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आलोक धन्वाःमुझे पसंद है निराला की 'सरोज स्मृति'

  • 14 सितंबर 2013

मुझे पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता 'सरोज स्मृति' बेहद पसंद है.

'सरोज स्मृति' एक ऐसी मार्मिक शोकगाथा है जिसके भीतर गहरी पीड़ा के साथ संघर्ष भी है.

निराला इस कविता को पिता के रूप में भी रचते हैं और एक कवि के रूप में भी.

निराला कहते हैं -

धन्ये, मैं पिता निरर्थक था, कुछ भी तेरे हित न कर सका! जाना तो अर्थागमोपाय, पर रहा सदा संकुचित-काय लखकर अनर्थ आर्थिक पथ पर हारता रहा मैं स्वार्थ-समर।