कौन हैं बलात्कार और हत्या के दोषी?

  • 13 सितंबर 2013
दिल्ली बलात्कार मामला विरोध

दिल्ली गैंगरेप मामले पर अदालत ने चार दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई है. एक अभियुक्त की मौत हो चुकी है और एक अन्य नाबालिग दोषी को तीन साल की सज़ा पहले ही सुनाई जा चुकी है.

एक नज़र डालते हैं इन छह लोगों पर.

राम सिंह

राम सिंह को इस मामले में मुख्य संदिग्ध बताया गया था. वे इस वर्ष मार्च में तिहाड़ जेल में मृत पाए गए थे.

पुलिस के मुताबिक राम सिंह ने ख़ुद को फांसी लगाई थी लेकिन बचाव पक्ष के वकीलों और उनके परिवार का आरोप था कि राम सिंह की हत्या की गई है.

33 वर्षीय राम सिंह दक्षिण दिल्ली की रवि दास झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी में दो कमरे के मकान में रहते थे. वे उस बस के कथित ड्राइवर थे जिस पर 16 दिसंबर 2012 को 23 वर्षीय युवती का बलात्कार हुआ और उसके दोस्त की पिटाई की गई.

राम सिंह के पड़ोसियों के मुताबिक वे शराब पीकर अकसर झगड़ा करते थे. एक पड़ोसी ने बताया, "राम सिंह हमेशा शराब पीकर झगड़ा करता था लेकिन हमने कभी नहीं सोचा था कि वो बलात्कार जैसा जघन्य अपराध भी कर सकता है."

उनका परिवार 20 साल पहले बेहतर ज़िंदगी की तलाश में राजस्थान के एक गांव से दिल्ली आया था. राम सिंह पांच भाईयों में से तीसरे नंबर पर थे. उन्हें बचपन में स्कूल में डाला गया था लेकिन उन्होंने प्राथमिक स्तर पर ही स्कूल छोड़ दिया था.

बलात्कार मामले में वो पहले व्यक्ति थे जिन्हें गिरफ़्तार किया गया था.

मुकेश सिंह

मुकेश, राम सिंह का छोटा भाई था. वे अपने भाई के साथ रहता था और कभी-कभी बतौर बस ड्रा्इवर और क्लीनर काम करता था.

मुकेश सिंह पर युवती और उसके दोस्त को लोहे की छड़ से पीटने का आरोप था लेकिन उसने आरोप से इनकार किया था.

ख़बरों के मुताबिक अदालत में मुकेश सिंह ने कहा था कि घटना की रात वे बस चला रहा था जबकि बाकि चार लोगों ने युवती के साथ बलात्कार किया और उसके दोस्त की पिटाई की.

मुकेश सिंह के वकील का दावा है कि उनके मुवक्किल को जेल में यातना दी गई लेकिन जेल प्रशासन ने इससे इनकार किया था.

अदालत ने मुकेश सिंह को दोषी माना और मौत की सज़ा सुनाई.

विनय शर्मा

20 साल के विनय शर्मा एक फिटनेस ट्रेनर और जिम असिस्टेंट है. वे भी रवि दास झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी में रहते थे.

पांचो दोषियों में से सिर्फ़ उन्होंने ही स्कूली शिक्षा ली थी और अंग्रेज़ी बोलते हैं.

इस साल गर्मियों में विनय शर्मा ने कॉलेज के पहले साल का इम्तिहान देने के लिए एक महीने की ज़मानत की अर्ज़ी दी थी लेकिन जज ने उसे ठुकरा दिया था. जज ने विश्वविद्यालय अधिकारियों और जेल प्रशासन से जेल के अंदर ही विनय के परीक्षा देने के लिए इंतज़ाम करने का आदेश दिया था.

अदालत में विनय शर्मा ने दावा किया था कि जब ये घटना हुई थी तब वे बस में नहीं थे. उनका दावा था कि वे, एक अन्य आरोपी पवन गुप्ता के साथ एक संगीत कार्यक्रम देखने गए हुए थे.

अक्षय ठाकुर

28 वर्षीय अक्षय ठाकुर बिहार के रहने वाले हैं और वे बस में हेल्पर थे. उन्हें घटना के पांच दिन बाद 21 दिसंबर 2012 को बिहार से गिरफ़्तार किया गया था.

अक्षय पर बलात्कार, हत्या और अपहरण के साथ ही घटना के बाद सबूत मिटाने की कोशिश करने का भी आरोप था.

वे पिछले साल ही दिल्ली आए थे. ख़बरों के मुताबिक वे विवाहित हैं और उनका एक बेटा है. उनका परिवार बिहार के एक गांव में रहता है.

अदालत में अक्षय ठाकुर ने बस में मौजूद होने से इनकार किया था और कहा था कि वे 15 दिसंबर को ही दिल्ली से अपने गांव के लिए रवाना हो गए थे.

पवन गुप्ता

पेशे से फल बेचने वाले 19 साल के पवन गुप्ता ने अदालत में दावा किया था कि बलात्कार के समय वो बस में नहीं थे और विनय शर्मा के साथ संगीत कार्यक्रम सुनने गए हुए थे.

अदालत में बतौर गवाह पेश हुए पवन के पिता हीरा लाल ने कहा था कि उनका बेटा बेक़सूर है और उसे मामले में ''फंसाया'' गया है.

हीरा लाल ने कहा था कि घटना वाले दिन उनका बेटा दोपहर को दुकान बंद कर घर चला गया था और शराब पीकर और खाना खाकर वह पास के पार्क में एक संगीत कार्यक्रम सुनने चला गया.

पवन के पिता का कहना था कि वे अपने एक रिश्तेदार के साथ जाकर पवन को पार्क से घर लेकर आए थे.

नाबालिग दोषी

छठा दोषी घटना के समय 17 साल का था इसलिए उस पर बतौर नाबालिग मुकदमा चलाया गया.

31 अगस्त 2013 को नाबलिग को बलात्कार और हत्या का दोषी पाया गया और उसे एक सुधार गृह में तीन साल की सज़ा हुई. भारतीय कानून के तहत किसी भी नाबालिग को दी जाने वाली ये सज़ा की सबसे ज़्यादा मियाद है.

नाबालिग उत्तर प्रदेश के एक गांव का रहना वाला था और वे 11 साल की उम्र में दिल्ली आ गया था जहां वो अकेला रहता था.

उसकी मां ने बीबीसी को बताया था कि उसकी अपने बेटे से आखिरी बार तब बात हुई थी जब वो दिल्ली की बस में सवार हुआ था. मां का कहना था कि जब तक दिसंबर 2012 में पुलिस ने उनके घर आकर उन्हें नहीं बताया था कि वे बलात्कार मामले में आरोपी है, तब तक उन्हें लगता था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है.

नाबालिग का परिवार गांव के सबसे ग़रीब परिवारों में से है. उसके पिता मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं. नाबालिग की मां का कहना है कि उन्होंने बेटे को दिल्ली ये सोच कर भेजा था कि वो बढ़िया कमाई कर अपने परिवार की ग़रीबी दूर कर सकेगा.

परिवार का कहना है कि नाबालिग ने कुछ साल पैसा भेजा और फिर वो ग़ायब हो गया. लेकिन मां का दावा है कि, "वो एक संवेदनशील लड़का है और गांव में किसी का सामना करने से डरता था. मुझे यक़ीन है कि वो दिल्ली में ग़लत संगत में पड़ गया और उसे इस शर्मनाक कृत्य के लिए उकसाया गया था."

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