फाँसी पर बहस: क्या मौत देने से बच सकती हैं ज़िंदगियाँ

  • 13 सितंबर 2013

दिल्ली गैंगरेप केस में सज़ा के ऐलान से पहले ही यह बहस तेज़ हो गई है कि बलात्कारियों को फांसी की सज़ा होनी चाहिए या नहीं. गृह मंत्री से लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने फांसी की मांग की है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या महिलाओं के आत्म सम्मान को कुचलने वाले इस अपराध को फांसी की सजा देकर रोका जा सकता है?

और अगर रोका जा सकता है तो कितनों को फांसी दी जाएगी. केवल झारखंड में ही पिछले सात महीनों के दौरान बलात्कार के 818 मामले दर्ज किए गए हैं.

वर्मा कमेटी ने भी बलात्कारियों के लिए फांसी की सज़ा की सिफारिश नहीं की थी. कई वरिष्ठ वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वो फांसी की सज़ा के खिलाफ हैं.

वहीं दिल्ली गैंगरेप पीड़ित की मां का कहना है कि बलात्कारियों को फांसी की सज़ा मिलनी चाहिए.

बीजेपी नेता सुषमा स्वराज और मीनाक्षी लेखी ने भी कुछ ऐसी ही मांग की है.

प्रशांत भूषण, वरिष्ठ वकील और आम आदमी पार्टी नेता

हम फांसी की सज़ा के खिलाफ हैं. हम तो कह रहे हैं कि किसी को भी नहीं होनी चाहिए.

प्रशांत भूषण कहते हैं कि किसी को भी फांसी की सज़ा नहीं होनी चाहिए.

इससे हिंसा और बढ़ती है इसलिए ज़्यादातर सभ्य देशों ने इसे ख़त्म कर दिया है.

सभी के मानवाधिकार होते हैं और बलात्कारियों के भी मानवाधिकार होते हैं.

रंजना कुमारी, सामाजिक कार्यकर्ता

अभी तक देश का जो क़ानून है, उसमें एक बात स्पष्ट है कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ और उसकी हत्या कर दी गई तो उसमें फांसी की सज़ा ही निहित है.

वर्मा आयोग की रिपोर्ट में भी ये बात साफ़ तौर पर कही गई थी कि बलात्कार के बाद लड़की वेजीटेटिव स्टेट में है या उसकी हत्या हो गई है तो फांसी की सज़ा होनी चाहिए.

मैं यह भी कहना चाहूंगी कि देश में 90 हज़ार बलात्कार के मामले लंबित हैं तो क्या आप उन सभी मामलों में फांसी की सज़ा देंगे. ऐसा किसी लोकतांत्रिक देश में संभव नहीं है और होना नहीं चाहिए.

मेरी निजी राय तो यह है कि इन सारे लोगों को खड़ा कर दें तो मैं खुद गोली मार दूं लेकिन लोकतंत्र, कानून के तहत चलने वाले देशों में यह संभव नहीं है इसलिए ज़रूरी है कि कड़ी से कड़ी सज़ा जो संभव हो वो दी जाए.

जिस तरह से इन लोगों ने उस लड़की के शरीर में रॉड घुसाया, तो इस तरह के अपराधी को क्या न्याय मिलेगा.

सहजो सिंह, ऐक्शन एड

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने बलात्कारियों को फांसी देने की मांग की है.

बलात्कारियों को फांसी की सज़ा बिलकुल नहीं होनी चाहिए. एक मानवाधिकार की रक्षा दूसरे मानवाधिकार के हनन से नहीं की जा सकती.

हम लोग फांसी की सज़ा पर रोक के पक्ष में हैं. हमने इस मसले को जनता के बीच ले जाने की कोशिश की.

हम लोग बार-बार ज़ोर देते हैं कि बलात्कार दमन का एक तरीका है इसलिए जो लोग दमन के सबसे ज़्यादा शिकार होते हैं उनके लिए भी यह न्याय मांगने का ज़रिया बनना चाहिए.

हमारी जो संवेदनशीलता है क्या वो इन लोगों के लिए भी जागी है जो असुरक्षित हैं या सिर्फ़ उनके अधिकार सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं, जो ज़्यादा सुरक्षित हैं.

अंजलि गोपालन, डायरेक्टर, नाज़ फाउंडेशन

मुझे नहीं लगता कि फांसी की सज़ा कोई सज़ा होती है. मुझे लगता है कि वो ज़िंदगी भर जेल में रहें और उन्होंने जो किया है वो भुगतें, वो ज़्यादा बेहतर है.

वैसे भी मुझे सज़ा-ए-मौत से समस्या है. मुझे नहीं लगता कि उससे कोई फ़ायदा होता है.

जिसने कोई गलती की है, वह अगर ज़िंदगी भर जेल में रहे, तो अच्छा रहेगा.

मीनाक्षी लेखी, प्रवक्ता, बीजेपी

ऐसे तमाम मुद्दों में जहां महिला के साथ न केवल बलात्कार हुआ है बल्कि जहां वो ज़िंदगी ढंग से नहीं जी पाएगी, ऐसे सभी मामलों में मृत्युदंड होना चाहिए.

मेरे हिसाब से इन चारों दोषियों को मृत्युदंड होना चाहिए. जहां बलात्कार के बाद हत्या कर दी जाए अगर वो दुर्लभ से दुर्लभ मामला नहीं है तो और क्या होगा.

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