नहीं रहे विपश्यना गुरु एसएन गोयनका

Image caption सत्य नारायन गोयंका को पद्म भूषण सम्मान मिला था.

भारत में विपश्यना गुरु और चर्चित आध्यात्मविद सत्य नारायन गोयनका का निधन हो गया है. रविवार देर रात उन्होंने मुंबई में स्थित अपने आवास में आखिरी सांसे ली. वो 90 वर्ष के थे.

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार मंगलवार एक अक्टूबर को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

पिछले ही वर्ष सत्य नारायन गोयंका को पद्म भूषण सम्मान दिया गया था.

एसएन गोयनका बर्मा की सायज्ञी यू बा खिन परंपरा की विपश्यना ध्यान के शिक्षक थे. साल 1969 से ही उन्होंने लोगों को विपश्यना मेडिटेशन सिखाना शुरू कर दिया था. जिसके बाद उन्होंने नासिक के इगतपुरी में अपना मेडिटेशन सेंटर खोला.

गोयनका की वेबसाइट धम्म डॉट ओआरजी के अनुसार उनका जन्म बर्मा में हुआ था और वहीं वो पले बढ़े थे. शुरुआत के कुछ वर्षों में व्यवसाय संभालते हुए उनकी मुलाकात सायज्ञी यू बा खिन से हुई जिनसे उन्होंने विपश्यना ध्यान तकनीक सीखी.

सायज्ञी से ध्यान की 14 वर्षों की शिक्षा के बाद गोयनका ने भारत में ही बसने की योजना बनाई और वर्ष 1969 से लोगों को विपश्यना सिखाने लगे.

ध्यान का कोर्स

विविध धर्मों और संप्रदायों के लोग गोयनका के मेडिटेशन कोर्से काफ़ी पसंद करने लगे थे. दुनियाभर से विदेशी पर्यटक भी खासतौर पर ये कोर्स करने भारत आते थे.

गोयनका की वेबसाइट के अनुसार, विपश्यना गुरू ने करीब 300 पाठ्यक्रमों में, भारत, पूर्व और पश्चिम के देशों के हज़ारों लोगों को ध्यान की ये तकनीक सिखाई.

उन्होंने भारत, कनाडा, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, श्रीलंका, थाइलैंड, बर्मा और नेपाल समेत कई देशों में अपना केंद्र खोला.

ध्यान की जो तकनीक गोयनका सिखाते थे इसकी परम्परा गौतम बुद्ध के ज़माने से चली आ रही है.

धम्म डॉट कॉम के अनुसार, बुद्ध ने कभी भेदभाव करने वाला धर्म नहीं सिखाया, उन्होंने ‘धम्म’ सिखाया जिसका मतलब होता है – मुक्ति का मार्ग – जो कि सबके लिए समान है.

गोयनका से ध्यान सीखने वाले लोग लगभग सभी धर्म और संप्रदाय से थे.

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