तेलंगाना: चंद्रबाबू नायडू का अनशन

चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना
Image caption चंद्रबाबू का कहना है कि सीमांध्र के लोगों का भरोसा सरकार से उठ गया है.

दिल्ली के आंध्र भवन में अपने दर्जनों समर्थकों के बीच आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगुदेशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के विभाजन के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है.

आंध्र भवन के अहाते में एक ऊंचे मंच पर भूख हड़ताल पर बैठे चंद्रबाबू पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे.

उन्होंने कहा, "अलग तेलंगाना राज्य बनाने का फैसला एक राजनीतिक मैच फिक्सिंग है और कांग्रेस ने इसके लिए ज़रूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ पाने के लिए ये फ़ैसला किया है लेकिन उसे अपनी आंखें खोलकर सच्चाई देखनी चाहिए."

आंध्र भवन में मौजूद चंद्रबाबू के समर्थक भी ऐसी ही बातें कर रहे थे. हाथों में पार्टी के झंडे उठाए उनके समर्थकों ने कहा कि वे अपने नेता के साथ भूख हड़ताल में शामिल हैं.

चंद्रबाबू की एक समर्थक ने कहा, "मैं उस वक़्त तक यहाँ से नहीं हटूंगी जब तक कि हमारे नेता यहाँ हैं."

'अवैध और अनैतिक'

ऐसा लगता है कि चंद्रबाबू एक लंबी भूख हड़ताल के लिए तैयार हैं. ट्रकों में तंबू, कुर्सियां और खाने पीने का सामान लाया जा रहा था. आंध्र भवन के बाहर और अंदर पुलिस का ज़बरदस्त इंतज़ाम था. ज़ाहिर है मीडिया वालों की भी एक बड़ी भीड़ वहां जमा थी.

Image caption अलग तेलंगाना बनाने के खिलाफ़ आंध्र प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से प्रदर्शन जारी हैं.

आंध्र प्रदेश से आये चंद्रबाबू के कुछ समर्थकों ने कहा कि राज्य का विभाजन अवैध और अनैतिक है. उन्होंने कहा, ''हम देश बचाने आए हैं".

तेलुगु भाषा बोलने वाले उनके दर्जनों समर्थक दिल्ली के कई इलाकों से भी आए थे. उनके एक समर्थक एक ने कहा कि वे दिल्ली में पिछले 30 सालों से रह रहे हैं लेकिन उन्हें आंध्र प्रदेश से अब भी उतना ही प्रेम है जितना उस समय था जब वो राज्य में रहते थे. उन्होंने कहा राज्य का बंटवारा उनके लिए बुरी खबर है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन अक्तूबर को अलग तेलंगाना राज्य बनाने के लिए मंत्रियों के एक समूह के गठन को मंज़ूरी दी थी. इससे पहले 30 जुलाई को कांग्रेस कार्यसमिति ने तेलंगाना के गठन को मंजूरी दी थी.

केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के बाद आंध्र प्रदेश में इसका विरोध तेज़ होता जा रहा है. राज्य के कई शहरों में प्रदर्शन और हिंसा की खबरें हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं)

संबंधित समाचार