'दोषियों को मिले कड़ी से कड़ी सजा'

दिल्ली बलात्कार
Image caption पिछले साल दिसंबर में हुए सामूहिक बलात्कार के बाद पूरे देश में लोगों का तीखा आक्रोश व्यक्त किया था.

16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में चलती बस में हुए सामूहिक बलात्कार मामले में चारों अभियुक्तों को अदालत ने हत्या और बलात्कार का दोषी क़रार दिया है.

दोषियों को बुधवार को सज़ा सुनाई जाएगी.

पीड़िता का परिवार दिल्ली के द्वारका इलाक़े में रहता है. मैं जब सुबह वहां पहुंचा परिवार के सभी लोग अदालत जा चुके थे.

यहाँ उनके पड़ोसी या तो अपने घरों में थे या दफ्तरों को जा चुके थे. वहाँ काफी ख़ामोशी थी.

इन बड़ी इमारतों में मध्यम वर्ग के लोग रहते हैं, जिनमें अधिकतर एक दूसरे को नहीं जानते. इन इमारतों के बाहर लोगों से ज़्यादा कारें और गाड़ियां नज़र आ रही थीं.

आखिरकार कुछ लोग नज़र आए और मैंने उनसे बातचीत की.

इस मुक़दमे के बारे में सबको मालूम था लेकिन पीड़िता का परिवार यहाँ रहता है इसकी जानकारी सभी लोगों को नहीं थी.

दो महिलाएं अपने वाहन से बाहर आ रही थीं. मैंने उनसे पूछा आप इस परिवार के बारे में जानती हैं?

धनवंती और सावित्री दोनों ने कहा मालूम तो है लेकिन वो उनसे कभी मिली नहीं हैं.

कड़ी से कड़ी सजा

Image caption मिसेज़ सैनी ने कहा कि दोषियों को फांसी न देकर सरे आम उनके हाथ पैर काट देने चाहिए.

मैंने पूछा कि अदालती फ़ैसले के बारे में आपका क्या कहना है ?

धनवंती ने कहा सज़ा ऐसी होनी चाहिए कि लोग याद रखें.

खुद को मिसेज़ सैनी कहकर परिचय देनी वाली एक महिला ने कहा, "अभियुक्तों को फांसी पर लटकाए जाने से अपराधियों में भय कायम नहीं होगा और इसे मामले को जल्दी भुला दिया जाएगा. सरे आम उनके हाथ पैर काट देने चाहिए. उन्हें जान से नहीं मारना चाहिए ताकि ऐसी हरकत करने की कोई हिम्मत न करे"

सुनील नाम के एक लड़के ने कहा कि दोषियों को, "सऊदी अरब के अंदाज़ में सज़ा देनी चाहिए"

आम धारणा

Image caption सुनील का मानना है कि दोषियों को सऊदी अरब के अंदाज़ में सज़ा देनी चाहिए.

यहाँ आम धारणा ये थी कि भविष्य में बलात्कार जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ज़रूरी है कि इस मामले में दोषियों को सार्वजनिक रूप से कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए ताकि ऐसा कुकृत्य करने से पहले लोग हज़ार बार सोचें.

पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्हें दिल्ली सरकार की तरफ से फ्लैट मिला है और अब उनका परिवार बलिया से आकर यहां रहने लगा है.

उन्हें इस बात का अफ़सोस नहीं था कि उन्हें पड़ोसी नहीं पहचानते.

उन्होंने कहा कि अजनबी शहर में अजनबी लोगों के बीच वो भी अजनबी हैं. उन्होंने कहा कि ये उन्हें पसंद है.

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