आख़िर कश्मीर के केरन सेक्टर में हो क्या रहा है?

Image caption खबरों के मुताबिक भारतीय सीमा में सुव्यवस्थित ढंग से घुसपैठ की गई है.

भारत प्रशासित कश्मीर के सीमावर्ती गांव केरन से मिली ताज़ा ख़ुफ़िया रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान से भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की गई है.

पिछले दस दिनों से भारतीय सेना इन हथियारबंद घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं और दोनों तरफ़ से गोलीबारी जारी है.

सैन्य अधिकारियों ने हालांकि हथियारबंद चरमपंथियों या पाकिस्तानी सैनिकों के ज़रिए भारतीय क्षेत्र में क़ब्ज़े से बार-बार इनकार किया है, लेकिन सेना के ज़रिए वहाँ मीडिया को जाने की अनुमति नहीं देने से अटकलों का बाज़ार गर्म है कि वहां आख़िर क्या हो रहा है.

पाकिस्तान ने भारत के इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है .पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग ने एक बयान जारी कर कहा, ''भारतीय सेना की तरफ़ से लगाए गए आरोप बेबुनियाद और सरासर झूठ हैं. इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है.''

मीडिया पर रोक

एक भारतीय शीर्ष ख़ुफ़िया सूत्र ने मौजूदा मुठभेड़ के बारे में जानकारी देते हुए कहा, "शाला भुट्टो गांव के पास केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा के साथ हमने जो बाड़े बनवाए हैं, देखने में आया है कि पाकिस्तान की 10 नार्थ लाइट इन्फ़ैंट्री के कुछ सैनिक उसकी ओर आगे बढ़ रहे हैं."

हालांकि भारतीय सेना प्रमुख बिक्रम सिंह ने इन ख़बरों से इनकार किया है कि पाकिस्तान की सेना ने सीमावर्ती क़स्बे केरन की कुछ ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया है. केरन जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से क़रीब 120 किलोमीटर दूर उत्तर में है.

भारतीय सेना ने कश्मीर सीमा पर जारी गोलीबारी को लेकर अधिक ब्यौरा नहीं दिया है. इस कारण 24 सितंबर से जारी लंबे अभियान को लेकर संदेह बना हुआ है.

जिस जगह मुठभेड़ चल रही है, वहां मीडिया या स्थानीय पुलिस अधिकारियों को जाने की इजाज़त नहीं दी गई है. सेना के अधिकारियों के अनुसार इस मुठभेड़ में अब तक 17 चरमपंथी मारे जा चुके हैं.

सेना की सतर्कता

Image caption सीमा पर बाड़ लगाए जाने के बावजूद घुसपैठ रोकने में कामयाबी नहीं मिल सकी है.

भारतीय सेना के उत्तरी कमांड के प्रवक्ता कर्नल राकेश कालिया ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "पड़ोस के सेक्टर की एक ताज़ा लेकिन अलग मुठभेड़ में हमने तीन घुसपैठियों को मार दिया है."

सेना का मानना है कि क़रीब 40 से 50 हथियारबंद घुसपैठियों ने भारतीय सीमा के अंदर घुसकर मोर्चा ले रखा है.

कश्मीर में सेना के एक कमांडर ने भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए कहा, "हम नुक़सान से बचने के लिए आगे नहीं बढ़ रहे हैं. लेकिन हम काफ़ी चौकसी बरत रहे हैं और हम जल्द ही उन्हें खदेड़ने में कामयाब होंगे."

कश्मीर में ख़ुफ़िया सूत्रों ने बताया कि सितंबर के महीन में जब भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट केरन सेक्टर में कुमायूँ रेजीमेंट की जगह ले रही थी, तब उसने कुछ पोस्टों को ख़ाली छोड़ दिया था. ये पोस्ट कुल्हाड़ी, खोकरी और मूथल थीं.

गुरिल्ला युद्ध

इस अभियान से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि, " हथियारबंद धुसपैठियों या पाकिस्तानी बलों ने इन ख़ाली पड़ी पोस्टों पर क़ब्ज़ा जमाने की योजना बनाई. अब सेना बिना किसी नुक़सान के उस ज़मीन पर फिर से क़ब्ज़ा हासिल करना चाहती है."

केरन सेक्टर समुद्र तल से क़रीब 10,000 फ़ुट ऊपर है. लंबी झाड़ियां और बड़ी बड़ी चट्टानें इस जगह को गुरिल्ला युद्ध के लिए उपयुक्त बनाती हैं.

Image caption सेना के मुताबिक 30 से 40 हथियारबंद घुसपैठिएं भारतीय सीमा में प्रवेश कर गए हैं.

सीमावर्ती गांव शाला भुट्टो के आसपास जारी इस मुठभेड़ के बारे में भारतीय सेना प्रमुख बिक्रम सिंह ने कहा है कि "हम उन्हें जल्द ही खदेड़ देंगे."

1990 में घाटी में जब हथियारबंद संघर्ष शुरू हुई थी तब इस गांव के निवासी पाकिस्तान की ओर भाग गए थे.

मौजूदा लड़ाई पाकिस्तान की 'मुजाहिदीन चौकी 646' के ठीक सामने ही चल रही है.

कारगिल से तुलना

भारतीय मीडिया ने केरन में मुठभेड़ की तुलना करगिल से की है. लेकिन केरन में स्थानीय लोगों ने सेना के प्रतिष्ठानों के आसपास किसी तरह की युद्ध जैसी गतिविधियों से इनकार किया है.

केरन के स्थानीय निवासी वसीम भट्ट ने बताया कि "जहां लड़ाई चल रही है, उस इलाक़े में कोई नहीं रहता है, लेकिन हमने यहां आर्मी कैंप में या उसके आस-पास किसी तरह की गतिविधियों को नहीं देखा है."

उन्होंने हालांकि इस बात की पुष्टि की है कि मुठभेड़ के मौक़े पर हेलिकॉप्टर चक्कर काट रहे हैं जो कि आबादी वाले गांव से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर हैं.

ऐसा माना जा रहा है कि शाला भुट्टो में भारतीय सेना से संघर्ष कर रहे चरमपंथियों के पास नियंत्रण रेखा की दूसरी तरफ़ से नियमित रूप से आवश्यक सामान की आपूर्ति की जा रही है.

युद्ध की योजना

Image caption जम्मू और कश्मीर में चरमपंथी लगातार पुलिस और सेना को निशाना बना रहे हैं.

एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी ने बताया कि, "ये सोचना कि वो भूख से मर जाएंगे या वापस भाग जाएंगे, मेरे हिसाब से सही नहीं है. इस इलाक़े पर फिर से क़ब्ज़ा पाने के लिए हमें युद्ध की योजना बनानी होगी."

कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में अधिकारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सेना के गोपनीय तरीक़े से काम करने के कारण आसपास रहने वाले लोगों में घबराहट है. केरन सेक्टर कुपवाड़ा ज़िले में है.

मुठभेड़ स्थल से क़रीब 25 किलोमीटर दूर केरन के एक निवासी ने बताया कि "अगर यह सिर्फ़ एक मुठभेड़ है तो सेना मीडिया के एक दल को वहां जाने और हालात का जायज़ा लेनी की इजाज़त क्यों नहीं दे रही है."

सेना ने इस अभियान के लिए भारतीय वायु सेना की मदद लेने से इनकार किया है, लेकिन केरन में प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा है कि उन्होंने हेल़िकॉप्टरों की असामान्य आवाजाही देखी है.

सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इस साल नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की घटनाएं काफ़ी बढ़ गई हैं. लगभग एक दशक से भारत और पाकिस्तान में नियंत्रण रेखा के पास युद्ध विराम लागू है लेकिन दोनों तरफ़ से इसकी अवहेलना भी हुई है और दोनों एक दूसरे के ऊपर आरोप भी लगाते रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार