खाद्य सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण बिल से विकास होगा?

भारत, अर्थव्यवस्था, निर्यात, टैक्स

मौजूदा आर्थिक हालात के मद्देनज़र ये सच बात है कि अर्थव्यवस्था के पहिए को जब तक आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं होगी, मौजूदा संकट कायम रहेगा.

पिछली तिमाही में विकास दर 4.4 फीसदी रही, जिसे आगे बढ़ाने में काफी दिक्कतें पैदा होगी.

ये बात साफ़ है कि जब तक हम निवेश नहीं बढ़ाएंगे टैक्स कहां से जमा होगा? और टैक्स नहीं आएगा तो सरकार देगी कहां से?

वहीं, जहां तक विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच विश्वास का मसला है, विश्वास का संकट एक राजनीतिक प्रक्रिया है.

क्योंकि दोनों पार्टियों को अपने-अपने मतदाताओं को भी संबोधित करना होता है.

ऐसी स्थिति में जो भी मुख्यधारा की पार्टियां हैं, जिन्हें आगे जाकर सरकार चलानी है, उन्हें ये समझना होगा कि उन्होंने अगर 2014 के आम चुनावों के पहले आर्थिक सुधारों से संबंधित कानूनी मसलों को नहीं निपटाया गया तो आगे बहुत दिक्कतें बढ़ जाएंगी.

Image caption संसद के मौजूदा सत्र में सरकार ने पेंशन बिल को पास करवाया है.

जबकि मौजूदा सत्र में खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर निजी क्षेत्र की नाराज़गी के मुद्दे पर ये बात साफ़ है कि हमारे देश में आर्थिक गतिविधियां निजी क्षेत्र की ही रही हैं.

आज के हालात में सरकार की जो आर्थिक गतिविधियां हैं भी उनसे इस समय किसी तरह बड़े स्तर पर राजस्व या रोज़गार पैदा होने की संभावना नहीं है.

फिलहाल सरकार कोई बड़ा निवेश नहीं करने जा रही है. सरकार पहले बुनियादी ढांचे पर निवेश करती थी, उसमें भी अब निजी क्षेत्र को भागीदार बना कर ही काम किया जा रहा है.

ऐसी स्थिति में सरकार को कॉर्पोरेट सेक्टर या कहें कि निजी पूंजी को, चाहे वह देशी हो या विदेशी, खाने-पीने के लिए कुछ देना ही होगा.

नहीं तो यह पूंजी भारत से बाहर भागेगी, वो भी डॉलर के रूप में. और तब डॉलर और भी महंगा होगा.

महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए

संसद के इस सत्र के बारे में अगर देखें तो एक ओर जहां काफी धूम-धड़ाका रहा, पाकिस्तान की ओर से सैनिकों की हत्या पर रक्षा मंत्री के बयान को लेकर शोर हुआ.

वहीं तेलंगाना का मुद्दा छाया रहा. इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित हुए. अगर पिछले पांच साल को देखा जाए तो यह सत्र सबसे ज्यादा उत्पादक रहा.

(बीबीसी संवाददाता अविनाश दत्त से बातचीत पर आधारित)

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