कड़ी सुरक्षा के बीच ज़ुबिन मेहता का कंसर्ट पूरा

श्रीनगर में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शनिवार को विश्वविख्यात संगीतकार ज़ुबिन मेहता का कंसर्ट आयोजित किया गया. स्थानीय अलगाववादी और कई मानवाधिकार कार्यकर्ता इसका विरोध किया.

इसके विरोध में शनिवार को भारत प्रशासित कश्मीर में अलगाववादियों ने बंद बुलाया है. अलगाववादियों का कहना है कि यह विवादित क्षेत्र को सामान्य दिखाने का भारत का प्रयास है.

श्रीनगर पर बंद का असर साफ़ दिख रहा है. बाज़ार सुबह से ही बंद हैं. शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम की तरफ़ जाने वाले रास्तों को रोका गया है. इसी मैदान में अलगाववादियों ने एक समानांतर संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया है. इस इलाक़े में सुरक्षा का इंतज़ाम भी बेहद कड़ा है.

इस कार्यक्रम के आयोजकों में से एक ख़ुर्रम परवेज़ ने बताया कि इस समानांतर कार्यक्रम के प्रतिभागियों को आयोजन स्थल तक पहुंचने नहीं दिया जा रहा है और उनके स्टेज पर क़ब्ज़ा कर लिया गया है.

हथियारबंद सुरक्षाकर्मी सुनसान गलियों में घूमते देखे जा सकते हैं.

अलगाववादियों का कहना है कि भारत इस इलाक़े में हो रहे मानवाधिकार हनन पर पर्दा डालकर एक ख़ुशहाल तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहा है.

ज़ुबिन मेहता का ये शो भारी सुरक्षा कवच के बीच कराए जाने की तैयारी है. ऐतिहासिक शालीमार बाग़ में हो रहे इस शो में जर्मन कलाकारों के साथ 15 लोक कलाकार भी हिस्सा ले रहे हैं.

घाटी में प्रतिक्रिया

Image caption सड़कों पर पसरा सन्नाटा और पुलिसबल स्थिति बयां कर रहे हैं.

दरअसल सवालिया निशान इस कार्यक्रम को इस वक़्त आयोजित करने के उद्देश्यों को लेकर लगाए जा रहे हैं. लोग इस बात पर हैरानी जताते हैं कि हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा के आस-पास हुई घटनाओं से उपजे माहौल को देखते हुए इस कार्यक्रम के आयोजन का क्या मतलब है.

शुक्रवार से ही शालीमार गार्डन के बाहर वाली सड़क पर सन्नाटा पसरा था. इक्का दुक्का गाड़ियाँ ही आती जाती दिख रही थीं. दुकानें बंद थीं क्योंकि कोई भी मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता. आने जाने वाले युवाओं से उनका पहचान पत्र दिखाने को कहा जा रहा था. जामा मस्जिद के आसपास लोगों से हुई बातचीत मे असहमति साफ़ नज़र आई .

एक स्थानीय निवासी का कहना था कि "भारत इस कार्यक्रम के माध्यम से साबित करना चाहता है कि कश्मीर में सब कुछ ठीक है लेकिन ऐसा नहीं है."

अलगाववादी प्रश्न

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने ख़ास बातचीत में न सिर्फ़ कश्मीर में होने वाले कथित मानवाधिकार हनन का ज़िक्र किया बल्कि इसराइल के साथ ज़ुबिन मेहता के संबंधों पर भी सवाल उठाए. गिलानी कहते हैं कि इसराइल इस इलाक़े में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है.

ज़ुबिन मेहता के एहसास-ए-कश्मीर कार्यक्रम के विरोध में कुछ मानवाधिकार गुटों की समानांतर कार्यक्रम करने की योजना है.

अली शाह गिलानी ने जुब़िन मेहता के बारे में कहा, "मेरी उनसे यही उम्मीद है कि वो इसराइल की नीतियों का पालन करने की कोशिश न करें."

हालांकि कार्यक्रम के विरोध में कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर.

ज़ुबिन मेहता के कार्यक्रम एहसास-ए-कश्मीर के विरोध में शनिवार को हकीक़त-ए-कश्मीर कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें कथित मानवाधिकार हनन के मुद्दों के बारे में बात होगी.

समर्थन

Image caption परवेज़ खुर्रम विरोधी समानांतर कार्यक्रम आयोजित करने वालों में शामिल हैं.

इस कार्यक्रम के विरोध में उठे स्वरों को देखकर ये अंदाज़ा लगाना सही नहीं होगा कि हर कोई इसका विरोध कर रहा है.

एक स्थानीय युवा पत्रकार का कहना था, "ऐसा नहीं है क्योंकि संगीत कश्मीरियों के रग-रग में है और साल 2009 में पाकिस्तानी संगीत बैंड जुनून ने यहाँ कार्यक्रम पेश किया था." कार्यक्रम में 15 स्थानीय कश्मीरी कलाकार भी हिस्सा लेंगे.

ऐसे ही एक कलाकार ने कुछ भयभीत स्वर में कहा कि घाटी में बहुत सारे संगीत समारोह का समर्थन करते हैं लेकिन घाटी के हालात को देखते हुए डरते हैं. उनका परिवार चिंतित है कि शनिवार को जब इस कार्यक्रम का प्रसारण दुनिया भर में होगा तो क्या फिर उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता नहीं बढ़ जाएगी.

सैयद अली शाह गिलानी ने शनिवार को घाटी बंद रखने का आह्वान किया है.

पूरे इलाक़े में सुरक्षा बेहद कड़ी है. ज़ुबिन मेहता के कार्यक्रम पर निगाहें टिकी हैं और इस बात पर भी कि इसके विरोध के स्वर कितने प्रबल होकर सामने आ पाते हैं.

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