझसे कहा कि तुम बीबीसी रेडियो सुना करो और इस तरह मैंने देश दुनिया के बारे में जानना शुरू किया.

90 के दशक में दुनियाभर में जो भी हुआ उसके बारे में जानकर विश्व के इतिहास और भूगोल की एक तस्वीर मेरे मन में तभी से बननी शुरु हो गई थी. इसके बाद मैंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई आईआईटी कानपुर से की.

हमारे यहां की शिक्षा व्यवस्था ऐसी है कि अगर आपने इंजीनियरिंग की है तो आपको अपना भविष्य, अपना करियर उसी में बनाना चाहिए. लेकिन मुझे इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद एहसास हुआ कि मेरी उसमें कोई रुचि नहीं है. उस समय मैंने सोचना शुरू किया कि मुझे जीवन में क्या करना है.

यूपीएससी से जुड़े कुछ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरी पढ़ने में बहुत रुचि थी. दुनिया के बारे में जानना मुझे अच्छा लगता था, इस तरह मैंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की. यूपीएससी परीक्षाओं का पैटर्न बदलता रहा है.

2013 में हुए बदलावों के बाद से अब आपको एक मेन विषय चुनना है. लेकिन विषय के चुनाव को लेकर मेरी सलाह यही है कि जिस विषय को पढ़ना आपको सबसे ज़्यादा पसंद हो वही चुनें ताकि आप उसे अत्यधिक गहराई तक पढ़ सकें.

सिविल सेवा का सिलेबस सही मायने में एक समुद्र की तरह है. आपसे उम्मीद की जाती है कि आपको लगभग हर चीज़ की जानकारी हो इसलिए ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ना और नई चीज़ों के बारे में पढ़ते रहना ही एक मात्र विकल्प है.

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सामान्य अध्ययन के चार पेपर होते हैं और उसमें भारत का इतिहास विश्व का इतिहास, भूगोल यानी भारत का भूगोल और विश्व का भूगोल, भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्वीकरण के अलावा पर्यावरण और पिछले करीब 30 साल में पर्यावरण के संरक्षण को लेकर दुनिया भर में क्या कुछ हुआ है इसकी जानकारी आपको होनी चाहिए.

इस साल से सामान्य अध्ययन में एक नया विषय जुड़ा है, मोरैलिटी एंड एथिक्स यानी शासन और प्रशासन में नैतिकता को लेकर आप क्या सोचते हैं.

ज़ोर इस बात पर है कि इस विषय पर आपके पास क्या नए विचार हैं.

एनसीईआरटी की किताबें पढ़ना सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए सबसे अच्छी शुरुआत है. पढ़ने के कई स्रोत हो सकते हैं.

मैं कम से कम दो या तीन अखबार पढ़ता था क्योंकि हर अखबार की अपनी एक विचारधारा होती है और सिविल सेवा के लिए ज़रूरी है कि ज्ञान बहुआयामी हो. इसके अलावा पत्रिकाएं और विदेशी ख़बरों की जानकारी के लिए बीबीसी जैसे माध्यम हो सकते हैं.

सिविल सेवा की पूरी तैयारी के दौरान मेरे हिसाब से सबसे मुश्किल दौर होता है जब आप पहली बार में सफल नहीं होते और बार बार परीक्षाएं देना शुरू करते हैं.

भारत में ज्यादातर लोगों की स्थिति ऐसी है कि वो बैठकर सिर्फ पढ़ाई नहीं कर सकते. खासकर 22-23 साल की उम्र में जब ज़िम्मेदारियां बढ़ती हैं.

मैंने सिविल सेवा की तैयारी के दौरान लगातार काम किया. मैंने शुरुआत की ट्यूशंस से और अपना रोज़मर्रा का खर्च उससे निकाला. इसके बाद मैंने कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर भी पढ़ाया.

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मेरा अनुभव तो यही कहता है कि नौकरी के साथ तैयारी नहीं हो सकती ये एक मिथ है. सबसे बेहतर तरीका है कोई ऐसी नौकरी ढूंढना जिसमें समय बहुत ज़्यादा न लगे.

मुख्य परीक्षाओं में सफल होकर आप ये साबित कर चुके होते हैं कि आपके पास प्रशासनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त जानकारी है. इसके बाद मौका आता है इंटरव्यू का, जिसका मकसद आपकी जानकारी नहीं बल्कि आपके व्यकितत्व को परखना है.

मुझे याद है मेरे इंटरव्यू में मुझे आयरलैंड का 300 साल का इतिहास बताने को कहा गया. किसी भी देश के 300 साल के इतिहास को दो मिनट में समेटना मुश्किल है.

असल में इस सवाल का मकसद ये जांचना था कि मैं किसी भी तरह के सवाल को कैसे संभालता हूं. जानकारी को समटने के हुनर के साथ मैंने जवाब देना शुरू किया और सब ठीक रहा.

