सिख विरोधी दंगे: सोनिया को अमरीकी अदालत का समन

  • 4 सितंबर 2013
सोनिया गांधी
Image caption सोनिया गांधी पर दंगों में शामिल लोगों को बचाने का आरोप लगया गया है

न्यूयॉर्क में अमरीका की एक केंद्रीय अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के सिलसिले में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ समन जारी किया है.

यह सम्मन तब जारी किए गए जब 'सिख्स फॉर जस्टिस’ नामक एक सिख संस्था और 1984 के दंगों के दो पीड़ितों मोहिंदर सिंह और जसबीर सिंह ने अदालत में सोनिया गांधी के खिलाफ मुकदमा दायर किया.

इसमें आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी अपनी कांग्रेस पार्टी के उन कार्यकार्ओतों और नेताओं को बचा रही हैं जो 1984 के दंगों में कथित तौर पर शामिल थे.

यह मुकदमा अमरीका के एलियन टॉर्ट क्लेम्स कानून और प्रताड़ना के पीड़ितों को सुरक्षा देने संबंधी कानूनों के तहत दायर किए गए हैं.

अब सिख्स फ़ॉर जस्टिस संस्था की कोशिश है कि ये समन सोनिया गांधी तक पहुंचाया जाए जो इन दिनों अमरीका के निजी दौर पर हैं.

सोनिया पर आरोप

27 पन्ने के अदालती दस्तावेज़ में सोनिया गांधी पर आरोप लगाए गए हैं कि वह अपनी कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं जैसे कमलनाथ, सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और अन्य नेताओं को 1984 के दंगों के दौरान किए गए 'मानवता के खिलाफ अपराधों' के सिलसिले में कानूनी कार्रवाई से बचा रही हैं और उनकी रक्षा कर रही हैं.

और इस कारण सोनिया गांधी के खिलाफ़ हर्जाने का भी दावा किया गया है.

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे जिनमें सिख समुदाय को निशाना बनाया गया.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन दंगों में लगभग तीन हजार लोगों के मारे गए थे.

जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार जैसे कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दंगों से जुड़े मामलों में मुकदमे चलते रहे हैं.

'अब तक इंसाफ नहीं मिला'

अदालती दस्तावेज़ में पिछले महीने की एक घटना का ब्यौरा भीर दिया गया है जिसके अनुसार दिल्ली के तिलक विहार इलाके में एक कालोनी में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने 1984 के दंगों के कुछ पीड़ितों और गवाहों पर हमले भी किए जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए.

Image caption इन दंगों में हजारों लोग मारे गए थे

अमरीकी कानून के तहत सोनिया गांधी को यह अदालती सम्मन व्यक्तिगत रूप से देने होंगे. उसके बाद किसी प्रकार की कोई अदालती कार्रवाई शुरू हो सकेगी.

सम्मन मिलने के बाद भी सोनिया गांधी को समय दिया जाएगा कि वह अदालत में उनके खिलाफ़ लगे आरोपों का जवाब दाखिल कराएं.

सिख्स फ़ॉर जस्टिस के वकील गुरपतवंत पान्नुन ने सोनिया गांधी के खिलाफ दायर इस मुकदमे के बारे में कहा, "यह मुकदमा इसलिए दायर किया गया है ताकि 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों को किसी प्रकार का इंसाफ़ मिले और सत्ता में बैठे लोगों को मानवाधिकार के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाए जिससे आगे कोई ऐसे अपराध न कर सके. और इसके ज़रिए अंतरराष्ट्रीय समुदाए को भी यह बताना है कि पीड़ितों को अभी तक इंसाफ़ नहीं मिला."

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