कश्मीर का हल शिमला समझौते के तहत: मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की इस मांग को नकार दिया कि कश्मीर मुद्दे का हल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत किया जाए.

उन्होंने कहा कि भारत सभी मुद्दों का समाधान सिर्फ शिमला समझौते के तहत चाहता है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि विकास की दिशा में आतंकवाद सबसे बड़ी बाधा है और सीमा पार से आतंकवाद को और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

इससे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के अनुरूप हल करने की बात कही थी.

मनमोहन सिंह का कहना था कि वह कश्मीर से संबंधित मामलों को हल करने का समर्थन करते हैं लेकिन उनका यह भी कहना था कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर किसी प्रकार का समझौता हो ही नहीं सकता.

शिमला समझौता

मनमोहन सिंह ने कहा, ''भारत पाकिस्तान के साथ जम्मू और कश्मीर सहित तमाम मुद्दे शिमला समझौते के तहत द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता है.''

अपने संबोधन में मनमोहन सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया को भी आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट होकर लड़ना होगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जम्मू-कश्मीर के मामले में फिलहाल कोई बात नहीं होगी.

उन्होंने ये भी कहा कि फिलहाल, पकिस्तान आतंकवाद का केंद्र बना हुआ है और उसे आतंक को बढ़ावा देने की अपनी आदत पर लगाम लगाना होगा.

आतंकवाद वैश्विक ख़तरा

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि आतंकवाद हर जगह सुरक्षा और स्थायित्व के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है और दुनियाभर में इसकी वजह से बहुत सी जानें जाती हैं.

प्रधानमंत्री रविवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से मुलाकात करेंगे. इससे पहले शुक्रवार को ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात के तुरंत बाद मनमोहन सिंह महासभा के सत्र में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क रवाना हो गए थे.

मनमोहन सिंह ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में ओबामा से मुलाकात की. यह करीब तीन साल बाद उनकी पहली द्विपक्षीय वार्ता थी.

ओबामा से मुलाकात के बाद मनमोहन सिंह ने कहा कि रविवार को नवाज़ शरीफ़ से होने वाली मुलाकात को लेकर ज़्यादा अपेक्षाएं नहीं करनी चाहिए क्योंकि पाकिस्तान अभी भी 'आतंकवाद का केंद्र' बना हुआ है.

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