भारतीय अर्थव्यवस्था संकट से उबरने में सक्षम: मनमोहन

Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि देश आर्थिक संकट से उबरने में सक्षम है.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की ख़राब आर्थिक हालत पर शुक्रवार को संसद में बयान दिया है. उन्होंने डॉलर के मुकाबले रुपए की लगातार गिरती क़ीमत पर चिंता जताई है और कहा है कि इसके लिए घरेलू कारण के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारक भी ज़िम्मेदार हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले छह महीनों में अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने के लिए जो क़दम उठाए गए हैं उसके सकारात्मक नतीजे जल्दी ही सामने आएंगे.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूपीए की सरकार ने आर्थिक सुधार के जो उपाय अपनाए हैं वो उसपर क़ायम रहेगी और बिगड़ते आर्थिक हालात को सुधारने के लिए लाइसेंस-परमिट राज की व्यवस्था में नहीं लौटेगी.

मनमोहन सिंह ने कहा कि अमरीकी अर्थव्यवस्था में जो सुधार आया है उसका कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है और भारत भी उनमें से एक है.

'देश सक्षम'

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.8 फीसदी से नीचे न जाने देने के लिए इस वर्ष हर संभव क़दम उठाएगी.

महंगाई को देश के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति कम हो रही है लेकिन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अभी भी ऊंची है जो कि चिंता का विषय है.

हालांकि मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई कि मॉनसून अच्छी बारिश की वजह से इस वर्ष फसल अच्छी होगी और सरकार महंगाई को आनेवाले समय में नियंत्रित करने में क़ामयाब होगी.

चालू खाते के संकट की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 278 अरब डॉलर का है जो कि आयात बिल को लंबे समय तक संभालने के लिए पर्याप्त है.

हालांकि उन्होंने मुद्रा संकट के समाधान के लिए निर्यात बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया और कहा कि लोगों को सोने और पेट्रोलियम पदार्थों के उपभोग में कमी लानी चाहिए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था के मूलभूत अवयव मज़बूत हैं और देश संकट की इस घड़ी से उबरने में सक्षम है.

विपक्ष का विरोध

डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरती क़ीमत को लेकर लगातार सरकार को घेर रहे विपक्ष ने प्रधानमंत्री के बयान के बाद लोकसभा में खूब शोरशराबा किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने कोई नई बात नहीं कही.

इससे पहले विपक्ष ने यूपीए सरकार पर अर्थव्यवस्था की बिगड़ती सेहत को संभाल पाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था. शुक्रवार को भी विपक्षी सदस्यों ने ये कहकर प्रधानमंत्री की आलोचना की कि ये वक्त समस्याएं गिनाने का नहीं बल्कि समाधान बताने का है और प्रधानमंत्री ने अपने बयान में ऐसा कुछ भी नहीं कहा.

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