जेल की चारदीवारी में गूंजती संगीत की लहरें

दिल्ली के तिहाड़ जेल की चारदीवारी के अंदर इन दिनों संगीत की लहरें गूंज रही हैं. वजह है वहां शुरु हुआ एफ़एम स्टेशन-एफ़एम टीजे.

ये रेडियो स्टेशन जेल प्रशासन द्वारा क़ैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए उठाए गए कई क़दमों के तहत एक नई शुरुआत है. इससे पहले क़ैदियों द्वारा मसाले, नमकीन, हाथ से बने काग़ज़ के उत्पाद, कपड़े, हथकरघा, बेकरी और लकड़ी के उत्पाद पिछले कुछ सालों से बाज़ार में टीजेस ब्रैंड के नाम से उपलब्ध हैं.

फ़िलहाल तिहाड़ की दस जेलों में से दो में एफ़एम स्टेशन हैं-जेल नंबर एक और चार में.

अंडरट्रायल या विचाराधीन क़ैदियों वाली जेल नंबर एक का एफ़एम टीजे स्टूडियो एक 15 x10 फ़ुट के कमरे से चलाया जा रहा है. कमरे में एक कंप्यूटर, एक कंसोल और एक माइक रखा है.

माइक के सामने बैठे सूरज ने बताया कि बाक़ायदा स्वर परीक्षा और ट्रेनिंग के बाद उन्हें ये मौक़ा मिला है. वे कहते हैं कि हालांकि उन्हें संगीत में शुरु से रुचि थी लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वो कभी आरजे भी बनेंगे.

सूरज कहते हैं, "मुझे संगीत में बहुत दिलचस्पी है. जेल में आने से पहले मैं शास्त्रीय संगीत सीख रहा था और यहां भी सीख रहा हूं. जहां तक आरजे की बात करें तो मुझे बचपन से ही इन सब चीज़ो का शौक़ था. आज आरजे की कुर्सी पर बैठकर बहुत अच्छा महसूस होता है. ऐसा लगता है कि किसी ने लाकर सारी कायनात मुझे दे दी हो क्योंकि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे कभी ऐसा मौक़ा मिलेगा."

ये शुरुआत अगस्त महीने में हुई है. एफ़एम टीजे हर रोज़ दोपहर बारह से तीन बजे तक प्रसारित होता है.

आरजे का प्रशिक्षण एक स्वयंसेवी संस्था दे रही है. इसके लिए पहले इच्छुक क़ैदियों का स्वर परीक्षण किया गया और फिर उन्हें आरजे बनने के गुण सिखाए गए.

ऐसे ही एक क़ैदी बिष्ट की फ़िलहाल ट्रेनिंग चल रही है. वे कहते हैं कि माइक के सामने बैठने से पहले वे बाक़यदा तैयारी करते हैं और स्क्रिप्ट भी पहले से लिख कर रखते हैं.

बाहर की ज़िंदगी से दूर, जेल की चारदीवारी के अंदर ज़िंदगी काफ़ी बोझिल होती है. और ऐसे में तनाव और नकारात्मक सोच अक्सर क़ैदियों को घेर लेती है. लेकिन बिष्ट के मुताबिक़ एफ़एम शुरु होने के बाद से क़ैदियों में काफ़ी बदलाव आया है.

बिष्ट बताते हैं, "बदलाव तो काफ़ी है. यहां सबसे ज़्यादा मानसिक तनाव होता है. जेल नियमों के तहत दोपहर बारह से तीन गिनती बंद का समय होता है, सब क़ैदी वॉर्ड के अंदर बंद होते हैं. उस वक़्त सबसे ज़्यादा अकेलापन महसूस होता है. उस अकेलेपन को कम करने के लिए तिहाड़ प्रशासन की ओर से शुरु किया गया एफ़एम टीजे बहुत बड़ा क़दम है. संगीत आपके आत्मा को छूता है और जब कोई चीज़ आपकी आत्मा को छूती है तो वो पक्का तनाव कम करती है."

ये बदलाव आरजे सूरज भी अपने अंदर महसूस कर रहे हैं. वे कहते हैं, "जब मैं यहां आया था तब मेरी सोच बहुत नकारात्मक हो गई थी. मुझे लगा मेरी ज़िंदगी ख़त्म हो गई है, मैं अब कुछ नहीं कर सकता. लेकिन फिर मुझे यहां ऐसे लोग मिले जिन्होंने मेरी सोच को बदला. मुझे आरजे के तौर पर चुना गया और मेरे प्रशिक्षक और जेल अधिकारियों ने मुझे बढ़ावा दिया कि अब भी मेरे पास विकल्प हैं."

सूरज चाहते हैं कि जिस तरह संगीत से उनकी सोच में सकारात्मक बदलाव आया है, उसी तरह अपने काम से वे अपने साथी क़ैदियों की ज़िंदगी को भी बदल सकें और उनके चेहरों पर मुस्कान ला सकें.

क़ैदियों से उनकी फ़रमाइशें पहले ही मंगवाई जाती हैं. और महज़ एक महीने में ही एफ़एम की लोकप्रियता काफ़ी तेज़ी से बढ़ी है.

कार्यक्रम का तकनीकी पक्ष रिषभ संभालते है. वे बताते हैं, "जब से एफ़एम शुरु हुआ है, तब से लोगों की भावनाओं के बारे में जानने का मौक़ा मिला है. पहले जो लोग इधर-उधर घूमते थे, वो अब एफ़एम के समय स्पीकर के पास ही रहते हैं. उन्हें लगता है कि अब उनका नाम अनाउंस होगा और उनकी पसंद का गाना बजेगा. लोगों में एफ़एम टीजे को लेकर काफ़ी उत्साह है."

एक और क़ैदी जितेंद्र भी कहते हैं कि ये रेडियो स्टेशन क़ैदियों को अपनी बातें और दुख-दर्द बांटने का एक बेहतरीन ज़रिया है. वे बताते हैं, "जब भी मुझे समय मिलता है मैं एफ़एम ज़रूर सुनता हूं. मुझे इसका सबसे बड़ा फ़ायदा ये लगा कि इसके ज़रिए हमारे बंदी भाई अपने दिल की बातें बांट सकेंगे."

जो शुरुआत सूरज, बिश्ट और रिषभ ने जेल की सलाखों के पीछे की है, बाहर निकल कर भी वे इसे जारी रखना चाहते हैं.

रिषभ की आँखों में भी भविष्य को लेकर कई सपने हैं. वे बताते हैं कि जेल में उन्होंने कुछ गाने लिखे और संगीतबद्ध किए हैं. जेल से छूटने के बाद वे अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड कर इन गानों की एलबम बाज़ार में लाना चाहेंगे.

सूरज भी कहते हैं कि उन्हें ख़ुद पर भरोसा है और जेल से निकलने के बाद वे न सिर्फ़ अपनी संगीत की शिक्षा को जारी रखना चाहेंगे बल्कि मौक़ा मिलने पर आरजे का काम भी करना चाहेंगे.

फ़िलहाल दो जेलों में एफ़एम टीजे की लोकप्रियता को देखते हुए जेल प्रशासन की योजना इसे तिहाड़ के बाक़ी जेलों में शुरु करने की भी है.

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