रिज़र्व बैंक क्या आम आदमी को राहत पहुंचाएगा?

  • 20 सितंबर 2013

रिज़र्व बैंक के गर्वनर से उम्मीदें बहुत हैं.

उम्मीदें इसलिए हैं कि नाउम्मीदी के लंबे दौर से गुजरी अर्थव्यवस्था को तिनके का सहारा भी बहुत लग रहा है, क्योंकि हाल तक वह अर्थव्यवस्था डूबती हुई ही दिख रही थी. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आम आदमी इस पॉलिसी से क्या उम्मीद कर सकता है.

जानिए क्या है मौद्रिक समीक्षा

मकान का कर्ज़ सस्ता होगा क्या?

मकान का कर्ज़़ सस्ता होना इस बात पर निर्भर करता है कि रिज़र्व बैंक ब्याज दर को नीचे गिरते हुए देखना चाहता है या नहीं. रिज़र्व बैंक अपने कदमों से अगर ये संकेत दे कि ब्याज दर कम होनी चाहिए, तो बैंक मकान के कर्ज़ की दर कम करने की दिशा में पहल कर सकते हैं.

हाल तक रिज़र्व बैंक का रुख यह रहा था कि अर्थव्यवस्था महंगाई से जूझ रही है, इसलिए ब्याज दर कम नहीं होनी चाहिए. ब्याज दर कम होने से महंगाई बढ़ सकती है. पर नए गवर्नर शायद कुछ नई तरकीब निकालें और मकान के लिए फाइनेंस करने वाले बैंकों को कुछ विशेष रियायते दें.

बैंकों के शेयर इस उम्मीद में हाल में तेजी से ऊपर चढ़े हैं. मकान का कर्ज़ सस्ता हुआ तो मकान खरीदने वालों की तादाद बढ़ने से कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री, हाऊसिंग इंडस्ट्री की हालत सुधरने की उम्मीद बंधेगी.

मकान का कर्ज़ सस्ता हो या ना हो, पर अब उसके महंगे होने की आशंका नहीं है. रिज़र्व बैंक के गर्वनर के आशावादी कदमों से बाजार में यह उम्मीद तो बन गयी है.

कार-बाइक का लोन सस्ता होगा?

कार-टू व्हीलर कंपनियां विकट हालत में हैं. बढ़ते डीजल-पेट्रोल के भाव कार-टू व्हीलर कंपनियों के ग्राहकों को दूर धकेल रहे हैं. फिर कार तो अधिकांश लोन-ईएमआई पर खरीदी जाती है. हाल के सालों में ईएमआई बहुत तेजी से बढ़ी, तो कार-बाइक के खरीदार कम हुए.

आटोमोबाइल इंडस्ट्री उम्मीद कर रही है कि रिज़र्व बैंक ब्याज दरों में कटौती की स्थितियां बनायेगा.

यहां भी वही बात लागू होती है कि कार-बाइक का लोन सस्ता भले ही ना हो, पर निकट भविष्य में उसके और महंगे होने की आशंका कम हो गई है.

रिज़र्व बैंक के तरकीब-औजार

नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) और वैधानिक तरलता अनुपात या स्टेटूटरी लिक्विडिटी रेशो में रिज़र्व बैंक बढ़ोतरी करके यह संकेत देता है कि बैंकों के पास अपने हिसाब से कारोबार करने के लिए रकम कम बचेगी और इसलिए ब्याज दर ऊपर की ओर जायेगी.

बाकी तमाम दरों में बढ़ोत्तरी का मतलब भी यही लगाया जाता है कि रिज़र्व बैंक चाहता है कि ब्याज दर ऊपर जाये. इस संकेत का मतलब यह कि ब्याज दर बढ़ेंगी और हाहाकार बढ़ेगा. ऐसा हाहाकार झेलने की स्थिति में अर्थव्यवस्था नहीं है.

फिलहाल कैश रिज़र्व रेशो चार प्रतिशत है और स्टेटूटरी लिक्विडिटी रेशो 23 प्रतिशत है. इनमें किसी परिवर्तन के गहरे अर्थ-आशय होंगे.

नए करतब-नई तरकीबें

रिज़र्व बैंक के नए गवर्नर पुराने बने रास्तों पर ही चलें ऐसा नहीं है. अब तक के संक्षिप्त कार्यकाल में विदेशी मुद्रा जुगाड़ने के लिए जो तरकीबें उन्होने पेश की हैं, उनसे साफ होता है कि वह नये रास्ते और तरकीब निकाल सकते हैं.

सो कुल मिलाकर इस मौद्रिक नीति से उम्मीद है मकान, कार, बाइक के लिए कर्ज़ महंगा ना हो, या फिर सस्ते होने की कोई नई राह खुले.

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