देश को डर्टी टीम नहीं ड्रीम टीम चाहिए: मोदी

नरेंद्र मोदी, दिल्ली, रैली, जापानी पार्क

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली में अपनी रैली के दौरान गांधी परिवार, दिल्ली की कांग्रेस सरकार और केंद्र की यूपीए सरकार पर जमकर कटाक्ष किए.

एक घंटे चले इस भाषण में मोदी ने प्रधानमंत्री को भी कटघरे में लिया और देश की सरकार बदलने की मांग की.

रैली में पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी मौजूद नहीं थे.

मोदी ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यूपीए सरकार उन्हीं विभागों में अच्छा कर रही है जो राज्यों के हवाले हैं और राज्यों के विकास का जोड़ लगाकर वह ख़ुद वाहवाही लूटती है.

पीएम पर निशाना

मोदी का आरोप था कि यूपीए सरकार की प्राथमिकताएं ग़रीब विरोधी हैं.

उन्होंने उड्डयन मंत्रालय का हवाला देते हुए कहा, ‘एविएशन में सरकार ने 31 हज़ार करोड़ का पैकेज दिया है.’

मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर अमरीका में देश की ग़रीबी की मार्केटिंग करने का आरोप लगाया.

उनका कहना था, ‘अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा के सामने 125 करोड़ के देश के प्रधानमंत्री गिड़गिड़ाते हैं और कहते हैं कि मैं ग़रीब देश का प्रधानमंत्री हूं.’

मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की ओर से कुछ पत्रकारों के सामने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कथित तौर पर "देहाती औरत" कहने का आरोप लगाया.

मोदी का कहना था कि पत्रकारों से अपेक्षा थी कि वो नवाज़ शरीफ़ के सत्कार को ठुकरा कर चल देते. उनका कहना था, "हमारे राजनीतिक विरोध हैं, वैचारिक विरोध हैं. हम लड़ेंगे घर में, पर दुनिया के किसी देश को हमारे देश पर उंगली उठाने का अधिकार नहीं."

मोदी का आरोप था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उनकी ही पार्टी में इज़्ज़त नहीं रह गई है.

उन्होंने कहा, "आज देश में परिवारशाही और लोकशाही के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया है. परिवारशाही लोकशाही का गला घोंटने पर उतारू है. अब देश की जनता को फ़ैसला करना है कि यह देश संविधान के अनुसार चलेगा या शहज़ादे की इच्छा के अनुसार चलेगा. शहज़ादे की बीन पर चलेगा."

'ड्रीम टीम चाहिए'

मोदी का कहना था, ‘दस साल से देश यूपीए को झेल रहा है. दिल्ली में हमने डर्टी टीम के कारनामे देखे हैं. देश को ड्रीम टीम चाहिए न कि डर्टी टीम.’

मोदी ने प्रधानमंत्री से मांग की कि वो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के दौरान सीमा पर भारतीय सैनिकों की हत्या, पाकिस्तानी कश्मीर के भारत में विलय और आतंकवाद के मुद्दों को उठाएं.

मोदी ने यह भी कहा कि कुछ साल बाद देश की आज़ादी की 75वीं सालगिरह मनाई जाएगी. उन्होंने लोगों से पूछा, ‘हमें तय करना है कि हम देश को अमृत महोत्सव तक पहुंचते-पहुंचते कहां से कहां तक ले जाना चाहते हैं.’

रैली में आए लोगों का आभार जताते हुए मोदी ने ख़ुद के बारे में कहा, ‘बचपन में जो इंसान रेल के डिब्बे में चाय बेचकर गुज़ारा करता था, ऐसे ग़रीब परिवार के बच्चे को आज आपने यहां बिठा दिया है. मैं मन से न कभी शासक था, न शासक हूं और न शासक बनने के सपने देखता हूं.’

'मां-बेटे-दामाद की सरकार'

उन्होंने कांग्रेस को लक्ष्य कर यह भी कहा, ''अकेले दिल्ली में कई सरकारें हैं. एक मां की सरकार है, एक बेटे की नई सरकार है, एक दामाद की सरकार है.''

अपने भाषण में मोदी ने भ्रष्टाचार, कथित कॉमनवेल्थ घोटाले और दिल्ली के बलात्कार कांड का हवाला भी लिया और कांग्रेस सरकारों की कार्यशैली पर उंगली उठाई.

कॉमनवेल्थ खेलों में कथित घोटाले को लेकर उनका कहना था, ‘हमें अच्छा अवसर मिला था, जिसे हमने गंवा दिया. यह डाका तिजोरी पर ही नहीं, उन्होंने हिंदुस्तान के भाग्य पर ताला लगा दिया है.’

मोदी के भाषण में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी निशाने पर रहीं. उनका आरोप था कि ‘दिल्ली की मुख्यमंत्री के पास रिबन काटने के सिवा कोई काम नहीं है. यह शायद अकेली मुख्यमंत्री हैं, जो हर गड़बड़ी की ज़िम्मेदारी दूसरों पर डाल देती हैं.''

मोदी की दिल्ली में यह पहली रैली थी. रैली के दौरान हज़ारों लोग पहुंचे.

रैली को पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, नवजोत सिंह सिद्धू और स्थानीय नेताओं ने भी संबोधित किया.

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