केदारनाथ में राहत नहीं लेकिन आज से पूजा

केदारनाथ, मंदिर, उत्तराखंड

केदारनाथ मंदिर में बुधवार से फिर पूजा शुरू हो रही है.

16-17 जून को बाढ़ और बारिश की वजह से केदारनाथ में अब भी हालात मुश्किल बने हुए हैं और जीवन पटरी पर नहीं लौटा है.

बड़ी कठिनाई से बिजली पानी की बुनियादी सेवाएं अंतरिम तौर पर बहाल हो पाई हैं और अस्थायी तौर पर शिविर बनाकर एक तरह से पूजा आरंभ करने की औपचारिकता की जा रही है.

हालांकि उत्तराखंड सरकार अब भी ये फ़ैसला नहीं कर पाई है कि आम श्रद्धालुओं के लिए केदारनाथ की यात्रा फिर से कब शुरू होगी.

'पूजा पर सवाल'

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा, “सीमित संख्या में लोग वहां रहेंगे. रावल, शंकराचार्य और मंदिर समिति के लोग और मंत्रिमंडल के कुछ साथी वहां रहेंगे. श्रद्धालुओं के लिए मंदिर कब खुलेगा, ये निर्णय 30 तारीख को होगा व्यवस्था और मौसम देखकर. पूजा दीवाली तक चलेगी और धीरे-धीरे श्रद्धालु भी पहुंचेंगे वहां.”

Image caption मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का कहना है कि केदारनाथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुलने पर फ़ैसला 30 सितंबर को होगा

केदारनाथ में आई आपदा ने जहां हज़ारों लोगों की जान ले ली थी वहीं मंदिर परिसर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ था.

हालांकि मुख्य मंदिर और गर्भगृह लगभग सलामत रहे. ये पहला अवसर था जब असाधारण तबाही की वजह से चार धाम यात्रा के बीच ही केदारनाथ में पूजा बंद हुई.

केदारनाथ का सड़क संपर्क अब भी कटा हुआ है और पूजा के लिए सभी लोग और सामग्री वहां हेलीकॉप्टर से ही भेजे गए हैं क्योंकि पैदल मार्ग अब भी नहीं बन पाया है.

दूसरी ओर केदारनाथ में पूजा की हड़बड़ी को लेकर सरकार की मंशा पर उंगलियां भी उठाई जा रही हैं. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि सरकार को पूजा की जल्दी क्यों है.

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूड़ी ने कहा, “पूजा की बजाय सरकार को पुनर्वास की चिंता करनी चाहिए.”

टूट रहा है सन्नाटा

पूजा शुरू कराने के लिए चुने गए पुरोहितों और उसके तरीके को लेकर भी विरोध हो रहा है.

विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय भट्ट ने कहा, “तीर्थ पुरोहितों को आप नहीं बुला रहे हैं. बिना पुरोहित के तीर्थ नहीं. बिना तीर्थ के पुरोहित नहीं. अब आप उनको आने नहीं दे रहे हैं फिर किसके लिए पूजा हो रही है.”

बहरहाल आपदा की वजह से केदारनाथ का मरघट सा सन्नाटा टूट रहा है लेकिन केदारघाटी में आपदा में मारे गए लोगों के शवों के मिलने का सिलसिला अब भी खत्म नहीं हुआ है.

2 सितंबर को केदारघाटी के दुर्गम पर्वतीय इलाकों में शुरू किए गए खोजी अभियान के दौरान अब तक 185 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है.

ये शव करीब 11 हज़ार फीट से 15 हज़ार फीट की ऊंचाई पर गुंज्यालगिरी, गरूड़चट्टी, देवविष्णु और गोमकारा के बुग्यालों और पहाड़ियों से बरामद हुए.

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि सुरक्षित ठिकानों की तलाश में लोग पहाड़ियों की तरफ भागे होंगे और शायद वहीं राहत के अभाव में भूख-प्यास से इनकी मौत हो गई होगी.

इस बीच केदारनाथ में मौसम अब भी साथ नहीं दे रहा है.

मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में केदारनाथ में बादल छाए रहेंगे और अच्छी-खासी बारिश हो सकती है.

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