राज्य सभा से भी खाद्य सुरक्षा विधेयक पारित

  • 3 सितंबर 2013

देर रात तक चली बहस के बाद राज्यसभा ने भी खाद्य सुरक्षा विधेयक को पारित कर दिया है. अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ये विधेयक क़ानून का रूप ले लेगा.

लोकसभा ने इस विधेयक को पहले ही मंज़ूरी दे दी है.

राज्य सभा में मतदान के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे. बहस के दौरान इस बात पर ज़ोर दिया गया कि राज्यों को भी इस मामले में बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने आरोप लगाया कि सरकार का ये विधेयक पुराना है, जिसे नए रूप में सामने लाया जा रहा है.

केंद्र सरकार का दावा है कि खाद्य सुरक्षा क़ानून के तहत करीब 67 प्रतिशत भारतीयों को सस्ते दर पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने का प्रावधान है.

राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने चुनाव के मद्देनज़र सरकार की चाल है. विपक्ष ने ये भी आरोप लगाया कि एक महीने में संसद का सत्र होना था, लेकिन सरकार इसे अध्यादेश के रूप में लेकर क्यों आई.

भारतीय जनता पार्टी के नेता और सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि इस तरह की कई योजना अभी अस्तित्व में है और इस बिल को सिर्फ़ नए रूप में लाया जा रहा है, जबकि इसमें कुछ भी नया नहीं है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और अन्ना द्रमुक ने भी कहा कि सरकार जल्दबाज़ी में इसे लेकर आई थी.

प्रावधान

खाद्य सुरक्षा विधेयक में 82 करोड़ लोगों यानी दो तिहाई जनसंख्या को प्रतिमाह सस्ते दर पर अनाज मुहैया कराने का प्रावधान है.

ग्रामीण इलाके में 75 प्रतिशत और शहरी इलाके में 50 फीसदी लोगों को हर महीने पांच किलो अनाज. तीन रुपये प्रति किलो चावल, दो रुपये किलो गेहूं और एक रुपये किलो की दर से मिलेगा ज्वार.ये कीमतें 3 साल बाद बदली जाएंगी.

अंत्योदय कार्ड वाले गरीब परिवार को महीने में 35 किलो अनाज. तीन रुपये किलो चावल, दो रुपये किलो गेहूं और एक रुपये किलो की दर से ज्वार मिलेगा.

राज्य सरकार अगर अनाज मुहैया नहीं करा पाई तो उसे खाद्य सुरक्षा भत्ता गरीबों को देना होगा. यह भत्ता कितना होगा, यह तय करने की जिम्मेदारी केंद्र की होगी. राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर गरीबों की संख्या योजना आयोग तय करेगा जबकि गरीब की पहचान राज्य करेंगे.

प्रत्येक गर्भवती महिला को छह हजार रुपये मिलेंगे. छह महीने से 14 साल तक के बच्चों को राशन या खाना मुहैया कराया जाएगा.

परिवार की वरिष्ठतम महिला सदस्य को मुखिया माना जाएगा. राशन कार्ड उसी के नाम पर बनेगा. 1,24,724 करोड़ रुपये का खर्च आएगा खाद्य सुरक्षा योजना के लागू होने पर 2013-14 में 612.3 लाख टन अनाज की जरूरत पडे़गी.

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