तेलंगानाः क्या है आगे की संवैधानिक राह?

  • 7 अक्तूबर 2013
तेलंगाना विरोधी प्रदर्शन

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलगुदेशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि पृथक तेलंगाना राज्य बनाने का फैसला एक राजनीतिक मैच फिक्सिंग है और कांग्रेस ने इसके लिए जरूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ पाने के लिए यह फैसला किया है लेकिन उसे अपनी आंखें खोलकर सच्चाई देखनी चाहिए.

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीन अक्टूबर को पृथक तेलंगाना राज्य बनाने के लिए मंत्रियों के एक समूह (जीओएम) के गठन को मंजूरी दी थी.

मंत्री समूह राज्य के बंटवारे के तरीकों के बारे में विचार करेगा.

संवैधानिक प्रक्रिया

इससे पहले 30 जुलाई को कांग्रेस कार्यसमिति ने तेलंगाना के गठन को मंजूरी दी थी.

केन्द्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के बाद आंध्र प्रदेश में इसका विरोध तेज होता जा रहा है. राज्य के कई शहरों में प्रदर्शन और हिंसा की खबरें हैं.

नायडू के आरोपों पर संविधानविदों का कहना है कि पृथक राज्य के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया तो अभी शुरू भी नहीं हुई है.

Image caption चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस पर राजनीतिक फ़ायदे के लिए तेलंगाना गठन का आरोप लगाया है

उनका कहना है कि राज्य बनाने के लिए न तो आंध्र प्रदेश विधानसभा की मंजूरी की जरूरत है और न ही संविधान में संशोधन की.

जाने-माने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि नए राज्य के गठन या राज्यों के पुनर्गठन के बारे में संविधान में स्पष्ट प्रावधान है.संविधान में यह अधिकार संसद के पास है.

उन्होंने कहा कि नए राज्य के गठन के लिए राष्ट्रपति संबंधित राज्य की विधानसभा से सलाह मशविरा करते हैं लेकिन वह राज्य विधानसभा की राय मानने के लिए बाध्य नहीं हैं.

इसके बाद राष्ट्रपति की सिफारिश पर संसद में एक विधेयक लाया जाता है जिसे दोनों सदनों में पास कराने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है. फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाता है.

जाने माने वकील शांति भूषण ने भी कहा कि तेलंगाना मामले में अभी तो संवैधानिक प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई है इसलिए प्रक्रिया नहीं अपनाने का तो सवाल ही नहीं उठता.

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