पाकिस्तान ने सात तालिबान कैदी 'रिहा किए'

  • 7 सितंबर 2013
तालिबान लड़ाके

अफ़ग़ान शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ने अपनी जेलों में बंद सात तालिबान लड़ाकों को रिहा करने की घोषणा की है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि रिहा किए गए लड़ाकों में तालिबान के एक पूर्व सैन्य कमांडर भी शामिल है.

हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने शांति को बढ़ावा देने के लिए इस्लामाबाद यात्रा की थी.

उस वक़्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा था कि वे अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए किए जा रहे क्षेत्रीय प्रयासों में मदद करना चाहते हैं.

'मदद की गुज़ारिश'

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक़ शनिवार को रिहा किए गए लड़ाकों में मंसूर दादुल्लाह, सईद वली, अब्दुल मन्नान, करीम आग़ा, शेर अफ़ज़ल, गुल मोहम्मद और मोहम्मद ज़ई शामिल हैं.

फ़रवरी 2008 में पकड़े जाने से पहले मोहम्मद दादुल्लाह अफ़ग़ानिस्तान के चार प्रांतों में तालिबान के कमांडर थे. उन्हें पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने एक एनकाउंटर के बाद बलूचिस्तान प्रांत से पकड़ा था.

वे मई 2007 में नैटो और अफ़ग़ान सेना के एक संयुक्त अभियान में अपने भाई मुल्ला दादुल्लाह की मौत के बाद कमांडर बने थे. हालाँकि तालिबान शीर्ष नेतृत्व ने अपने आदेश न मानने पर उसी साल उन्हें निलंबित कर दिया था.

पाकिस्तान की ओर से रिहाई के संबंध में बयान ज़रूर जारी किया गया है, हालाँकि अभी यह साफ़ नहीं हो सका है कि दादुल्ला रिहा हो गए हैं या नहीं.

Image caption तालिबान से बातचीत के लिए अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान का सहयोग चाहता है

बयान के मुताबिक़ पिछले साल 26 तालिबान लड़ाकों को रिहा किया गया था.

पिछले महीने अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान राषट्रपति करज़ई ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा के मुद्दे का हवाला देकर अफ़ग़ान तालिबान को शांति वार्ता के लिए राज़ी करने के लिए पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से मदद की गुज़ारिश की थी.

अमरीकी कठपुतली

अफ़ग़ानिस्तान मानता रहा है कि पाकिस्तान स्थित तालिबान के सुरक्षित ठिकाने ही देश में बढ़ती हिंसा का मुख्य कारण हैं.

पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों पर अफ़ग़ान तालिबान को देश में पनाह देने और मदद करने के आरोप लगते रहे हैं. हालाँकि पाकिस्तान इस तरह के तमाम आरोपों को नकारता रहा है.

करज़ई ने कहा था कि वे चाहते हैं कि तालिबान के साथ वार्ता में पाकिस्तान की सरकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाए. अफ़ग़ान तालिबान पर पाकिस्तानी सरकार का ख़ासा प्रभाव माना जाता है.

हालाँकि तालिबान ने करज़ई को अमरीका का मोहरा बताते हुए शांति वार्ता से इंकार कर दिया है.

करज़ई ने पाकिस्तान से शीर्ष तालिबान कमांडरों को रिहा करने की माँग की थी ताकि तालिबान चरमपंथियों से सीधी वार्ता स्थापित करने में मदद मिल सके.

करज़ई ख़ासतौर पर 2010 में कराची से पकड़े गए तालिबान के दूसरे नंबर के कमांडर मुल्ला अब्दुल ग़नी बारादर की रिहाई चाहते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार