पायलिन: आश्चर्य है,लोग अभी भी यहाँ आ रहे हैं

  • 12 अक्तूबर 2013

समुद्री तूफ़ान पायलिन के चलते उड़ीसा में यूं तो सरकार ने लाखों लोगों को तटीय इलाकों से निकाल लिया है लेकिन बड़ी तादाद में पर्यटक अभी भी तीर्थ नगरी जगन्नाथ पुरी में फंसे हुए हैं.

पुरी में एक स्थानीय होटल में अपनी पत्नी के साथ घूमने गए हुए पलाश हलदर ने बीबीसी को शनिवार सुबह टेलीफ़ोन पर बताया "हम फंस गए हैं और पुरी से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है."

हलदर ने बताया कि शनिवार शाम की जिस ट्रेन से उनका पश्चिम बंगाल में घर वापसी का रिजर्वेशन था "वह ट्रेन रद्द हो गई है".

(आखिर यह पायलिन है क्या बला?)

हलदर के अनुसार स्थानीय प्रशासन ने पुरी से बाहर जाने के लिए बस की व्यवस्था की थी लेकिन मौसम की ख़राबी के कारण वह बस भी नहीं निकली है.

हलदर ने कहा "बिजली नहीं है, बारिश हो रही है और टीवी केबल कुछ नहीं चल रहा है. कुछ पता नहीं लग रहा है. अब जो होगा देखा जाएगा."

ऐसे में पुरी स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ है

पुरी की यात्रा पर गई बिहार की प्रिया सौरभ का कहना है, "कल रात ही प्रशासन के लोगों ने हमारा होटल खाली करा दिया था. वैसे तो खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन होटल में दूध आना बंद हो गया था जिससे चाय नहीं मिल रही थी."

Image caption पुरी में रह रह कर तेज़ बारिश हो रही है और समुद्र की लहरें तूफ़ानी हो रही हैं.

प्रिया 9 अक्टूबर पुरी आईं थीं और वहां के हॉलीडे रिज़ॉर्ट में रुकी हुई थी.

प्रशासन की ओर से होटल के यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचाने के लिए किसी बस या ऑटो का कोई इंतज़ाम उन्होंने नहीं देखा. लेकिन उनका कहना था कि समुद्र के किनारे वाले क्षेत्र में प्रशासन की काफ़ी सक्रियता थी और वे फंसे लोगों की मदद करने में जुटे हुए थे.

( भारत के अब तक के बड़े तूफ़ान)

उनका कहना है, "सुबह रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ दिखी, सब वहां से तुरंत निकलना चाहते थे. हमलोगों को जानकारी मिली की चार-पांच स्पेशन ट्रेन कैंसिल हो गई है. लेकिन ट्रेन में टीटी भी यात्रियों का काफ़ी सहयोग कर रहे हैं." प्रिया सुबह पुरी से आसनसोल के लिए शताब्दी ट्रेन पकड़ चुकी हैं.

एक तरफ तो लोग फंसे हुए हैं दूसरी तरफ पुरी में अभी भी पर्यटकों का आना जारी है.

स्थानीय टूर ऑपरेटर जुगब्रत कर ने कि "हम इस समय अपने टूरिस्ट सीज़न के पीक में हैं."

कर ने कहा "मुझे यह देख कर आश्चर्य हो रहा है कि लोग अभी भी आ रहे हैं. मैंने शनिवार सुबह अपनी आँखों से पश्चिम बंगाल के लोगों को यहाँ अपनी गाड़ियों से आते देखा है."

उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से वरिष्ठ पत्रकार संदीप साहू ने बताया कि अकेले गंजाम ज़िले से एक लाख से अधिक लोगों को राज्य सरकार के बचाव कैंपों में पहुंचाया गया है लेकिन कैंपो में पके हुए खाने की ठीक व्यवस्था नहीं है.

बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने भुवनेश्वर वहाँ से ख़बर दी है कि अधिकारियों ने दोपहर 12 बजे से भुवनेश्वर हवाई अड्डा बंद करने की घोषणा की है और सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं.

भुबनेश्वर और उसके आसपास तेज हवाएं चलना शुरू हो गई हैं और बारिश लगातार हो रही है. में लोगों ने दुकानें बंद कर दी हैं और शाम तक पहुँचने वाले तूफ़ान की आशंका में सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं.

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