आंध्र प्रदेश: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म

बिजली संकट

आंध्र प्रदेश में बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल वापस ले ली है. माना जा रहा है कि कुछ ही समय में सीमांध्र के 13 जिलों में बिजली सप्लाई सामान्य हो सकेगी.

बीते चार दिन से सीमांध्र के बिजली कर्मचारी आंध्र प्रदेश के विभाजन के विरोध में हड़ताल पर थे.

हालांकि सीमांध्र के अराजपत्रित कर्मचारी पिछले 59 दिन से हड़ताल कर रहे हैं लेकिन उसका ज़्यादा असर नहीं हुआ है.

केंद्रीय कैबिनेट के तेलंगाना के गठन को मंज़ूरी देने के बाद इस हड़ताल में बिजली कर्मचारी भी जुड़ गए थे जिसकी वजह से तटीय आंध्र और रायलसीमा के 13 ज़िलों में तीन से लेकर 10 घंटे तक

बिजली कटौती हो रही थी. तटीय आंध्र पर तूफ़ान का ख़तरा भी मंडरा रहा है. इसे देखते हुए भी बिजली कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की जा रही थी.

'बिल तय नहीं'

Image caption तेलंगाना के गठन को लेकर सीमांध्र में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

इस बीच गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के बयान के बाद ये अटकलें लग रही हैं कि तेलंगाना के गठन को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र में बिल आएगा या नहीं ये तय नहीं है.

सुशील कुमार शिंदे से आज जब पत्रकारों ने तेलंगाना के गठन को लेकर बिल के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "हम इस बारे में विचार करेंगे."

शुक्रवार को तेलंगाना पर मंत्री समूह की बैठक होनी है. इस मंत्री समूह के अध्यक्ष गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ही हैं.

तेलंगाना के गठन को लेकर सीमांध्र में भारी विरोध हो रहा है.

राज्य के प्रमुख विपक्षी दल टीडीपी के नेता चंद्रबाबू नायडू और वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगनमोहन रेड्डी अनशन कर रहे हैं.

वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है. जगनमोहन रेड्डी पाँच अक्तूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे.

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