एंसेफ़ेलाइटिस: यूपी में 15 बच्चों की मौत

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उत्तर प्रदेश में वायरल एंसेफ़ेलाइटिस की वजह से पिछले कुछ दिनों में 15 बच्चों की मौत हो गई है. इसके साथ ही इस साल अब तक इस बीमारी की वजह से 358 लोग मर चुके हैं.

यह बीमारी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और आसपास के इलाक़ों में अमूमन मॉनसून के मौसम में होती है और ज़्यादातर बच्चे इसकी चपेट में आते हैं.

एंसेफ़ेलाइटिस से पीड़ित 200 से ज़्यादा लोगों का सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है.

वर्ष 1978 में इस बीमारी का पहला केस मिला था, जिसके बाद से अब तक क़रीब साढ़े छह हज़ार बच्चों की एंसेफ़ेलाइटिस से मौत हो चुकी है.

मच्छर ज़िम्मेदार

गोरखपुर और नेपाल सीमा से जुड़े भारत के ज़िलों और हिमालय की तराई में अक्सर बाढ़ आती हैं, जिस दौरान मच्छरों को पनपने का मौका मिलता है. इन मच्छरों के ज़रिए एंसेफ़ेलाइटिस का वायरस इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने मंगलवार को इस बीमारी से 15 बच्चों की मौत की ख़बर दी.

डॉक्टरों के मुताबिक़ बीमारी से पीड़ित मरीज 10 से 12 ज़िलों में हैं और ज़्यादातर ग़रीब परिवारों से हैं.

उनका कहना है कि 2005 तक ज़्यादातर मौतों की वजह जापानी एंसेफ़ेलाइटिस था. मगर पिछले सात सालों में बच्चे दूसरे कई वायरल एंसेफ़ेलाइटिस की वजह से भी मर रहे हैं.

अभी तक इनके असल कारणों का पता नहीं चल पाया है.

इस बीमारी में सिरदर्द के अलावा मरीज़ को उल्टी आती हैं और इंसान कोमा में जा सकता है. उसका दिमाग़ काम करना बंद कर सकता है या दिल और गुर्दे नाकाम हो सकते हैं.

टीका तैयार

डॉक्टरों का कहना है कि छह महीने से 15 साल के बच्चे इस बीमारी से ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं. जो बच्चे इसके प्रकोप में आकर बच जाते हैं, उन्हें जीवन भर तंत्रिका संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

सरकार का कहना है कि वह बार-बार हो रहे एंसेफ़ेलाइटिस का प्रकोप रोकने की कोशिश कर रही है.

पिछले हफ़्ते इस वायरस से निपटने के लिए चल रहे राष्ट्रीय प्रोग्राम के तहत जापानी एंसेफ़ेलाइटिस का टीका लॉन्च किया गया था.

तब स्वास्थ्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा था, "1955 में तमिलनाडु में पहली सूचना से लेकर जापानी एंसेफ़ेलाइटिस वायरस अब 19 राज्यों के 171 ज़िलों तक फैल चुका है. "

2005 में जापानी एंसेफ़ेलाइटिस वायरस के कारण गोरखपुर में एक हज़ार लोगों की मौत हुई थी, इनमें ज़्यादातर बच्चे थे. यह 1978 के बाद वायरस का सबसे बड़ा हमला था.

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