चारा घोटालाः कब क्या हुआ?

लालू प्रसाद यादव
Image caption चारा घोटाले के कारण लालू प्रसाद यादव को 1997 में बिहार के मुख्यमंत्री की पद छोड़ना पड़ा था

सीबीआई की विशेष अदालत ने बिहार के 'चारा घोटाले' में 17 साल बाद सोमवार को फ़ैसला सुना दिया है.

अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव समेत 45 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है.

यह मामला सबसे पहले 27 जनवरी, 1996 को पश्चिम सिंहभूम ज़िले के चायबासा में पशुधन विभाग पर मारे गए एक छापे के बाद सामने आया.

पता चला कि 90 के दशक में बिहार (तब झारखंड भी शामिल) में पशुचारा आपूर्ति करने के नाम पर ऐसी कंपनियों को सरकारी कोषागार से धनराशि जारी की गई जिनका अस्तित्व ही नहीं था.

राबड़ी देवी भी सहअभियुक्त

पटना हाईकोर्ट ने 11 मार्च, 1996 को 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले की जाँच सीबीआई को स्थानांतरित करने के आदेश दिए.

सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च को पटना हाईकोर्ट के फ़ैसले की पुष्टि की और अदालत की दो सदस्यों की बेंच को मामले पर नज़र रखने को कहा.

सीबीआई ने 10 मई, 1997 को राज्यपाल से लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ मुक़दमा चलाने की अनुमति मांगी.

राज्यपाल ने 17 जून, 1997 को लालू प्रसाद यादव और अन्य के ख़िलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी.

सीबीआई टीम ने 21 जून, 1997 को लालू प्रसाद यादव और उनके रिश्तेदारों के घरों पर छापा मारा.

सीबीआई ने 23 जून, 1997 को लालू और अन्य 55 लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाखिल किया.

इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120 (बी) (आपराधित षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (बी) के तहत 63 केस दर्ज किए गए.

सीबीआई के विशेष न्यायालय ने जुलाई 1997 में लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया.

लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया और 27 जुलाई, 1997 को अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनवा दिया.

लालू प्रसाद यादव 30 जुलाई, 1997 को सीबीआई कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

लालू प्रसाद यादव के खिलाफ़ 19 अगस्त, 1998 को आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया.

चार अगस्त, 2000 को राबड़ी देवी को भी लालू प्रसाद यादव के साथ आय से अधिक संपत्ति मामले में सह अभियुक्त बनाया गया.

पांच अगस्त, 2000 को दोनों ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया. राबड़ी देवी को ज़मानत मिल गई और लालू प्रसाद यादव को जेल जाना पड़ा.

10 मई, 2000 को पटना हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को अस्थाई ज़मानत दे दी जो 25 बार बढ़ाई गई.

Image caption बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को भी चारा घोटाले में दोषी ठहराया गया है

नौ जून, 2000 को लालू और राबड़ी के खिलाफ़ आरोप तय कर दिए गए.

23 नवंबर, 2006 को मामले की बहस पूरी हो गई.

चार दिसंबर, 2006 को जज ने फ़ैसला सुनाने के लिए 18 दिसंबर की तारीख तय की.

18 दिसंबर, 2006 को लालू और राबड़ी को आय से अधिक संपत्ति के मामले से मुक्त कर दिया गया.

31 मई, 2007 को लालू प्रसाद यादव के भतीजे समेत 58 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया और उन्हें पांच से छह साल की सज़ा सुनाई गई.

एक मार्च, 2012 को सीबीआई अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्रा और जनता दल-यू के जहानाबाद से सांसद जगदीश शर्मा समेत 31 लोगों के खिलाफ़ फर्जी बिलों के सहारे बांका और भागलपुर कोषागार से 46 लाख रुपये निकालने के मामले में आरोप तय कर दिए.

17 सितंबर, 2013 को रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने चारा घोटाला मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया.

30 सितंबर, 2013 को अदालत ने चारा घोटाले में फ़ैसला सुनाया.

चारा घोटाले में 17 साल बाद आए फ़ैसले में लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र समेत 45 लोगों को दोषी करार दिया गया.

इनके अलावा मुख्य आरोपियों में आईएएस अफ़सर महेश प्रसाद, फूलचंद सिंह, बेक जूलियस, के अर्मुगम और आयकर अधिकारी एसी चौधरी, पशुधन विकास मंत्री-विद्या सागर निषाद, आर के राणा और ध्रुव भगत भी शामिल थे.

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