मेरी प्रिय कविता: उदय प्रकाश

Image caption शमशेर बहादुर सिंह की प्रमुख कृतियां हैं 'चुका नहीं हूं मैं', 'काल तुझसे होड़ है मेरी', 'बात बोलेगी'.

किसी व्यक्ति को कोई कविता हमेशा के लिए पसंद नहीं होती, बल्कि समय-समय पर किसी कविता की स्मृतियां लौट-लौट कर आती हैं बदलते हुए संदर्भों में. मुझे शमशेर बहादुर सिंह की कविता 'अमन का राग' लंबे अरसे से प्रभावित करती रही है.

मैं मानता हूं कि हिंदी में इतने बड़े दायरे की ऐसी शांतिकामी दूसरी कविता लिखी नहीं गई. हिंदी ही नहीं शायद भारत की दूसरी भाषाओं में भी.

'अमन का राग' आज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पूरी दुनिया आज मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग के उस ऐतिहासिक भाषण (आई हैव ए ड्रीम) की पचासवीं सालगिरह मना रही है.

'अमन का राग' लिखी गई थी 1945 में. जब भारतीय संसद के इतिहास की 50वीं सालगिरह मनाई जा रही थी तब भी मैंने लिखा था कि 'अमन का राग' का भी भव्य जश्न मनाया जाना चाहिए.

'अमन का राग' इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वो किसी भी तरह की हिंसा और युद्ध की विरोधी कविता है और ये कविता लिखी गई थी द्वीतीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद.

इसमें समकालीन विश्व में जो शिविरबंदी थी, ये कविता पूरी तरह से उसके विरुद्ध है. यह मानवता और मनुष्यता की रक्षा और उसकी चिंता में खड़ी हुई अपनी तरह की अकेली कविता है. उदाहरणस्वरूप -

मुझे अमरीका का लिबर्टी स्टैचू उतना ही प्यारा है जितना मास्को का लाल ताराऔर मेरे दिल में पेकिंग का स्वर्गीय महलमक्का-मदीना से कम पवित्र नहींमैं काशी में उन आर्यों का शंखनाद सुनता हूंजो वोल्गा से आएमेरी देहली में प्रह्लाद की तपस्याएं दोनों दुनियाओँ की चौखट पर युद्ध के हिरण्यकश्यप को चीर रही हैं।यह कौन मेरी धरती की शांति की आत्मा पर कुरबान हो गया हैगया है।

Image caption शमशेर जी ने 'अमन का राग कविता' 1945 में रची थी.

कोरिया के बच्चों के लिए और दुनिया में जहां कहीं भी युद्ध और हिंसा है उन सबके विरुद्ध ये कविता एक बहुत बड़े ग्लोबल स्वप्न के साथ खड़ी होती है. उदाहरणस्वरूप-

पाल राब्सन ने नई दिल्ली से नए अमरीका की एक विशाल सिम्फ़नी ब्राडकास्ट की हैऔर उदय शंकर ने दक्षिणी अफ्रीका में नई अजंता को स्टेज पर उतारा हैयह महान नृत्य वह महान स्वर कला और संगीतमेरा है यानी हर अदना से अदना इंसान काबिल्कुल अपना निजी।युद्ध के नक्शों को कैंची से काटकर कोरियाई बच्चों ने झिलमिली फूलपत्तों की रौशन फ़ानूसें बना ली हैंऔर हथियारों का स्टील और लोहा हज़ारोंदेशों को एक-दूसरे से मिलानेवाली रेलों के जाल में बिछ गया हैऔर ये बच्चे उन पर दौड़ती हुई रेलों के डिब्बों की खिड़कियों से हमारी ओर झांक रहे हैं.

मुझे नहीं लगता कि शमशेर जितने संवेदनशील थे और जो बार-बार उनकी तमाम कविताओं में अभिव्यक्त हुआ है. वो चाहे 'टूटी हुई बिखरी हुई' हो जिसने मुझे ही नहीं हमारी पीढ़ी और आज की पीढ़ी के तमाम कवियों और पाठकों प्रभावित किया होगा क्योंकि उतनी अच्छी प्रेम कविता भी शायद दुर्लभ ही होगी जो लिखी गई हो.

आज हम सब देख रहे हैं फिर वही युद्ध के बादल हैं. सीरिया, हमारे आसपास अफ़गानिस्तान, खुद भारत और उसके पड़ोसी देश और तमाम तरह के भीतरी और बाहरी द्वंद्. जैसी हिंसा के वातावरण से हम घिरे हुए हैं उस माहौल में यह कविता 'अमन का राग' एक तरह का शांति पाठ है और मनुष्यता को बचाने के लिए महामृत्युंजय का जाप है ये उसकी अमरता के पक्ष में.

(प्रस्तुति: अमरेश द्विवेदी)

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