झारखंड: ऐसी ठगी का जाल, जिसमें फँसे सैकड़ों

यूरेनियम के लिए मशहूर झारखंड राज्य का जादूगोड़ा इलाक़ा इन दिनों धोखाधड़ी के एक मामले को लेकर सुर्ख़ियों में है. यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड में काम करने वाले एक चतुर्थ वर्गीय अस्थायी कर्मचारी कमल सिंह ने सैकड़ों लोगों से करोड़ों की कथित ठगी कर ली है. इसके बाद वे फ़रार हो गए हैं.

कमल सिंह पर आरोप है कि एक लाख रुपए पर महीने में पांच हज़ार रुपए ब्याज देने के नाम पर वे पूंजीनिवेश करते थे.

जादूगोड़ा थाना प्रभारी नंदकिशोर दास के मुताबिक़ अब तक 165 लोगों ने ठगी की शिकायत की है. इस आधार पर कमल सिंह समेत सात लोगों के ख़िलाफ़ 25 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज की गई.

पुलिस के मुताबिक़ प्रारंभिक जांच में कथित संदिग्ध के स्थानीय लोगों से छह करोड़ रुपए निवेश कराए जाने की जानकारी मिली है.

मुसाबनी के डीएसपी वचनदेव कुजुर का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है. कथित संदिग्धों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं. पुलिस के अनुसार उनके कई संदिग्ध ठिकानों पर छापे भी मारे गए हैं.

सात लोगों पर हुआ है एफ़आईआर

Image caption जादुगोड़ा थाने में शिकायत दर्ज करवाने वालों के मुताबिक आरोपी कमल सिंह इस काम में मदद के लिए एजेंट भी रखे हुए थे.

पुलिस के मुताबिक़ कमल सिंह उनके भाई दीपक सिंह समेत उनके पांच सहयोगी रूद्रो भगत, आदित्य पात्रो, सिद्धू हो, निहिर चंद्र मल्लिक और अरुण कुमार सिंह के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं.

कमल सिंह ने इस काम में कई एजेंटों को लगा रखा था. प्राथमिकी दर्ज कराने वालों से पूछताछ में ये भी तथ्य सामने आए हैं कि एक लाख रुपए जमा करने पर एजेंट को भी वे एक हज़ार रुपए देते थे.

एक करोड़ रुपए जमा कराने वाले कथित एजेंट को चारपहिया वाहन भी दिए जाते थे. फ़िलहाल तमाम तथ्यों की जांच जारी है.

सात साल से कर रहा था यह धंधा

पुलिस के मुताबिक़ छानबीन में पता चला है कि कमल सिंह पिछले सात साल से पूंजीनिवेश का काम कर रहे थे. उन्होंने विभिन्न कंपनियों के नाम पर लोगों से पैसे लिए. इसमें राजगन्या होटल प्राइवेट लिमिटेड, राज मोबकॉम प्रमुख तौर पर शामिल हैं.

पुलिस के मुताबिक़ कमल सिंह और उनके भाई लोगों को लेटर पैड और एग्रीमेंट पेपर पर लिखकर देते थे कि उन्होंने कितने पैसे दिए हैं. इसमें इसका ज़िक्र नहीं होता था कि पूंजीनिवेश के बदले महीने या सालाना ब्याज दिया जाएगा. लोग विश्वास पर उनके पास पूंजीनिवेश करते थे.

बड़ी राशि के निवेश की आशंका

जादूगोड़ा के रहने वाले टीकी मुखी ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि उनके पिता जासीक मुखी समेत अन्य परिजनों ने 48 लाख रुपए निवेश किए थे. क्या थाने में शिकायत की है, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनके पिता ने लिखित तौर पर आवेदन दिया है.

टीकी मुखी ने आशंका जताई है कि बहुतेरे लोग ऐसे हैं, जिन्होंने बड़ी राशि निवेश की थी. वे सामने नहीं आ रहे हैं.

अधिकतर कर्मचारी ठगे गए

Image caption यूसीआईएल के रिटायर्ड कर्मचारी सबसे अधिक शिकार बने हैं.

यूसीआईएल से वीआरएस लेने वाले कर्मचारी रवींद्र सिंह का कहना है कि ठगी का शिकार होने वालों में अधिकतर सीआईएल के कर्मचारी हैं. कई लोगों ने रिटायर होने के बाद लाखों रुपए निवेश किए थे.

रवींद्र सिंह के मुताबिक़ उन्होंने ख़ुद भी 18 लाख रुपए निवेश किए थे. इनमें आठ लाख अपनी पत्नी सुषमा सिंह, एक लाख बेटी चंद्रकांता सिंह और तीन लाख दामाद संजय सिंह के थे.

रवींद्र सिंह के मुताबिक़ एक मई 2012 को उन्होंने यूसीआईएल से स्वैच्छिक सेवानिवृति ली थी.

कथित संदिग्ध के झांसे में कैसे फंसे, इस सवाल पर उन्होंने बताया कि कमल सिंह के परिवार से उनके अच्छे ताल्लुक़ात थे. कमल सिंह और उनके भाई दीपक सिंह ने कहा था कि जब वे बेटी की शादी तय करेंगे, तो एक मुश्त पैसे वापस कर देंगे.

उन्होंने बताया कि निवेशक ने चार महीने तक उन्हें ब्याज भी दिए, इसके बाद गोलमटोल जवाब देने लगे. रवींद्र बताते हैं कि स्थानीय लोगों ने दीपक सिंह के घर को भी घेरा था, लेकिन वह फ़रार हो गए.

करोड़ों के मालिक बन बैठे

Image caption धोखाधड़ी के शिकार हुए लोगों ने कमल सिंह के घर को घेर लिया है.

पुलिस के मुताबिक़ प्रारंभिक जांच में यह भी बात सामने आई है कि संदिग्ध की हैसियत करोड़ों की है. उन्होंने जादूगोड़ा में मॉल भी बना ली है. इसमें एक रेस्टोरेंट भी चलता है. इन तमाम बातों की जांच जारी है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जुलाई महीने से पूंजीनिवेशकों को ब्याज के पैसे जब नहीं मिले, तो वे कथित एजेंटो की तलाश करने लगे. इसके बाद स्थानीय लोग कमल सिंह और उनके भाई दीपक सिंह के घर पर भी गए. तब तक वह फ़रार हो चुके थे. इसके बाद स्थानीय लोगों ने एक-एक कर जादूगोड़ा थाने में आवेदन देने की शुरुआत की.

जनवरी में यह मामला उठा था

स्थानीय लोग बताते हैं कि जनवरी महीने में पुलिस पब्लिक मीटिंग में यह मामला स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुलिस के समक्ष उठाया था. लोगों ने पुलिस अफ़सरों से कहा था कि चिटफ़ंड के नाम पर लोगों से अवैध तरीक़े से पैसे जमा किए जा रहे हैं.

यह ठगी का मामला हो सकता है. इस बारे में जादूगोड़ा थाना प्रभारी कहते हैं, ''उस समय वे यहां पदस्थापित नहीं थे. इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.''

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