क्या रुपए के चक्कर में खाली हो जाएगा खज़ाना?

भारतीय रुपए में गिरावट का दौर जारी है
Image caption भारतीय रुपए में गिरावट का दौर जारी है

रुपए में तेज़ी से गिरावट का सिलसिला जारी है जिससे देश के आर्थिक जगत में चिंता बढती जा रही है. बुधवार को ये एक समय 68 रुपए प्रति डॉलर से भी नीचे चला गया.

इस साल रुपए की कीमत में अब तक 19 प्रतिशत की गिरावट आई है. विशेषज्ञ कहते हैं कि आने वाले दिनों में रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले 75 तक पहुँच सकती है. कुछ कहते हैं कि गिरावट इससे अधिक भी हो सकती है.

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लेकिन मुंबई में करेंसी के विशेषज्ञ मोहन पारेख कहते हैं, "रुपए की कीमत कितनी घटेगी, इसका सही अंदाज़ा किसी को नहीं है. रुपए के भाव में गिरावट जितनी तेज़ी से हो रही है उसकी रोक थाम के लिए सरकार की सारी कोशिशें नाकाम हो चुकी है. ऐसे में ये बताना मुश्किल है कि एक महीने के बाद रुपए का मूल्य क्या होगा."

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क्या है उद्योग जगत की चिंता?

लेकिन सभी विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि इस गिरावट का असर काफी बुरा होगा. भारतीय उद्योग के संगठन फिक्की के पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष सुशील जिवराजका कहते हैं कि सरकार को चिंता तो है ही, भारतीय उद्योग जगत को भी काफी चिंता है.

तो रुपए की लगातार गिरावट से सबसे बुरी स्थिति क्या हो सकती है?

इस सवाल पर सुशील जिवराजका कहते हैं, "सीरिया पर अमरीकी हमले की संभावना से तेल और गैस की कीमतें काफी बढ़ चुकी है जिसका सीधे तौर पर भारत पर असर हुआ है. जिस तरह पेट्रोल की कीमत बढ़ रही है भारत के पेट्रोल आयात का खर्च 75 हज़ार करोड़ अधिक बढ़ जाएगा. इससे हर चीज की कीमत बढ़ेगी और जाहिर है आम आदमी को इससे काफी कठिनाई होगी."

केंद्र सरकार के खजाने में जो विदेशी मुद्रा इस समय है, इससे केवल अगले छह महीने तक के आयात का खर्च उठाया जा सकता है.

सुशील जिवराजका एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी के मालिक भी हैं. वह कहते हैं, "ये चिंता की बात है लेकिन 1991 वाली स्थिति पैदा नहीं होगी, जब सरकारी खज़ाना लग भाग खाली हो गया था."

आम आदमी पर कितना असर?

दिल्ली के फैसल ख़ान निर्यात का काम करते हैं, लेकिन निर्यात के लिए उन्हें मलेशिया से रासायनिक पदार्थ आयात करना पड़ता है. उनका कहना है कि आयात करने वालों को बहुत घाटा हो रहा है और रुपए की कीमत जितनी गिरेगी, उनकी हालत उतनी बिगडती जाएगी.

Image caption रुपए के कमजोर होने से तेल के दाम भी बढ़ सकते हैं

वह कहते हैं, "मान लीजिए कि अगर मैं 100 डॉलर का सामान निर्यात करता हूँ और उसके लिए मैं रासायनिक पदार्थ आयात करने में 90 डॉलर खर्च करता हूँ तो ज़ाहिर है मेरे लिए ये घाटे सौदा होगा."

चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स सामान आयात करने वाले चरणजीत सिंह कहते हैं, "उनका धंधा 70 से 80 प्रतिशत कम हो गया है. रुपए का भाव लगातार गिरने के कारण हमारे लिए चीन से आयात करना असंभव होता जा रहा है. अगर आप गफ्फार मार्किट आएं तो आपको महसूस होगा चीनी सामानों की वैरायटी कितनी कम हो गई है."

सुशील जिवराजका का कहना है, "सरकार को चाहिए कि सात लाख करोड़ की लागत वाली फँसी परियोजनाओं की मंज़ूरी जल्द दे तो भारतीय उद्योग की कठिनाई कम हो सकती है."

सरकार इस तरफ क़दम उठा रही है. आज वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि "तेल, गैस, सड़क और रेलवे के क्षेत्र में अटकी 36 परियोजनाओं को हरी झंडी मिल गई है."

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