ऑनर किलिंग: 'हमारी औरतें पर्दे में ही भली'

  • 20 सितंबर 2013

दिल्ली की एक चौड़ी सड़क पर एक युवती और एक युवक एक दूसरे से चिपक कर मोटर साइकिल पर सवार अपनी मंज़िल को जा रहे हैं.

लगभग 100 किलोमीटर दूर रोहतक ज़िले का घरणौती गाँव उनके लिए विदेश की तरह है.

इस गाँव में लड़कों और लड़कियों के बीच इस तरह की नज़दीकी मौत को निमंत्रण देने के समान है.

यहाँ की एक युवती निधी और युवक धर्मेन्द्र ने एक दूसरे से प्रेम करने की जुर्रत की लेकिन उन्हें अपनी ज़िन्दगी से हाथ धोना पड़ा

निधी की चिता पर आग लगाने के बाद उसके एक चाचा ने मुझसे कहा, "जो काम किया गया है बहुत अच्छा किया गया है. इससे एक सबक़ मिलेगा".

निधी के चाचा का इशारा उसकी और धर्मेन्द्र की हत्या की तरफ़ था जो पुलिस के अनुसार बुधवार की शाम निधी के घर पर की गई.

चिता के आसपास लगभग 20 मर्द इकट्ठा थे. निधी और धर्मेन्द्र दोनों के रिश्तेदार मौजूद थे. एक बुज़ुर्ग ने कहा, "उन्हें बहुत बार समझाया गया. एक हज़ार बार समझाया गया, आख़िर नहीं समझ में आया. पता नहीं कैसी बुद्धि हो जाती है बच्चों की."

बग़ल में खड़े एक और आदमी ने कहा, "हमारे समाज में ये नहीं चलता. प्रेम करना शहरों की संस्कृति है, हमारी औरतें पर्दे में रहती हैं."

ये तो थे निधी और धर्मेंद्र के बुज़़ुर्ग रिश्तेदार. हमने निधी के एक युवा चचेरे भाई से पूछा, आपके विचार बुज़ुर्गों से अलग हैं?, तो उनका कहना था, "वो एक ही जात के थे. भाई-बहन की तरह थे. जो ग़लत है वो ग़लत है"

मुझे गाँव के इन लोगों के चेहरों पर दर्द और ग़म नहीं दिखा. उनमें से एक ने कहा, "कौन अपने बच्चों को मारना चाहता है लेकिन भगवान ने जो लिखा था वो हो गया."

'जो हो गया सो हो गया', ये आम धारणा थी गाँव मे. और लगभग सभी गाँव वाले दोनों की हत्या का समर्थन करते हैं.

अभी चिता ठीक से जली भी नहीं थी कि सभी वहां से उठे और अपने घरों की ओर चल दिए.

इनके गाँव में ख़ुशहाली है. निधी का एक रिश्तेदार जापानी गाड़ी टोयोटा में आया था. उसकी पोशाक शहर में रहने वालों जैसी थी. मैंने पूछा, आप तो इन दोहरी हत्याओं का खंडन कर रहे होंगे? उन्होंने कहा, "नहीं, हमारे गाँव में ये सब चीज़ें स्वीकार नहीं करते. ग़लत हुआ है ये. इन बच्चों को ऐसा करना ही नहीं चाहिए था."

हत्या

Image caption लड़के की चिता

अच्छी सड़क और पक्के मकानों के इस गाँव में ख़ुशहाली साफ़ नज़र आती थी. यहाँ आधुनिक संस्कृति की झलक भी दिखती है. ट्रैक्टरों और साइकिलों से अधिक मोटर साइकिलें और कारें नज़र आती हैं.

गाँव के लोग अपनी ग्रामीण और प्राचीन संस्कृति को शहरी रहन-सहन के असर से बचाने के लिए "जान दे भी सकते हैं और ले भी सकते हैं."

यही हाल किया गया बुधवार की रात निधी और उनके प्रेमी धर्मेन्द्र का. दोनों दो साल से एक दूसरे से प्रेम करते थे और शादी करना चाहते थे. अपने रिश्तेदारों से ख़ौफ़ खाकर वो मंगलवार को दिल्ली फ़रार हो गए. लेकिन दोनों के परिवार वाले उन्हें अगले दिन गाँव वापस बुलाने में कामयाब हो गए.

रोहतक के पुलिस अधिकारी राजेश दुग्गल ने बताया कि धर्मेन्द्र के हाथ पैर काट दिए गए, इसके इलावा उसकी गर्दन भी धड़ से अलग कर दी गई. उसकी हत्या से पहले निधी की बेरहमी से पिटाई की गई और उस वक़्त तक की गई जब तक कि उनकी मौत नहीं हो गई.

पुलिस इसे ऑनर किलिंग यानि इज़्ज़त के नाम पर की गई हत्या का मामला समझ रही है. पुलिस अधिकारी कहते हैं कि लड़के के रिश्तेदारों ने जब लड़की वालों के ख़िलाफ़ शिकायत नहीं दर्ज कराई तो वो ऑनर किलिंग की लाइन पर मामले की जांच करने पर मजबूर हो गए.

पुलिस ने निधी के माँ-बाप और एक चाचा को गिरफ़्तार कर लिया है और उनके ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज किया है.

गाँव के एक और आदमी को भी गिरफ़्तार किया गया है. मैंने जब पुलिस अधिकारियों से पूछा कि लड़के वालों के रिश्तेदार भी हत्या के समय मौजूद थे तो उन्हें अब तक क्यूँ गिरफ़्तार नहीं किया गया तो उनका कहना था कि अभी कई गिरफ़्तारियां होनी बाक़ी हैं.

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