मोदी पर जो हमने कहा, सच साबित हुआ: नीतीश

भाजपा
Image caption मोदी को बनाया गया प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार

भाजपा ने नरेन्द्र मोदी को अगले लोकसभा चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है. मगर वह इस मुद्दे पर अपने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की नाराज़गी को अभी तक दूर नहीं कर पाई है.

भाजपा के भीतर इस तरह के जो हालात बने हैं उस पर अलग अलग पार्टियों के नेताओं के कई तरह के बयान आ रहे हैं.

दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता

संघ के दबाव में निर्णय हुआ है और फिर से ये बात प्रमाणित हो गई है कि भाजपा कुछ नहीं है, जो कुछ है संघ ही है.

रविशंकर प्रसाद, भाजपा

दिग्विजय सिंह कुछ न कुछ बोलते रहते हैं. दिग्विजय सिंह के बारे में मेरा एक ही जवाब होता है जिन्हें उनकी पार्टी गंभीरता से नहीं लेती है, जिन्हें बार बार चुप कराना पड़ता है, जिनको देश गंभीरता से नहीं लेता, उन्हें मैं क्यों गंभीरता से लूं.

ये वही दिग्विजय सिंह हैं जिन्होंने कहा था कि आजमगढ़ की घटना फर्जी है. बाद में कोर्ट ने आतंकवादी पाया. इसीलिए वे जो भी बोलते हैं बोलें.

देश नरेंद्र मोदी को चाहता है उनकी नेतृत्व क्षमता और सुशासन के कारण. सारे सर्वे में नरेंद्र मोदी 46-47 फीसदी हैं, राहुल गांधी कहां हैं? दिग्वियज सिंह और कांग्रेस की ये खीझ है. हमें इससे परेशान नहीं होना है."

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार

जो भी हुआ है, उसके बाद हमारे तीन महीने पुराने रुख की पुष्टि होती है. जो हम लोगों ने कहा, वो सब सच साबित हुआ. हम लोगों को इसकी आशंका थी. चूंकि हम लोगों को ये मंजूर नहीं था इसीलिए हमने उनसे नाता तोड़ लिया. और एनडीए से हम अलग हो गए.

एमजी वैद्य, आरएसएस नेता

जो भी निर्णय हुआ वो संसदीय बोर्ड ने लिया है. चूंकि बीजेपी (और) सामान्यतः संघ से स्वीकृति पाकर चलने वाली संस्थाएं जनतंत्र का आदर करने वाली हैं.

इसलिए बहुमत से निर्णय लिया गया. लेकिन किसी की और कुछ राय हो सकती है. उसे दिखाने का कुछ भी तरीका हो सकता है.

सभा में यदि आडवाणी आते तो भी वे विरोध करते. नहीं आकर उन्होंने अपना विरोध जता दिया, ये उनका अधिकार है.

व्यक्तिगत अभिमत कुछ भी हो, बहुमत का निर्णय होने के कारण पार्टी के सभी लोग इसको मानेंगे."

गुलाम नबी आजाद, केंद्रीय मंत्री

ये बीजेपी का अंदरूनी मामला है. नाम सिंकदर रखने से वक्ते-सिंकदर हो न सका.

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