रशीद मसूद को चार साल की जेल की सज़ा

भारतीय संसद
Image caption रशीद मसूद फिलहाल संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा के सदस्य हैं

कांग्रेस सांसद रशीद मसूद को सीबीआई की विशेष अदालत ने एमबीबीएस सीट आवंटन मामले में चार साल जेल की सज़ा सुनाई है. अदालत ने कुछ समय पहले उन्हें भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया था. सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया है.

इस तरह मसूद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संसद सदस्यता गंवाने वाले पहले सांसद होंगे.

मसूद 1990 और 1991 के बीच केंद्र की विश्वनाथ सिंह सरकार में स्वास्थ राज्य मंत्री थे. केंद्रीय पूल से देश भर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए त्रिपुरा को आवंटित एमबीबीएस सीटों पर धोखाधड़ी से अयोग्य उम्मीदवारों को नामित करने के मामले में मसूद को पिछले दिनों दोषी ठहराया गया था.

सीबीआई की विशेष अदालत के जज जेपीएस मलिक ने उन्हें धोखेबाजी, जालसाजी और आपराधिक षडयंत्र का दोषी करार दिया.

सज़ा सुनाए जाने के बाद मसूद ने खुद को निर्दोष बताया.

अधर में अध्यादेश

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 10 जुलाई को दिए गए अहम फैसले के बाद रशीद मसूद दोषी करार दिए जाने से वाले पहले सांसद हैं.

इस फैसले में दोषी करार दिए जाने पर दो साल या उससे ज्यादा की सज़ा पाने वाले सांसदों और विधायकों को अयोग्य करार देने की बात कही गई है.

सोमवार को लोकसभा सांसद और आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद यादव को रांची में सीबीआई की अदालत ने चारा घोटाले में दोषी करार दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार एक अध्यादेश लाई थी जिसके अनुसार दोषी कराए जाने के बाद भी सांसद और विधायक स्टे हासिल करने या अपनी अपील पर फैसला आने तक पद पर रह सकते थे.

लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों इस अध्यादेश को बकवास करार दिया था.

विपक्ष ने इस अध्यादेश पर ये कहते हुए सवाल उठाया है कि इससे ये संदेश जाता है कि भ्रष्ट नेताओं को बचाने की कोशिश हो रही है.

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी इस अध्यादेश पर अब तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

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