सूचना छिपाने पर चुनाव नामांकन रद्द: सुप्रीम कोर्ट

  • 14 सितंबर 2013
सुप्रीम कोर्ट (फ़ाइल)
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने कहा सूचना छिपाना वोटरों के मौलिक अधिकारों का हनन है.

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सूचना छिपाने और उसे दबाने की कोशिश करने की स्थिति में चुनाव आयोग के रिटर्निंग अफ़सर किसी चुनावी उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर सकते है.

अदालत के मुताबिक़ इस तरह की सूचना में संपत्ति, आपराधिक मुक़दमे समेत दूसरी सूचनाएं शामिल हो सकती हैं.

अदालत का कहना था कि उम्मीदवार के बारे में जानकारी हासिल कर पाना वोटरों का मौलिक अधिकार है और नामांकन पत्र में कॉलम को ख़ाली छोड़ देना उस अधिकार का हनन है.

मुख्य न्यायधीश पी सथासिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा है कि रिटर्निंग अफसरों को इस अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए.

जनहित याचिका

कोर्ट ने ये आदेश एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिए.

साल 2008 में दाख़िल जनहित याचिका में रिसर्जेंस इंडिया नाम की स्वंयसेवी संस्था ने कहा था कि उम्मीदवार नामांकन पत्र में ज्यादातर उन कॉलमों को ख़ाली छोड़ देते हैं जिसमें उन्हें अहम सूचना देनी होती है.

चुनाव आयोग ने भी याचिका का समर्थन किया था. आयोग का कहना था कि कॉलम ख़ाली छोड़ देने का मतलब है सूचना को छिपाना.

आयोग का ये भी कहना था कि रिटर्निंग अफ़सरों को इस बात का अधिकार दिया जाना चाहिए कि वो उन उम्मीदवारों के नामांकन को रद्द कर दें जो नामांकन पत्र में पूरी सूचना मुहैया नहीं करवाते.

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