इसके बाद मैं आईपीएस के तौर पर चुना गया और मैंने अपना काम शुरू किया. हम में से ज़्यादातर लोग बेहद आदर्शों के साथ सिविल सेवा की तैयारी करते हैं लेकिन इस पेशे में कई चुनौतियां और कड़वे अनुभव भी हैं.

आठ मार्च 2012 को मध्य प्रदेश के मुरैना में अपनी पोस्टिंग के दौरान मैंने देखा कि अपना फ़र्ज़ निभाते हुए जिन आईपीएस नरेंद्र शर्मा की मौत हुई उसके बाद उनके परिवार को किस तरह अकेला छोड़ दिया गया.

ईमानदार अफ़सर जो परेशानियां झेलते हैं वो हमारी व्यवस्था का एक कड़वा सच है लेकिन तीन साल के अपने अनुभव के दौरान सबसे अहम चीज़ जो मैंने सीखी है वो ये कि व्यवस्था में जो बदलाव आप लाना चाहते हैं वो सीमित समय के लिए और एक सीमित दायरे में ही मुमकिन है. इस बात का एहसास ही आपके मनोबल को कायम रखेगा.''

करियर काउंसलर की सलाह

हर व्यक्ति के जीवन में उम्र के कुछ पड़ाव होते हैं जो करियर संबंधी फैसलों के लिहाज़ से सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. करियर कॉर्नर में हम आपको उम्र के इन्हीं पड़ावों में की जाने वाली तैयारियों और फैसलों के बारे में बताएँगे. आज की कड़ी में करियर एक्सपर्ट डॉक्टर अनिल सेठी के ज़रिए जानें संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के बारे में.

करियर चुनने या करियर के बारे में फैसला लेने के लिहाज़ से 13-15 साल की उम्र बेहद कम है लेकिन अगर आप नई से नई जानकारी पाने के इच्छुक रहते हैं तो आईएएस जैसे करियर आपकी पसंद हो सकते हैं.

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वाद-विवाद प्रतियोगिताओँ में हिस्सा लेना और देश दुनिया के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी हासिल करना भारतीय प्रशासनिक सेवा जैसे करियर की बुनियादी तैयारी हो सकती है.

अखबार और किताबें पढ़ने की आदत डालने के लिए ये उम्र सबसे बेहतर है और इन छोटी-छोटी चीज़ों के ज़रिए आप इस बड़े लक्ष्य को पाने की तैयारी शुरू कर सकते हैं.

भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा किसी भी विषय में स्नातक-स्नातकोत्तर उम्मीवार दे सकता है लेकिन परीक्षा के लिए विषय का चुनाव संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सूची में उपलब्ध विषयों में से ही करना होगा. ग्रैजुएशन के अपने विषय चुनते समय अगर आप आईएएस परीक्षा के लिए सुझाए गए विषयों पर नज़र डाल लें तो ये मददगार साबित होगा.

यूपीएससी से जुड़े कुछ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यूपीएससी परीक्षाएं हर साल होती हैं और इनमें सफल होने वाले उम्मीदवार आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा), आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा), आईएफ़एस (भारतीय विदेश सेवा) और आईआरएस (भारतीय राजस्व सेवा) के अलावा कई छोटी-बड़ी सरकारी नौकरियों के लिए चुने जा सकते हैं.

यूपीएससी परीक्षा के तीन चरण हैं. पहला चरण है आईसीएसएटी यानी सिविल सर्विस एप्टिट्यूड टेस्ट का. दूसरे चरण में आती है नवंबर-दिसंबर में होने वाली मुख्य परीक्षा और तीसरा चरण है फरवरी-मार्च में होने वाले साक्षात्कार जो उन उम्मीदवारों के लिए हैं जो मुख्य परीक्षा में सफल रहे हों.

करियर के लिहाज़ से तीस का पड़ाव आमतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस उम्र तक आप चुने गए करियर की चुनौतियों-सफलताओं को समझ चुके होते हैं.

आईएएस में चुने जाने के बाद आपके सफ़र की शुरुआत होती है एसडीएम के पद से और करियर की सफलता आपको कैबिनेट सचिव के पद तक ले जा सकती है.

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आईपीएस के लिए करियर की पहली सीढ़ी है सहायक पुलिस अधीक्षक का पद और इसमें सफलता आपको पुलिस महानिदेशक के पद तक ले जाएगी.

आईआरएस के अंतर्गत आप कस्टम और आबकारी विभाग और इनकम टैक्स विभाग में नौकरी पा सकते हैं.

आईआरएस में सहायक आयुक्त (कस्टम एवं आबकारी विभाग) से शुरू होकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस के निदेशक के पद तक पहुंच सकते हैं.

निर्णय और विश्लेषण क्षमता के साथ ये करियर आप से दबाव और तनाव में काम करने की क्षमता भी चाहता है. आईएएस, आईपीएस, आईएफ़एस, आईआरएस के शीर्ष पद से सेवानिवृत्त होने के बाद किसी निजी कंपनी में काम करने के लिए सरकारी अनुमति ज़रूरी है.

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