विकास दर पर चिंता, लेकिन बेहतरी की उम्मीद

पहली तिमाही में विकास दर की धीमी रफ्तार पर हालांकि उद्योग, व्यापार और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है लेकिन इसे लेकर आम तौर पर आश्चर्य का भाव नहीं पाया गया.

पिछले दिनों निर्माण क्षेत्र में जिस तरह की गिरावट आ रही थी और मांग जिस तरह कम हो रही थी उसे लेकर शेयर बाज़ार और व्यापार और उद्योग इस तरह के आँकड़ों के लिए शायद तैयार थे.

हालांकि एचडीएफसी के उपाध्यक्ष केकी मिस्त्री ने टीवी चैनल एनडीटीवी से कहा कि वो उम्मीद कर रहे थे कि विकास दर 4.8 फ़ीसद होगी.

शुक्रवार को जारी किए गए आँकड़ों में सकल घरेलू उत्पाद की दर पहली तिमाही में 4.4 प्रतिशत बताई गई है.

'उम्मीद के मुताबिक़'

मगर वित्तीय क्षेत्र के अख़बार इकॉनॉमिक्स टाइम्स को दी गई प्रतिक्रिया में बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने कहा कि जीडीपी के आँकड़े उम्मीद के मुताबिक़ ही हैं.

उद्योग समूह सीआईआई के डॉयरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने इस धीमेपन की वजह बताते हुए कहा है कि ये डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होते रूपए, बाजार में कर्ज़ की कमी, तेज़ ब्याज और निवेश में हो रही देरी की वजह से आया है.

फिक्की के सदस्य सुशील जवार्जका का कहना था कि हालात को लेकर उद्योग और व्यापार में चिंता है लेकिन आपा-धापी का माहौल नहीं.

उनका कहना था कि इसे लेकर चिंता है कि खर्च को कैसे कम करें और मांग को कैसे बढ़ाया जाए.

उनका कहना था कि आने वाला वक्त और दिक्कतों का है.

'मंहगाई बढ़ेगी'

तेल के दाम पहले से ही बढ़े हैं उसके आयात की कीमत और उपर चली जाएगी, जिसका असर मंहगाई पर पड़ेगा. मैनिफैक्चरिंग सेक्टर में लागत बढ़ जाएगी.

जाने माने अर्थशास्त्री स्वामीनाथन अय्यर ने भी इकॉनॉमिक टाइम्स से कहा कि अगली तिमाही और उसके बाद की स्थितियां और विकट होंगी.

केंद्रीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान ने सरकार को सलाह दी है कि वो पूँजी निवेश के रास्ते में आने वाली हर अड़चन को दूर करे.

बिमल जालान का कहना था कि सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता नई परियोजनाओं को शुरु करना और अधर में लटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करना होना चाहिए.

जानकारों का एक वर्ग ये कह रहा है कि सरकार के बढ़ते ख़र्च की वजह से निवेशकों में भरोसा कम हो रहा है जो बाज़ार में रूपये की गिरती कीमत के रुप में देखा जा सकता है.

'सरकारी खर्च बढ़ेगा'

उनके मुताबिक देश की 80 करोड़ जनता को दिया जाने वाला लोकसभा में पास खाद्य बिल सरकारी खर्च पर और बोझ डालेगा जो चालू खाते घाटे को और ऊपर ले जाएगा.

लेकिन योजना आयोग के उपाध्यक्ष मांटेक सिंह आहलूवालिया का मानना है कि खाद्य पर दी जाने वाली सब्सिडी का बोझ बर्दाश्त किया जा सकता है.

उन्होंने ये प्रतिक्रिया एनडीटीवी चैनल पर एक बातचीत के दौरान दी. डॉलर के मुकाबले रूपये की गिरती क़ीमत को लेकर उनका कहना था कि कुछ लोगों का ख़्याल है कि डॉलर के मुकाबले रुपए की क़ीमत 60 से 65 के बीच ठीक है.

प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि रुपए की कीमत में सुधार होने से निर्यात को फायदा पहुंचेगा.

संबंधित समाचार