पाकिस्तानी चरमपंथियों का पैसा रोकने भारत-अमरीका साथ

हाफिज़ सईद, लश्कर

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक अमरीका और भारत के बीच पाकिस्तान में सक्रिय चरपंथी संगठनों की वित्तीय मदद को रोकने के लिए संयुक्त प्रयास पर सहमति बन गई है.

भारत के आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने अमरीका में कहा है कि दोनों देशों ने चरमपंथियों के वित्तीय नेटवर्क और उन्हें पैसे पहुँचाने वालों के ख़िलाफ़ मिलकर काम करने का निर्णय लिया.

रविवार को अरविंद मायाराम ने एक बयान में कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और इससे जुड़े जमात-उद-दावा जैसे संगठनों को निशाना बनाया जाएगा.

कई भारतीय एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा को साल 2008 में हुए मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार मानती हैं. इन हमलों में 160 लोग मारे गए थे.

बयान में इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि दोनों देश कौन से खास कदम उठाएंगे.

'हक्कानी पर शिकंजा'

अरविंद मायाराम ने पाकिस्तान में सक्रिय एक और चरमपंथी समूह हक्कानी नेटवर्क के ख़िलाफ़ कार्रवाई का भी उल्लेख किया.

हक्कानी नेटवर्क पर अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय दूतावास और नैटो सेनाओं पर हमले के आरोप हैं.

Image caption अरविंद मायाराम का कहना है कि लश्कर और इससे जुड़े संगठनों को निशाना बनाया जाएगा.

पिछले साल अमरीका ने हक्कानी नेटवर्क को "आतंकी संगठन" करार दिया.

इसके अलावा पिछले साल अमरीका ने प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज़ सईद पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया था.

पाकिस्तान और भारत के संबंध साल 2008 में मुंबई हमले के बाद बेहद तनावपूर्ण हो गए थे.

पिछले दो साल के दौरान संबंधों में सुधार के आसार दिख रहे थे.

तनावपूर्ण संबंध

लेकिन इस साल की शुरुआत में कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर जारी संघर्ष की वजह से दोनों देशों के बीच संबंध फिर तनावपूर्ण हो गए हैं.

इस साल नियंत्रण रेखा पर फ़ायरिंग की घटनाओं में कई नागरिक और सैन्य अधिकारी मारे गए हैं.

शनिवार को पाकिस्तान के थल सेनाध्यक्ष जनरल परवेज़ क़ियानी ने भारतीय सेना के आरोपों को अपमानजनक करार दिया था.

भारतीय सेना ने कहा था कि पाकिस्तानी सेना और खुफ़िया एजेंसी आईएसआई भारत प्रशासित कश्मीर में चरमपंथियों को बढ़ावा दे रही हैं.

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