बीसीसीआई: श्रीनिवासन अदालत के अड़ंगे के बावजूद मैदान में

  • 29 सितंबर 2013
एन श्रीनिवासन
Image caption कई विवादों में घिरे हैं एन श्रीनिवासन

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की रविवार को चेन्नई में होने वाली बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं.

बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष का चुनाव होना है और विवादों में घिरे बीसीसीआई प्रमुख एन श्रीनिवासन एकमात्र उम्मीदवार हैं. ऐसे में इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि वे निर्विरोध चुने जा सकते हैं.

लेकिन अध्यक्ष चुने जाने के बावजूद कुछ समय तक श्रीनिवासन कार्यभार नहीं संभाल सकेंगे.

दरअसल बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ने श्रीनिवासन को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मुक़दमा किया है. शुक्रवार को कोर्ट ने श्रीनिवासन को चुनाव लड़ने की इजाज़त तो दे दी लेकिन साथ ही ये भी निर्देश दिया कि अगले आदेश तक वे कार्यभार नहीं संभाल सकते.

इसके अलावा श्रीनिवासन आईपीएल-6 में चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक हैं. उनके दामाद गुरूनाथ मयपन्न पर आईपीएल मैचों में सट्टेबाजी के आरोप है.

मयप्पन का नाम सामने आने के बाद एन श्रीनिवासन ने अध्यक्ष के रूप में नियमित कामकाज से अपने को अलग कर लिया है. उनकी जगह ये कामकाज जगमोहन डालमिया देख रहे हैं.

'विरोध नहीं'

माना जा रहा है कि बोर्ड के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने ऐसी चाल चली कि उनके विरोधी ऐसे ढेर हुए जैसे शतरंज के प्यादे.

हालांकि उनके विरोधी आरोप लगाते हैं कि वो दो बार से अपने रुतबे और पैसे के दम पर बीसीसीआई प्रमुख का पद हासिल कर रहे हैं और अपनी मर्जी से उसे चला रहे हैं.

जिस तरह से बीसीसीआई ने पिछले दिनों आईपीएल के पूर्व कमिशनर ललित मोदी को पूरी तरह से अपने रास्ते से हटाया और जिस तरह से एन श्रीनिवासन बोर्ड के अध्यक्ष बनना चाहते है उससे एक बात तो तय है कि वह अच्छी तरह जानते है कि बीसीसीआई की गाड़ी को कैसे चलाया जाए.

केंद्रीय मंत्री और बीसीसीआई के पदाधिकारी राजीव शुक्ला और अरुण जेटली भी श्रीनिवासन का खुलकर विरोध नही कर पाते.

'ये कैसा बोर्ड है'

जाने-माने क्रिकेट विश्लेषक प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, “मेरी तो समझ में ही नही आ रहा है कि यह कैसा बोर्ड है जो भारत के सबसे बड़े कोर्ट का ही सुझाव नही मान रहा है. अगर जेटली और शुक्ला जैसे बोर्ड के पदाधिकारी श्रीनिवासन को समझा नही पा रहे है, रोक नही पा रहे है तो फिर इस बोर्ड की कार्यशैली कैसी है और कैसे यह काम करता है.”

प्रदीप मैगजीन कहते हैं, “अब यह भी समझ से परे है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपने अधिकारों का इस्तेमाल नहीं करने के आदेश दिए है तो फिर इस सालाना बैठक को क्यों रद्द नही किया गया. अब अगर जीतने के बाद श्रीनिवासन के पास कोई अधिकार नही होगा तो बोर्ड क्यों दूसरा अध्यक्ष नहीं चुनता या फिर कोर्ट के अगले आदेश तक जगमोहन डालमिया को ही अंतरिम अध्यक्ष बने रहने देता.”

Image caption श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन पर आईपीएल 6 में सट्टेबाज़ी का आरोप है.

प्रदीप मैगज़ीन आगे कहते है कि ऐसे में अगर रविवार को श्रीनिवासन अध्यक्ष बन गए तो फिर सोमवार को आने वाला सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला बेहद अहम हो सकता है.

मैगजीन कहते हैं, “अब जहां तक खिलाडियों की बात है तो उन्हे पेंशन से लेकर गवर्निंग कांउसिल का सदस्य तथा कमेंटेटर के रूप में करोड़ों रुपए मिलते है तो वह बोर्ड के ख़िलाफ़ क्यों बोले, लेकिन यह बड़े दुख की बात है कि एक तरफ हिंदुस्तान की क्रिकेट तरक्की कर रही है तो दूसरी तरफ बोर्ड के काम में किसी तरह की नैतिकता और पारदर्शिता नही है.”

फेरबदल

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शुक्रवार को बीसीसीआई के मध्य ज़ोन के उपाध्यक्ष सुधीर डाबिर और पश्चिम ज़ोन के उपाध्यक्ष निरंजन शाह को उनके पदों से हटा दिया गया हालांकि दोंनो के कार्यका्ल बढ़ाया जा सकता था.

वहीं बोर्ड के एक और उपाध्यक्ष, अरुण जेटली ने अपनी राजनीतिक ज़िम्मेदारियों का हवाला देते हुए पद छोड़ दिया है.

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि सावंत अब पश्चिम ज़ोन के और कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला मध्य ज़ोन के उपाध्यक्ष बने हैं. वहीं डीडीसीए के स्नेह बंसल ने अरुण जेटली की जगह ली है.

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