पायलिन ने खींची ज़िंदगी की नकेल

समुद्री तूफ़ान पायलिन ने शनिवार शाम साढ़े आठ से साढ़े नौ बजे के बीच ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाक़ों में दस्तक दी. मौसम विभाग के मुताबिक तूफ़ान रविवार सुबह करीब तीन बजे तक यह कमज़ोर पड़ने लगा. हालाँकि तूफ़ान के कारण ओडिशा और आंध्र प्रदेश के इलाक़ों में रविवार को भी दिनभर भारी बारिश जारी रहेगी.

तूफ़ान के कारण ओडिशा और आंध्र प्रदेश में जीवन व्यापक स्तर पर प्रभावित रहा और लोग इससे निटपने की तैयारियों में जुटे रहे. इस बार मौसम विभाग द्वारा सटीक जानकारियाँ उपलब्ध करवाए जाने और राहत एवँ बचाव कार्यों के वक़्त पर शुरू हो जाने के कारण संभावित नुकसान कम रहा.

आप बीती

ओडिशा के बरहामपुर से भावना ने बीबीसी को बताया, "यहाँ रात करीब साढ़े नौ बजे तूफ़ान ने दस्तक दी. उस वक़्त हवाएं बहुत तेज़ थी और हम सब बहुत डर गए थे. हालात इतने भयानक थे कि मैं बयान नहीं कर सकती. मेरे हाथ-पैर काँप रहे थे. बारिश बहुत तेज़ थी और पानी हमारे घर में घुस रहा था."

भावना के मुताबिक रात साढ़े बारह बजे के करीब तूफ़ान की गति कम होना शुरू हुई और तीन बजे के आसपास इसकी गति 90 प्रतिशत तक कम हो गई और बारिश में भी कमी आई. भावना का परिवार और उनके पड़ोसी रात भर जागे रहे. उनके घर में करीब तीस लोगों ने पनाह ली.

तूफ़ान के आने से तीन पहले से ही प्रशासन इसके विषय में जानकारियाँ दे रहा था जिस कारण लोगों ने इससे निपटने की तैयारियाँ की थी. भावना के परिवार ने खाने-पीने का सामान, रोशनी के लिए लालटेन और मोमबत्तियाँ तैयार रखीं थी तथा अपने फ़ोन चार्ज कर लिए थे.

इस बार लोगों ने प्रशासन के दिशा निर्देशों का पालन किया है और भावना को उम्मीद है कि बार नुकसान 1999 के मुकाबले काफ़ी कम होगा.

ओडिशा के पारादीप से कौश्तव ने बीबीसी को बताया, "घर से बाहर निकलते ही तेज़ हवाओं का अहसास हो रहा है, पेड़ टूटे पड़े हैं. कोई भी बाहर नहीं निकल रहा है. अभी तक हमें किसी की मौत या नुकसान होने की कोई ख़बर नहीं मिली है. लेकिन तूफ़ान बहुत तेज़ है."

'सिर्फ़ दुआएं'

भुवनेश्वर से रोमियो डे ने बताया, "हम डरे हुए हैं और घरों से बाहर नहीं निकल सकते. हम साफ़ मौसम के लिए दुआएँ कर रहे हैं."

तूफ़ान के आने से पहले भुवनेश्वर में रहने वाले सुशांतो साहू ने बताया, "बिजली गुल है और हर ओर अंधेरा है. सुबह से ही बारिश हो रही है, लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं और सड़के खाली हैं."

सुशांतो ने खाने के लिए सूखे मेवे और रोशनी के लिए मोमबत्तियों का इंतज़ाम कर लिया था. वे कहते हैं, "सरकार ने तूफ़ान के बारे में लोगों को जानकारियाँ दी हैं और इस बार अच्छा काम किया है और लोगों का खयाल रखा जा रहा है."

भुवनेश्वर से ही सुमेंद्रा बारिक ने बताया, "बिजली सुबह से ही काट दी गई थी और छोड़े पेड़ गिरने लगे थे. भूमिगत टेलीफ़ोन लाइनें से जुड़े इलाकों से संपर्क स्थापित हो पा रहा है. कालाबाज़ारी करने वाले लोगों ने गैस सिलेंडर और पेट्रोलियम पदार्थ महंगी दरों पर बेचना शुरु कर दिया था."

ओडीशा के कटक से निहार दास ने बताया, "मौसम विभाग के पूर्वानुमान में जैसा बताया गया था, हवाएँ तेज़ चल रही हैं और बारिश हो रही है. शाम चार बजे के बाद से हवा की रफ़्तार लगातार बढ़ती गई और हर गुज़रते घंटे के बाद ये भयावह होती गई. रास्ते साफ़ रखने के लिए स्थानीय प्रशासन को श्रेय दिया जाना चाहिए."

'रास्ते में फंसे'

तूफ़ान के कारण पुरी जा रहे बहुत से लोगों की यात्रा भी प्रभावित हुई है. ऐसे ही एक यात्री अनिल कुमार ने बताया, "मैं छुट्टियाँ मनाने के लिए पुरी जा रहा था. मैं भुवनेश्वर जाने के लिए दिल्ली से ट्रेन में बैठा था. दोपहर करीब डेढ़ बजे हमें बालासोर स्टेशन पर उतार दिया गया. किसी तरह हमें एक होटल मिल गया. शाम सात बजे के करीब भारी बारिश हो रही थी और तेज़ हवाएं चल रहीं थी."

ओडीशा और आंध्र प्रदेश के अलावा झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी लोग सतर्क रहे. हज़ारीबाग़ से अजय राणा ने बताया, "हज़ारीबाग़ और झारखंड में लोग सतर्क हैं और भारी बारिश से निपटने की तैयारियाँ कर रहे हैं."

तूफ़ान का असर त्यौहारों पर भी पड़ा है. कोलकाता से जॉन एलिस ने बताया, "ओडिशा के लोग त्यौराहारों के मौसम में कोलकाता से घर वापस जाने वाले थे लेकिन तूफ़ान के कारण वे यहीं रुक गए हैं. ओडीशा जाने वली ट्रेनों के रद्द होने के कारण दुर्गा पूजा और ईद पर लोग अब घर नहीं जा सकेंगे. यहाँ भी बादल छाए हुए हैं और भारी बारिश की संभावना है."

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