ज़ुबिन मेहता के कंसर्ट के लिए कश्मीर में सुरक्षा बढ़ी

  • 2 सितंबर 2013
कश्मीर में बढ़ रहा है जुबिन मेहता के कंसर्ट पर विरोध

भारत प्रशासित कश्मीर में शनिवार को होने वाले विश्व प्रसिद्ध संगीतकार ज़ुबिनमेहता के कंसर्ट के विरोध में अधिकार संगठन और स्थानीय थिएटर कलाकार एक समानांतर कंसर्ट की योजना बना रहे हैं.

कश्मीर में हुर्रियत कांफ्रेस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने सोमवार को दो दिन के विरोध प्रदर्शनों की अपील है. वो इसे 'कश्मीर का सच छिपाने की कोशिश' बता कर इस कंसर्ट का विरोध कर रहे हैं.

वहीं अधिकारियों ने ज़ुबिन मेहता के इस कार्यक्रम के लिए सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी है, जिसका सीधा प्रसारण पंद्रह देशों में होना है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी से कहा, ''ज़ुबिन मेहता को कोई विशेष खतरा नहीं है. लेकिन हम जर्मन दूतावास के संपर्क में हैं और प्रोटोकोल के अनुसार बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं.''

'एहसास-ए-कश्मीर' का विरोध

ज़ुबिन मेहता के प्रोग्राम 'एहसास-ए-कश्मीर' के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने अपने कार्यक्रम को 'हकीकत-ए-कश्मीर' नाम दिया है.

समानांतर कार्यक्रम के आयोजकों में से एक खुर्रम परवेज का कहना है, "हम कट्टरपंथी नहीं हैं. संगीत और कला की हमारी समृद्ध संस्कृति है. लेकिन जर्मनी भी भारत के साथ मिलकर विश्व समुदाय को कश्मीर की ज़मीनी हकीकत से दूर रखने की कोशिश कर रहा है.''

ये समानांतर आयोजन उसी दिन होगा जब ज़ुबिन मेहता मुग़ल बादशाह जहांगीर द्वारा कश्मीर में बनवाए गए शालिमार गार्डेन में बवेरियन स्टेट ऑर्केस्ट्रा का प्रोग्राम पेश कर रहे होंगे.

शीर्ष अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी ने जर्मनी दूतावास को पत्र लिखकर ज़ुबिन मेहता के कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की थी. गिलानी ने कंसर्ट के दिन शनिवार को पूरी तरह बंद की अपील की है.

गिलानी ने तुरत फुरत बुलाई एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ''हम दुनिया को बता देना चाहते हैं कि हम बंधक जनता हैं. हम अब शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन के जरिए अपनी कहानी बताएंगे और शनिवार को पूरी तरह बंद रखेंगे.''

अतीत में भी विवाद

कश्मीर में अतीत में भी कई आयोजनों ने सियासी विवादों को जन्म दिया है. पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी चरमपंथी नेता सैयद सलाहुद्दीन ने वर्ष 2008 में पाकिस्तान सरकार से कश्मीर में म्यूजिक बैंड जुनून को कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं देने की मांग की थी.

सैयद अली गिलानी ने की शनिवार को कश्मीर बंद की अपील

कश्मीर में एक लड़कियों के बैंड को पिछले साल तब बंद करना पड़ा था, जब कुछ युवाओं ने फेसबुक पर उन्हें धमकियां दीं. भारतीय अर्द्धसैन्य बल सीआरपीएफ द्वारा प्रायोजित ये बैंड एक संगीत प्रतियोगिता के दौरान बनाया गया था.

विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय से कश्मीर में कला की अभिव्यक्ति पर राज्य अधिकारियों का एकाधिकार है.

एक स्थानीय कॉलम लेखक जावेद नकीब कहते हैं, ''कश्मीर की एकमात्र सांस्कृतिक अकादमी के प्रमुख मुख्यमंत्री हैं. इन हालात में कोई स्वतंत्र तौर पर कला के विकास की उम्मीद कैसे कर सकता है. इसीलिए लोग सरकारी सहयोग से होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को तिरछी नज़र से देखते हैं.''

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